आज नवरात्रि का नवां दिन यानी महानवमी है, आज के दिन मां दुर्गा के एक अन्य रूप मां के सिद्धिदात्री रूप की पूजा होती है। मां दुर्गे के इसी रूप को शतावरी और नारायणी भी कहते हैं। ये सभी प्रकार की सिद्धियों को देने वाली हैं। नवरात्र-पूजन के नौवें दिन इनकी उपासना की जाती है। इस दिन शास्त्रीय विधि-विधान और पूर्ण निष्ठा के साथ साधना करने वाले साधक को सभी सिद्धियों की प्राप्ति हो जाती है।
नवदुर्गाओं में माँ सिद्धिदात्री अंतिम हैं। सिद्धिदात्री का जो मनुष्य नियमपूर्वक सेवन करता है। उसके सभी कष्ट स्वयं ही दूर हो जाते हैं। इससे पीड़ित व्यक्ति को सिद्धिदात्री देवी की आराधना करना चाहिए। अपनी सारी गलतियों के लिए मां से सच्चे दिल क्षमा मांगनी चाहिए,मां जरूर माफ कर देती हैं।

जैसा कि हम बता चुके हैं आज नवरात्रि का अंतिम दिन है तो आज इसी क्रम में हम आपको अवगत कराने जा रहे हैं मां दुर्गा के एक ऐसे मंदीर से जहां देवी के मुहं से आग की लपटें प्रवाहित होती हैं। जी हां हम बात कर रहे हैं हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा स्थित ज्वालामुखी मंदिर की। ज्वालामुखी मंदिरको ज्वालाजी के रूप में भी जाना जाता है, जो कांगड़ा घाटी के दक्षिण में 30 किमी की दूरी पर स्थित है।
ये मंदिर हिन्दू देवी ज्वालामुखी को समर्पित है। जिनके मुख से अग्नि का प्रवाह होता है। इस जगह का एक अन्य आकर्षण ताम्बे का पाइप भी है जिसमें से प्राकृतिक गैस का प्रवाह होता है। इस मंदिर में अलग अग्नि की अलग अलग 6 लपटें हैं जो अलग अलग देवियों को समर्पित हैं जैसे महाकाली उनपूरना, चंडी, हिंगलाज, बिंध्य बासनी , महालक्ष्मी सरस्वती, अम्बिका और अंजी देवी। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार ये मंदिर सती के कारण बना था बताया जाता है की देवी सती की जीभ यहाँ गिरी थी।



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