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कौन सा था कोलकाता का पहला शॉपिंग मॉल? कब और किसने बनवाया था इसे?

दोस्तों के साथ घूमना हो, परिवार के साथ शॉपिंग और रेस्तरां में खाना-पीना हो या बस यूं ही विंडो शॉपिंग करनी हो। हर किसी का फेवरेट डेस्टिनेशन शॉपिंग मॉल होता है। किसी भी शहर की आधुनिकता का मापदंड वहां खुलने वाले शॉपिंग मॉल ही होते हैं। कोलकाता भी इससे अछुता नहीं है। पिछले कई सालों में कोलकाता में कई शॉपिंग मॉल खुल चुके हैं।

Shopping mall

फिर चाहे साउथ सिटी मॉल हो या फोरम मॉल, डायमंड प्लाजा, लेक मॉल या फिर अवनी रिवर साइड मॉल। इसके अलावा महानगर के लगभग हर इलाके में कोई ना कोई शॉपिंग मॉल जरूर है, जहां हर रोज हजारों लोग खरीदारी करने, खाने-पीने समय बिताने या फिर विंडो शॉपिंग करने आते हैं। पर क्या आपको पता है, कोलकाता का पहला शॉपिंग मॉल कौन सा था? कब और कहां खुला था कोलकाता का पहला शॉपिंग मॉल? कोलकाता में पहला शॉपिंग मॉल 10 या 20 साल नहीं बल्कि एक शतक पहले खुला था।

आइए आपको कोलकाता के पहले शॉपिंग मॉल का दिलचस्प इतिहास बताते हैं :

कोलकाता में कहां खुला था पहला शॉपिंग मॉल?

Shopping mall in kolkata

देश के 4 प्रमुख महानगरों में से एक कोलकाता में जो पहला शॉपिंग मॉल खोला गया था, वह साउथ सिटी या फोरम मॉल नहीं था। कोलकाता का पहला शॉपिंग मॉल इसके व्यस्ततम इलाके धर्मतल्ला में खोला गया था। इस इलाके को आज एस्प्लेनेड के नाम से भी लोग जानते हैं। यह शॉपिंग मॉल 10 या 50 साल नहीं बल्कि पूरे 118 साल पहले खोला गया था। जी हां, पूरे 118 साल पहले खुला था कोलकाता का पहला शॉपिंग मॉल। यानी यह वह समय था जब भारत पर अंग्रेजों का शासन हुआ करता था। धर्मतल्ला इलाके में खोले गये इस शॉपिंग मॉल की बिल्डिंग आज भी तनकर खड़ी है, जिसे यहां से गुजरने वाला हर राहगीर एक ना एक बार नजरें उठाकर जरूर देखता है।

क्या नाम था पहले शॉपिंग मॉल का?

Metropolitan building

कोलकाता का पहला शॉपिंग मॉल जिस बिल्डिंग में खुला था, वह बिल्डिंग धर्मतल्ला इलाके में मौजूद है। आज इस बिल्डिंग को मेट्रोपॉलिटन बिल्डिंग, कोलकाता के नाम से लोग जानते हैं। सफेद और सुनहरे रंग की इस बिल्डिंग को देखकर ही पता चलता है कि इसने अपने आप में कोलकाता का गहरा इतिहास छिपा कर रखा हुआ है। इस बिल्डिंग का निर्माण वर्ष 1905 में किया गया था। अंग्रेजों के लिए कोलकाता (तत्कालिन कलकत्ता) काफी महत्वपूर्ण शहर रहा है। उस समय यहां व्हाइटवे लेडलॉ डिपार्टमेंटल स्टोर खोला गया था, जहां मुख्य रूप से अंग्रेज अफसर और उनके परिवार के लोग खरीदारी करने आते थे।

कैसे हुई इस शॉपिंग मॉल की शुरुआत?

कोलकाता में अंग्रेज अफसरों का आना-जाना लगा रहता था। इसलिए इस शहर का विकास भी काफी तेजी से हुआ है। बाजारों में दुकानों की कोई कमी नहीं थी तो फिर अचानक यहां शॉपिंग मॉल खोलने की क्या जरूरत पड़ गयी? वर्ष 1877 में 21 वर्षीय ब्रिटिश युवक रॉबर्ट लेडलॉ कोलकाता (तत्कालिन कलकत्ता) आया। वह भारत में आकर कपड़े का व्यवसाय करना चाहता था। कोलकाता के ही चौरंगीपारा (वर्तमान चांदनी चौक) में रॉबर्ट की मुलाकात एक अन्य ब्रिटिश युवक एडवर्ड व्हाइटवे से हुई।

old image of metropolitan building

दोनों की दोस्ती गहरी हुई और वर्ष 1881 में दोनों ने व्हाइटवे लेडलॉ एंड कंपनी खोली। कुछ सालों के अंदर ही उनका व्यापार भारत के कोने-कोने में फैल गया। मद्रास (वर्तमान चेन्नई), बॉम्बे (वर्तमान मुंबई), लाहौर (वर्तमान पाकिस्तान) समेत अविभाजित भारत के 20 शहरों में इनका व्यापार फैल गया। इसके अलावा दक्षिण-पूर्व के कई देशों जैसे क्वालालामपुर, शंघाई, ताईपेई जैसे देशों में भी इनका व्यापार पहुंच गया।

कोलकाता में कब खोला गया यह शॉपिंग मॉल?

