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क्या है उत्तराखंड का 'मानसखंड कॉरिडोर', आज से शुरू हो रही है यात्रा

कुमाऊं क्षेत्र के ऐतिहासिक मंदिरों के दर्शन करवाने के लिए उत्तराखंड के पर्यटन विभाग ने भारतीय रेलवे के साथ मिलकर 'मानसखंड कॉरिडोर यात्रा' की शुरुआत की है। इस यात्रा की शुरुआत 22 अप्रैल को होगी। इस यात्रा में महाराष्ट्र के पुणे से उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले के टनकपुर तक विशेष ट्रेन चलायी जा रही है जिसके जरिए 2 जत्थों में लगभग 600 तीर्थ यात्री मानसखंड कॉरिडोर के कई प्राचीन मंदिरों के दर्शन कर सकेंगे।

यह यात्रा 7 दिन और 6 रातों की होगी।

nanda devi temple

आपके मन में जरूर यह सवाल आ रहा होगा कि मानसखंड कॉरिडोर आखिर है क्या? इस कॉरिडोर में कौन सी जगहें शामिल हैं और कौन-कौन से प्राचीन मंदिर मानसखंड कॉरिडोर में आते हैं? तो चलिए आपकी जिज्ञासा को शांत करते हुए हम आपको मानसखंड कॉरिडोर के बारे में विस्तार से बताते हैं -

क्या है मानसखंड कॉरिडोर?

उत्तराखंड को महादेव की भूमि कहा जाता है। इसे दो हिस्सों में बांटा जाता है - मानसखंड और केदारखंड। उत्तराखंड का कुमाऊं क्षेत्र मानसखंड के रूप में और गढ़वाल क्षेत्र केदारखंड के रूप में जाना जाता है। मानसखंड में कई प्राचीन मंदिरों की पूरी श्रृंखला है जिसे मंदिरमाला या मानसखंड कॉरिडोर कहा जाता है।

तीर्थ यात्री इन मंदिरों का दर्शन करने के लिए आते रहते हैं। अब इन मंदिरों में ही तीर्थ यात्रा को बढ़ावा देने और इस यात्रा को सुलभ बनाने के लिए उत्तराखंड के पर्यटन विभाग ने मानसखंड कॉरिडोर यात्रा की शुरुआत की है।

garjia devi temple

मानसखंड कॉरिडोर में कौन-कौन से मंदिर हैं शामिल?

  • अलमोड़ा : जागेश्वर महादेव, चितई गोलज्यू मंदिर, सूर्यदेव मंदिर, नंदादेवी मंदिर, कसार देवी मंदिर, झांकर सैम मंदिर।
  • पिथौरागढ़ :पाताल भुवनेश्वर, हाटकालिका मंदिर, मोस्टमाणु मंदिर, बेरीनाग मंदिर, मलेनाथ मंदिर, थालकेदार मंदिर।
  • बागेश्वर : बागनाथ महादेव, बैजनाथ मंदिर, कोट भ्रामरी मंदिर।
  • चंपावत : पाताल रुद्रेश्वर गुफा, गोल्ज्यू मंदिर, निकट गोरलचौड मैदान, पूर्णागिरी मंदिर, बाराही देवी मंदिर, देवीधुरा मंदिर, रीठा मीठा साहिब मंदिर।
  • नैनीताल : गोल्ज्यू मंदिर, नैनादेवी मंदिर, गर्जिया देवी मंदिर, कैंचीधाम मंदिर, हनुमान मंदिर।
  • ऊधमसिंह नगर : चैती (बाल सुंदरी) मंदिर, अटरिया देवी मंदिर, नानकमत्ता साहिब।
nanakmatta sahib gurudwara

मिली जानकारी के अनुसार तीर्थयात्रियों को टनकपुर से लगभग 1 किमी दूर खटीमा में ट्रेन से उतरना होगा, जहां से उन्हें सड़क मार्ग से मंदिरों तक ले जाया जाएगा। बताया जाता है कि पहली ट्रेन 22 अप्रैल को पुणे से खटीमा और दूसरी ट्रेन 24 अप्रैल को पुणे से खटीमा जाएगी।

खटीमा में टनकपुर के मुकाबले बेहतर होटल की सेवाएं उपलब्ध होने के कारण ही इसे अंतिम पड़ाव के रूप में चुना गया है। तीर्थ यात्रियों को सभी मंदिरों में ले जाने के साथ ही उनकी ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व के बारे में भी जानकारी दी जाएगी।

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