हर बार पहाड़, समुद्र या फिर शहरी इलाकों में घूम-घूमकर बोर हो गये हैं? इस बार घूमने के लिए किसी ऐसी जगह की तलाश कर रहे हैं जहां भरपूर एडवेंचर करने का मौका मिल सकें। तो फिर ज्यादा ना सोचते हुए जंगल सफारी पर निकल पड़े। मानसून के समय बंद रहने के बाद देश के कई नेशनल पार्क को अक्टूबर से खोला जा रहा है। इसी महीने से राजस्थान का रणथंभौर नेशनल पार्क भी खुल गया है।

अगर आप दिल्ली या आसपास के इलाके में रहते हैं तो दशहरा के समय मिल रहे Long Weekend पर रणथंभौर नेशनल पार्क घूमने जाने का प्लान बना सकते हैं। इस समय जंगलों में जाने का सबसे बड़ा फायदा होता है कि मानसून की वजह से लंबे समय तक बंद रहने के बाद जब जंगलों को फिर से खोला जाता है तो हर तरफ बस हरियाली और ताजगी ही नजर आती है।
8वीं सदी में स्थापित हुआ था रणथंभौर
रणथंभौर सिर्फ एक नेशनल पार्क ही नहीं बल्कि राजस्थान सवाई माधोपुर जिले में पहाड़ी पर मौजूद एक बेहद पुराना किला भी है। यह किला यूनेस्को की वर्ल्ड हेरिटेज लिस्ट में भी शामिल है। इसे एक गढ़ के रूप में 8वीं शताब्दी में चौहान राजवंश ने स्थापित किया था। पहाड़ी के ऊपर ऊंचाई पर बना यह किला काफी भव्य है। किले के चारों तरफ करीब 392 वर्ग किमी के क्षेत्र में फैले रणथंभौर नेशनल पार्क में कई तरह के जंगली जानवरों को उनके प्राकृतिक आवास में देखने का मौका मिलता है।

इस नेशनल पार्क में रॉयल बंगाल टाइगर, तेंदुआ, स्लॉथ भालू, लकड़बग्घा, कई तरह के हिरण जैसे सांबर, चीतल और नीलगाय आदि मौजूद हैं। इसके अलावा यह नेशनल पार्क लगभग 300 प्रकार के पक्षियों का भी घर है जो इसे एक शानदार बर्ड वॉचिंग डेस्टिनेशन बनाता है। बता दें, अगर आप वाइल्ड लाइफ लवर हैं तो आपको बाघिन 'मछली' के बारे में भी जरूर पता होगा, जिसने एक बार असली में पानी में मगरमच्छ से बैर मोल ले लिया था। उसने एक बार पानी में ही एक मगरमच्छ को मौत के घाट उतार डाला था। रणथंभौर नेशनल पार्क ही मछली का घर है।
रणथंभौर में घुमने की जगह

रणथंभौर नेशनल पार्क सिर्फ वाइल्ड लाइफ ही नहीं, उन लोगों को भी काफी पसंद आएगा जिन्हें इतिहास और ऐतिहासिक धरोहरों से लगाव है। यहां बाघों और जंगली जानवरों के अलावा और भी कई चीजें ऐसी हैं, जो देखने लायक हैं। उनमें रणथंभौर किला, सवाई माधोपुर किला, गणेश मंदिर, सुरवाल झील, पदम झील, कचिदा घाटी, जोगी महल, लकरदा और अनंतपुरा, बादल महल, रानी कर्मावती की अधुरी छतरी, रनिहार तालाब और 84 खंभों की छतरी भी शामिल है। यहां आप कई तरह के एडवेंचरस एक्टिविटी भी कर सकते हैं जैसे हॉय एयर बैलून सफारी, बर्ड वॉचिंग, बोटिंग आदि।
रणथंभौर जाने का बेस्ट समय

रणथंभौर नेशनल पार्क घुमने जाने का बेस्ट समय अक्टूबर से फरवरी के बीच का होता है। इस समय गर्मी नहीं होती है और ठंडा मौसम होने की वजह से घूमने में भी कोई परेशानी नहीं होती। इस समय जंगली जानवर भी खुले में धूप सेंकने के लिए आते हैं, इसलिए उनके दिखने की संभावना भी बढ़ जाती है।
रणथंभौर नेशनल पार्क के सफारी ज़ोन
- ज़ोन 1 :- यह रणथंभौर नेशनल पार्क का बफर ज़ोन है। वर्तमान समय में यह इलाका बाघिन 'नूर' और उसके 3 बच्चों का है।
- ज़ोन 2 :- नेशनल पार्क का यह क्षेत्र जोगी महल के लिए मशहूर है। यह करीब 300 साल पुराना फॉरेस्ट गेस्ट हाउस है। अगर आप ज़ोन 2 में जाते हैं तो वहां त्रिनेत्र गणेश के मंदिर में दर्शन करना मत भूलें। इस क्षेत्र में आपको बाघ T19, T22, T57, T28, T60, T39 भी दिखाई दे सकते हैं।
- ज़ोन 3 :- जंगली जानवरों के मुकाबले नेशनल पार्क का यह इलाका बर्ड वॉचिंग के लिए ज्यादा अच्छा माना जाता है। मलिक तलाव के आसपास का क्षेत्र फोटोग्राफी के लिए बहुत सुन्दर माना जाता है। यहां जिन इलाकों में आपको बाघ दिखने की सबसे ज्यादा संभावना है, उनमें पद्म तालाब, हाई प्वाएंट, राज बाघ और मंडूक।