देश-विदेश में तो इस जोड़ी का नाम फैल गया लेकिन जिस शहर कोलकाता से इनके व्यापार की शुरुआत हुई, उसे कैसे छोड़ा जा सकता था। बस इसी सोच के साथ दोनों ब्रिटिश व्यापारियों ने कोलकाता के मुख्य इलाके में एक विशाल महल जैसी इमारत बनाने की जिम्मेदारी प्रसिद्ध कंस्ट्रक्शन कंपनी मैकिंटोश बर्न को दी। उस समय शॉपिंग मॉल जैसे शब्दों का कोई अस्तित्व ही नहीं था। इसलिए एक ही छत के नीचे विभिन्न प्रकार के सामानों को जहां बेचा जाता था, उन जगहों को डिपार्टमेंटल स्टोर कहा जाता था। इस तरह 1905 में कोलकाता में खोला गया पहला शॉपिंग मॉल व्हाइटवे लेडलॉ डिपार्टमेंटल स्टोर।

क्या-क्या मिलता था यहां?

व्हाइटवे लेडलॉ डिपार्टमेंटल स्टोर का आकार इतना बड़ा था कि इसकी चर्चाएं देशभर में होने लगी थी। इस डिपार्टमेंटल स्टोर में सैटिन, वेल्वेट और जापानी सिल्क से बने कपड़े, महंगे परफ्यूम, विदेशी छाता, स्वेटर, खिलौने, पुरुषों का हैट, कोर्ट, सिगार हर तरह का सामान यहां मिलता था। इस डिपार्टमेंटल स्टोर में सिर्फ ब्रिटिश अधिकारी ही नहीं बल्कि उच्चवर्गीय बंगाली या यूं कहें जमींदार परिवारों से भी लोग आते थे जिनमें प्रसिद्ध फिल्म निर्देशक सत्यजीत राय भी शामिल थे। नन्हें सत्यजीत अपनी मां का हाथ पकड़कर यहां आते थे।

East bengal football team

सत्यजीत राय के दादाजी उपेंद्रकिशोर रायचौधरी भी यहां अक्सर घूमने आते थे। उपेंद्रकिशोर के बड़े भाई शारदारंजन राय प्रसिद्ध ईस्ट बंगाल फुटबॉल क्लब के जनक माने जाते थे। धर्मतल्ला इलाके में ईस्ट बंगाल क्लब की पहली जर्सी काफी ढूंढने के बावजूद उन्हें कुछ पसंद नहीं आयी। तब व्हाइटवे लेडलॉ डिपार्टमेंटल स्टोर में मिली ईस्टबंगाल क्लब की पहली जर्सी जिसे उस समय ₹80 में खरीदी गयी थी। इसी डिजाइन की बनी पीली-मरुन रंग की जर्सी पहनकर आज भी ईस्टबंगाल फुटबॉल टीम मैदान में उतरती है।

आजादी के बाद इस व्हाइटवे लेडलॉ बिल्डिंग का मालिकाना मेट्रोपॉलिटन लाइफ इंश्योरेंस को हस्तांतरित कर दिया गया था। इसलिए आज भी इस बिल्डिंग को मेट्रोपॉलिटन बिल्डिंग के नाम से जाना जाता है।

कोलकाता में घूमने आने वाले लोगों और इसके बारे में इंटरनेट पर पढ़ने वाले लोगों ने कई बार इस बिल्डिंग की तस्वीरें जरूर देखी होंगी, लेकिन क्या आपको इस बिल्डिंग से जुड़े दिलचस्प इतिहास के बारे में पता था? अगर आपको हमारा यह आर्टिकल पसंद आया हो तो इसे जरूर अपने उन दोस्तों के साथ जरूर शेयर करें जिनकी भारत के इतिहास में गहरी रुची है।

FAQs
उत्तर प्रदेश का सबसे बड़ा मॉल कौन सा है?

उत्तर प्रदेश का सबसे बड़ा शॉपिंग मॉल लखनऊ का लुलु मॉल है। सिर्फ उत्तर प्रदेश ही नहीं बल्कि लुलु मॉल भारत के सबसे बड़े मॉल में से एक है।

कोलकाता के टॉप 3 मॉल कौन-कौन से हैं?

कोलकाता में कई बेहतरीन शॉपिंग मॉल हैं। इनमें साउथ सिटी मॉल, फोरम मॉल और क्वेस्ट मॉल टॉप 3 शॉपिंग मॉल में शामिल हैं। इसके अलावा अवनी रिवर साइड मॉल, लेक मॉल और डायमंड प्लाजा जैसे कई और मॉल हैं।

कोलकाता का पहला मॉल कौन सा था?

कोलकाता का पहला शॉपिंग मॉल 118 साल पहले धर्मतल्ला इलाके में खोला गया व्हाइटवे लेडलॉ डिपार्टमेंटल स्टोर था। वर्तमान समय में इस बिल्डिंग का नाम मेट्रोपॉलिटन बिल्डिंग है।

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