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वाघा बॉर्डर : दुश्मन पाक से हाथ मिलाने के लिए 1959 से जहां की जा रही है एक अनूठी पहल

By Syedbelal

कहने को तो दुनिया का हर एक नागरिक और हर एक देश आपस में जुड़ा है और समस्त दुनिया वाले एक दूसरे के भाई भी हैं। मगर जब बात भारत और पाकिस्तान की हो तो यहां मामला थोडा पेंचीदा हो जाता है। भारत और पाकिस्तान कभी एक दूसरे के मित्र नहीं हो सकते ये दोनों हमेशा ही एक अशांत पड़ोसी रहेंगे। बहरहाल 1959 से लेके आज तक हर शाम इनदोनों देशों ने अपने सभी विवाद, अपने बीच की सारी शत्रुता को किनारे रखते हुए कुछ ऐसा किया है कि जिसको देखते हुए लगता है शायद ये दोनों देश कभी एक अच्छे दोस्त हो जाएं। जी हां हम बात कर रहे हैं वाघा बॉर्डर पर दैनिक होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रम, परेड और सलामी की।

अमृतसर का प्रमुख आकर्षण है जहां हर रोज हजारों पर्यटक जाते हैं। आपको बताते चलें कि वाघा बॉर्डर एक सैनिक चौकी है, जो अमृतसर और लाहौर के बीच स्थित है। यह भारत-पाकिस्तान की एकमात्र सड़क सीमारेखा है और साथ ही यहां विस्तृत निर्माण, सड़क और अवरोध बने हुए हैं।

इस सीमा चौकी के प्रवेश द्वार को स्वर्ण जयंती गेट कहते हैं और इसके आसपास का परिवेश काफी हरा-भरा है।

भारत पाकिस्तान बॉर्डर पर प्रवेश

भारत पाकिस्तान बॉर्डर पर प्रवेश

वाघा बॉर्डर पर आप साल के किसी भी दिन प्रवेश कर सकते हैं और यहां आकर सांस्कृतिक कार्यक्रम, परेड ड्रिल का आनंद ले सकते हैं। गौरतलब है कि इस पूरे आयोजन को बीटिंग रिट्रीट के नाम से भी जाना जाता है। यहां आकर आप भारत और पाक की सीमा रेखा देख सकते हैं।

पर्यटकों की भीड़

पर्यटकों की भीड़

इस पूरे आयोजन को देखने के लिए यहां पर्यटकों की भारी भीड़ उपस्थित रहती है। यदि आप यहां आ रहे हैं तो जेब कतरों से जरूर सावधान रहें क्योंकि भारी भीड़ के चलते जेब काटना यहां एक आम बात है।

 महिलाओं और पुरुषों के लिए अलग पंक्तियां

महिलाओं और पुरुषों के लिए अलग पंक्तियां

सुरक्षा की दृष्टि से यहां महिला और पुरुषों के लिए अलग अलग पंक्तियों का निर्माण किया गया है। ये दोनों ही पंक्तियां अलग अलग दिशाओं में हैं।

स्पेशल सेक्युरिटी ज़ोन

स्पेशल सेक्युरिटी ज़ोन

जैसा कि हमनें आपको बताया है यह भारत-पाकिस्तान का एकमात्र सड़क सीमारेखा है तो इसके मद्देनज़र यहां पर एक स्पेशल सेक्युरिटी ज़ोन का निर्माण किया गया है। इस पूरे क्षेत्र को कांटेदार तारों और सुरक्षा के अन्य उपकरणों से सुसज्जित किया गया है।

बॉर्डर सेक्युरिटी फोर्स

बॉर्डर सेक्युरिटी फोर्स

इस पूरे क्षेत्र कि सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी बॉर्डर सेक्युरिटी फोर्स या बीएसएफ को सौंपी गयी है। बीएसएफ के जवान आपको यहां चप्पे चप्पे मुस्तैद मिलेंगे।

स्वर्ण जयंती द्वार

स्वर्ण जयंती द्वार

इस सीमा चौकी के प्रवेश द्वार को स्वर्ण जयंती गेट कहते हैं और इसके आसपास का परिवेश काफी हरा-भरा है।

बॉर्डर तक पहुंचना

बॉर्डर तक पहुंचना

बॉर्डर के पास एक रोड है मगर यहां आने वाले पर्यटकों को उस पर चलने की अनुमति नहीं है। गेट के दोनों ओर सीढ़ियां हैं जिनके माध्यम से आप गेट को पार कर सकते हैं।

हमारा राष्ट्र, हमारा गर्व

हमारा राष्ट्र, हमारा गर्व

जैसे ही आप इस स्थान पर आएँगे और यहां पर परेड और ड्रिल देखेंगे आपको अपने भारतीय होने पर गर्व जरूर होगा।

वाघा बॉर्डर

वाघा बॉर्डर

ये बॉर्डर भारत को पाकिस्तान से अलग करता है। गौरतलब है कि दोनों ही देश आज़ादी से पहले एक थे।

समारोह

समारोह

बीटिंग रिट्रीट समारोह के लिए हर रोज यहां हज़ारों पर्यटक आते हैं। आप भी यहां आइये और खुद महसूस करिये देशभक्ति को।

पाकिस्तान की झलक

पाकिस्तान की झलक

जैसे ही आप बॉर्डर पर आएँगे आपको गेट के दूसरी तरफ पाकिस्तान देखने को मिलेगा वहाँ पाकिस्तान के निर्माता मुहम्मद अली जिन्नाह की मूर्ति देखने को मिलेगी।

पाकिस्तान में प्रवेश

पाकिस्तान में प्रवेश

यहां आने वाले पर्यटक ग्रुप में पाकिस्तान के गेट की तरफ भी जा सकते हैं। साथ ही आने खड़े लोगों को भारत का झंडा भी दिया जाता है ताकि उस समय वो अपने मुल्क की नुमाइंदगी कर सकें।

राष्ट्रगान

राष्ट्रगान

भारत मां को सम्मान देने की दृष्टि से यहां हर रोज़ राष्ट्रगान भी गाया जाता है और यहीं पर वाघा बॉर्डर की यात्रा समाप्त की जाती है।

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