- ज़ोन 4 :- यहीं वह ज़ोन है, जहां आपको दुनिया भर में प्रसिद्ध बाघिन 'मछली' दिख सकती है। बता दें, यह क्षेत्र काफी पथरीला है और यहां दूसरे ज़ोन के मुकाबले भीड़ भी कम होती है।
- ज़ोन 5 :- यहां प्रवेश करने के लिए पर्यटकों को ज़ोन 4 से होकर ही आना पड़ता है। यहां अक्सर कई तरह के जानवर इधर-उधर घुमते हुए दिख जाते हैं।
- ज़ोन 6-10 :- ये वो ज़ोन हैं, जिन्हें हाल ही में पर्यटकों के लिए खोला गया है। इन्हीं ज़ोन के बीच रणथंभौर नेशनल पार्क का सबसे शानदार बाघ 'फतेह' का आना-जाना होता है।
रणथंभौर नेशनल पार्क के लिए कुछ Special Tips
- जंगल सफारी के लिए बुकिंग हमेशा अडवांस में करें। पार्क के अंदर जाने वाली गाड़ियों की संख्या सीमित होती है। इसलिए पीक सीजन में बुकिंग काफी जल्दी फुल हो जाती है।
- जंगल सफारी पर जाते समय हमेशा इस बात का ख्याल रखें कि जंगलों में आपका नहीं बल्कि इन जंगली पशुओं का है। इसलिए हमेशा उनकी सुविधाओं पर ध्यान देना ही आपकी प्राथमिकता होनी चाहिए।
- जंगल सफारी के लिए अपना गाईड चुनते समय इस बात को जरूर सुनिश्चित कर लें कि गाईड को रणथंभौर नेशनल पार्क, वाइल्ड लाइफ, वहां के ऐतिहासिक धरोहरों और पशुओं के बारे में पूरी जानकारी हो। हो सकता है कि आपको गाईड के लिए थोड़ी अधिक कीमत चुकानी पड़े।

- जंगल में आप जितने शांत बने रहेंगे आपका उतना ही ज्यादा जंगली पशुओं को देखने का मौका बढ़ेगा।
- जंगल सफारी पर जाते समय हमेशा न्यूड रंगों या ऐसे रंग जो आसानी से जंगल में घुलमिल जाएं, उन्हें पहनने की कोशिश करें। चटक रंग भूलकर भी ना पहनें।
- जंगल में सिर्फ बाघों या तेंदुओं को ही नहीं बल्कि अपने आंख-कान लगातार खुला रखें। क्या पता कहां आपको कौन सा जंगली जानवर या पक्षी नजर आ जाए।
कैसे पहुंचे रणथंभौर नेशनल पार्क
रणथंभौर नेशनल पार्क राजस्थान के सवाई माधोपुर जिले में है। दिल्ली से यहां तक पहुंचना काफी आसान है। सड़क, ट्रेन या फिर फ्लाइट से आप यहां तक की यात्रा कर सकते हैं। रणथंभौर नेशनल पार्क तक पहुंचने का सबसे नजदीकी एयरपोर्ट जयपुर एयरपोर्ट है, जो यहां से करीब 160 किमी दूर है। जयपुर के लिए सभी प्रमुख शहरों से उड़ान सेवा उपलब्ध है। जयपुर से रणथंभौर तक पहुंचने के लिए आपको आसानी से गाड़ियां व टैक्सी मिल जाएंगी।
रणथंभौर नेशनल पार्क का सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन सवाई माधोपुर रेलवे स्टेशन है, जो नेशनल पार्क से करीब 11 किमी दूर है। दिल्ली, मुंबई और कई दूसरे शहरों से यहां तक की सीधी ट्रेन उपलब्ध है। इसके साथ ही पैलेस ऑन व्हील्स, रॉयल राजस्थान ऑन व्हील्स, महाराजा एक्सप्रेस और द इंडियन महाराजा एक्सप्रेस जैसी लग्जरी ट्रेनें भी सवाई माधोपुर स्टेशन पर रुकती है। सड़क मार्ग से आप मुंबई, आगरा, जयपुर, जोधपुर, अजमेर जैसे शहरों से यहां आसानी से पहुंच सकते हैं।



Click it and Unblock the Notifications













