उत्तराखंड पूरा का पूरा एक बहुमूल्य खज़ाना है। प्रकृति का यह तोहफा यात्रियों को सबसे ज़्यादा लुभाता है। उत्तराखंड के इस शुद्ध-साफ परिदृश्य की यात्रा अपने में ही एक अलग नया और उत्साही अनुभव है। बड़े-बड़े शहरों के शोर शराबे से दूर, उत्तराखंड के कुछ अनदेखे सौंदर्य की यात्रा आपके लिए एक रोमांचक यात्रा होगी।
उत्तराखंड के कुछ ऐसे ही पहाड़ी क्षेत्रों की अनोखी यात्रा आपकी सबसे मज़ेदार यात्रा होगी।
कानाताल
कानाताल एक छोटा सा पहाड़ी शहर है, जिसके पृष्ठभूमि में बर्फ से ढके पहाड़ हैं। इस जगह का यह नाम, यहाँ पर कई सालों पहले स्थित कानाताल झील के नाम पर पड़ा था। यहाँ की इष्टदेवी सरकंडा देवी से संबंधित देवी सती जी(पार्वती) की कई कथाएँ प्रचलित हैं। इसी नाम पर आधारित यहाँ का एक और मंदिर, यहाँ का मुख्य आकर्षण का केंद्र है। कानाताल उत्तराखंड के खूबसूरत खज़ानों में से एक है जहाँ आप अब तक नहीं गये होंगे।

कानाताल के सुंदर परिदृश्य का नज़ारा
Image Courtesy: Nimish2004
नौकूचियातल
नौकूचियातल क्षेत्र का नाम नौकूचियातल झील के नाम पर रखा गया है जिसके नौ किनारे हैं। यह नगर इस झील के चारों और बसा है जो नैनीताल जिले में आता है। नौकूचियातल, संगीत और कला का एस्केप फेस्टिवल आयोजित करने का भी मुख्य क्षेत्र है। यह त्यौहार देश के महान कलाकारों को एक मौका देने का सबसे अच्छा अवसर है। नौकूचियातल का यह शांत वातावरण एक बहुत ही अच्छा पिकनिक स्थल होने के साथ साथ उत्तराखंड में साहसिक क्रियाओं का मज़ा लेने का भी सबसे अच्छा क्षेत्र है।

नौकूचियातल झील
Image Courtesy: Dr Satendra
लोहाघाट
लोहाघाट मुख्यतः ऐतिहासिक और पौराणिक महत्ता के लिए जाना जाता है। यहाँ का राजसी तरीके से बनाया गया मंदिर यहाँ के चारों ओर की खूबसूरती में चार चाँद लगता है। लोहाघाट उत्तराखंड के पिथौरागढ़ से लगभग 60 किलोमीटर की दूरी पर है और इस नगर को आप अपनी यात्रा में ज़रूर शामिल करें। लोहाघाट को अद्वैता आश्रम या मायावती आश्रम के लिए भी जाना जाता है जो रामकृष्ण मठ का ही एक हिस्सा है। इसलिए यहाँ श्रधालुओं का आना जाना काफ़ी लगा रहता है।

अद्वैता आश्रम
Image Courtesy: Soumya IITC
पौड़ी
हिमालय पर्वत के उच्च शिखर जैसे त्रिसूल और नंदा देवी के साथ पौड़ी किसी सपनों के शहर की तरह प्रतीत होता है। यह क्षेत्र चारों तरफ से बर्फ के पहाड़ों और घने लंबे देवदार के जंगलों से घिरा हुआ है। आज के समय में भी प्रदर्शित होने वाला नाटक 'पौड़ी रामलीला' जो रामायण पर आधारित है वहाँ पर प्रस्तुत किया जाने वाला सबसे पुराना नाटक है। पौड़ी रामलीला का उत्तराखंड के क्षेत्र में एक अलग ही स्थान है।

हिमालय पर्वत के शिखर का अद्भुत दृश्य
Image Courtesy: Fowler&fowler
असकोट
असकोट, हिमालय पर बसा नगर है, जो असकोट कस्तूरी मृग अभयारण्य के लिए जाना जाता है। असकोट जो दोती राजाओं के अधीन था, सबसे पुरानी जनजाति वन रावत का घर भी है। असकोट उत्तराखंड का रहस्यमयी पहाड़ों वाला क्षेत्र है, जिसकी अद्भुत यात्रा में आप मंत्रमुग्ध हो जाएँगे।
तो सोचने में अब अपना समय बर्बाद मत करिए और सामान बांधना शुरू करिए। इस सुहाने मौसम में अभी ही निकल पड़िए उत्तराखंड के इन गुप्त सौंदर्य की यात्रा में।
अपने महत्वपूर्ण सुझाव व अनुभव नीचे व्यक्त करें।



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