हर साल 19 से 25 नवंबर तक विश्व विरासत सप्ताह (World Heritage Week) मनाया जाता है। इसके तहत वर्ल्ड हेरिटेज साइट और दुनिया के 7 अजूबों में से एक ताजमहल में विश्व विरासत सप्ताह के पहले दिन निःशुल्क प्रवेश करने की अनुमति दी थी। दूसरी तरफ दिल्ली में भी ताजमहल की तरह ही दिखने वाले लाल ताजमहल को इसके इतिहास का प्रमुख हिस्सा माना जाता है।

हर साल लाखों की संख्या में दुनिया भर से आने वाले पर्यटक दिल्ली के लाल ताजमहल यानी हुमायूं का मकबरा में घूमने आते हैं। विश्व विरासत सप्ताह को मनाने का उद्देश्य दुनियाभर में संस्कृति और विरासतों के संरक्षण को बढ़ाना देना है। विश्व विरासत सप्ताह को वैश्विक स्तर पर यूनेस्को (Unesco) व अन्य अंतर्राष्ट्रीय संगठनों द्वारा मनाया जाता है। भारत में इसे एक त्योहार के रूप में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (Archaeological Survey of India) द्वारा मनाया जाता है। दिल्ली में स्थित हुमायूं का मकबरा एक प्रसिद्ध World Heritage Site है।
आइए इसकी वास्तुकला और ऐतिहासिकता पर एक नजर डालते हैं :-
कब और किसने बनवाया था यह मकबरा
हुमायूं का मकबरा कोई आम मकबरा नहीं है। यह मुगल वास्तुकला का एक प्रमुख उदाहरण है। हुमायूं की प्रमुख बेगम हामिदा बानो बेगम ने इस मकबरे को अपने शौहर हुमायूं के लिए बनवाया था। इसका डिजाइन पारसी वास्तुकार मिरक मिर्जा घियास ने तैयार किया था।

करीब 7 सालों की कड़ी मेहनत के बाद यह मकबरा तैयार हो पाया था। इस मकबरे का निर्माण वर्ष 1565 में शुरू हुआ था और 1572 में इसका निर्माणकार्य पूरा हो पाया था। मिली जानकारी के अनुसार इस मकबरे का निर्माण हुमायूं की मौत के करीब 9 सालों बाद शुरू हुआ था। जिस समय इस मकबरे को तैयार किया गया था उस समय इसकी लागत करीब 15 लाख रुपए आयी थी।
कैसी है मकबरे की स्थापत्य कला
हुमायूं के मकबरे में प्रवेश के लिए दो 16 मीटर ऊंचे प्रवेशद्वार हैं, जो पश्चिम और दक्षिण दिशाओं में बने हुए हैं। इस मकबरे का निर्माण मूल रूप से पत्थरों को जोड़कर किया गया था जिसे लाल बलुआ पत्थरों से ढंक दिया गया था। फर्श की सतह, मुख्य गुम्बद, झरोखे की जालियों और द्वार-चौखटों के लिए सफेद रंग के संगमरमर का इस्तेमाल किया गया था।

वर्गाकार इस मकबरे की नींव पर करीब 56 कक्ष बने हुए हैं, जिसमें कुल 100 से अधिक कब्रें बनी हुई है। इमारत के अंदर की बनावट काफी जटिल है। मुख्य गुम्बद के ठीक नीचे हुमायूं का मकबरा बना हुआ है, लेकिन यह वास्तविक मकबरा नहीं है। मुगल सम्राट की असली समाधि प्रतिकृति के ठीक नीचे बने आंतरिक कक्ष में बनी हुई है। वहां आम पर्यटकों को जाने की अनुमति नहीं दी जाती है।
हुमायूं का मकबरा परिसर में हुमायूं और उनकी बेगम हमिदा बानो के साथ ही दारा शिकोह (शाहजहां का सबसे बड़ा बेटा) और परिवार के दूसरे सदस्यों का मकबरा भी बना हुआ है।
चारबाग गार्डन
अधिकांश मुगलकालिन इमारतों की शोभा वहां आकर्षक रूप से बनाए गये उद्यानों से होती है। हुमायूं का मकबरा भी इससे अछुता नहीं है। इस मकबरे के चारों तरफ 30 एकड़ के क्षेत्र में फैला चारबाग उद्यान की शोभा देखने से ही बनती है। यह उद्यान 4 भागों में बंटा हुआ है।

यह उद्यान मकबरे के चारों तरफ से घेरे हुए है। उद्यान के अंत में तीन तरफ से ऊंची पत्थरों की चहारदीवारी है। कहा जाता है कि किसी समय इस मकबरे के काफी करीब से होकर यमुना नदी बहा करती थी, जो समय के साथ परिसर से दूर होती चली गयी। हुमायूं के मकबरे को वर्ष 1993 में यूनेस्को की विश्व विरासत स्थलों की सूची में शामिल किया गया था।
ताजमहल से क्या है समानता?
हुमायूं का मकबरा और ताजमहल में दो प्रमुख समानताएं हैं, जिस वजह से दावा किया जाता है कि इससे प्रेरित होकर ही ताजमहल का डिजाइन तैयार किया गया था। अपनी बेगम मुमताज महल की याद में शाहजहां ने ताजमहल बनवाया जहां मुमताज महल के साथ-साथ शाहजहां का भी मकबरा मौजूद है। वहीं हुमायूं का मकबरा का निर्माण हुमायूं की सबसे पसंदीदा बेगम हामिदा बानो ने अपने शौहर के लिए करवाया था।

इस मकबरे में हुमायूं के साथ-साथ हमिदा बानो बेगम की भी कब्र मौजूद है। ताजमहल और हुमायूं के मकबरे में संगमरमर और पत्थरों का काफी इस्तेमाल किया गया है। ताजमहल पूरी तरह से सफेद संगमरमर से ही बनाया गया है, जबकि हुमायूं के मकबरे की सबसे ऊंची गुम्बद को संगमरमर और बाकी पूरे मकबरे को लाल बलुआ पत्थरों से सजाया गया है। दोनों इमारतों के बाहर विशाल और बेहद शानदार बगीचे बनाए गये हैं, जो दोनों में एक और समानता को दर्शाता है।



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