उत्तर प्रदेश का कानपुर हो या महाराष्ट्र का नागपुर, राजस्थान का जोधपुर या जयपुर हो या छत्तीसगढ़ का रायपुर। ये सभी शहर भले ही अलग-अलग राज्यों में हो लेकिन इनके नाम में एक समानता जरूर है। इन सभी शहरों के नाम के अंत में 'पुर' जुड़ा हुआ है। सिर्फ ये गिने-चुने शहर ही नहीं बल्कि भारत में ऐसे शहरों की भरमार है जिनके नाम में पुर शब्द जुड़ा हुआ है। लेकिन इस पुर शब्द का अर्थ क्या होता है?
क्या पुर का कोई ऐतिहासिक महत्व भी होता है या यह बस एक निर्थक शब्द ही है जो किसी दूसरे शब्द को सार्थक बनाने के लिए जोड़ा जाता है?

शहरों के नाम में पुर शब्द जोड़ने की परंपरा सालों पुरानी है। जब भी किसी स्थान या शहर के बारे में कुछ बताना होता है, सबसे पहले उस जगह का नाम ध्यान में आता है। नाम के साथ ही उस जगह की पहचान जुड़ी होती है। पुर शब्द के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। दरअसल, पुर शब्द संस्कृत से लिया गया एक शब्द है, जिसका उल्लेख ऋग्वेद में मिलता है।
संस्कृत में पुर का अर्थ शहर या किला होता था। इसलिए राजा जब भी अपने राज्य या साम्राज्य का नामकरण करते थे, तो उनके नाम के आखिर में पुर शब्द को जोड़ा करते थे। जैसे राजस्थान की वर्तमान राजधानी जयपुर के मामले में हुआ था। शहरों के नाम में पुर शब्द जोड़ना कोई नयी आदत नहीं है, बल्कि यह सदियों पुरानी परंपरा रही है। इस बात का सबूत हमें महाभारत काल में भी मिलता है, जहां हस्तिनापुर एक प्रमुख साम्राज्य रहा है।
आगे चलकर शहरों या राज्य के नाम में पुर शब्द को जोड़ने की परंपरा जारी रही और आज इसी परंपरा का नतीजा है कि भारत के लगभग आधे शहरों के नाम में पुर शब्द जुड़ गया है। कुछ लोगों का मानना है कि पुर शब्द अरबी भाषा में भी है, जो अरब से आने वाले यात्रियों के साथ-साथ भारत पहुंचा और भारत के समृद्ध इतिहास में इसने एक परत जोड़ी।
मोटे तौर पर हम कह सकते हैं कि भारतीय शहरों के नामों जुड़ने वाला शब्द 'पुर' शहरों को उनकी ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और भाषाई जड़ों से जोड़ता है। स्थान-स्थान में फर्क होने के साथ ही यह पुर शब्द भी उस शहर से जुड़ी अनूठी कहानियों और पात्रों के प्रतिक के रूप में उभरता है।



Click it and Unblock the Notifications
















