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भारतीय नहीं बल्कि विदेशन है गुजिया, कैसे पहुंची यह भारतीय रसोई में

होली का स्वाद जिस मिठाई के बिना अधुरा माना जाता है, वह है गुजिया। अलग-अलग राज्यों में इसे कई तरह के नामों से भले ही पुकारा जाता है लेकिन खासतौर उत्तर प्रदेश की होली गुजिया के बिना अधुरी ही होती है। होली पर लगभग हर घर, हर दुकान सभी जगहों पर थाल में सजाकर गुजिया मिल जाएंगे।

वैसे तो मुंह में डालते ही किसी मीठे बम सी फुटती गुजिया का स्वाद लेते समय कुछ और ध्यान में नहीं रहता है लेकिन क्या आप इसके इतिहास को जानने में दिलचस्पी रखते हैं? अरे भई, होली पर घर आने वाले मेहमानों को अपने ही घर में रहने वाली जिस विदेशन से मिलवाते हैं, उसके बारे में जानने में किसे दिलचस्पी नहीं होगी।

holi gujhiya

गुजिया का इतिहास बताने से पहले हम आपको बता दें, पाक कला के मुताबिक गुजिया और गुझिया एक नहीं होती है। गुजिया को सिर्फ तला जाता है जबकि गुझिया को तलने के बाद चाशनी में डुबाया भी जाता है। गुजिया सूखी जबकि गुझिया चाशनी में डूबी मिठाई होती है।

किस देश की मिठाई है गुजिया

गुजिया का इतिहास भारत में 300 साल पुराना बताया जाता है। इतिहासकारों के अनुसार मुगलकाल के दौरान ही गुजिया को आम लोगों में सबसे अधिक लोकप्रियता मिली। बताया जाता है कि 13वीं सदी में सबसे पहले गुजिया का जिक्र मिला था। उस समय इसे गुड़ और आटे से बनाया जाता था। कहा जाता है कि तब यह तली नहीं जाती थी बल्कि आटे के पतले खोल में गुड़ और शहद भरकर उसे धूप में सुखाया जाता था।

history of gujhiya

कुछ इतिहासकारों का मानना है कि गुजिया तुर्की की मिठाई बकलावा की दूर की चचेरी बहन है, यानी दोनों में काफी समानता है। बकलावा को शहद और चीनी में भिगोया जाता है और कई परतों में बनने वाली इस मिठाई के बीच में नरम पिस्ता भरा जाता है। वहीं गुजिया में भी पिस्ता, बादाम और नारियल का बुरादा मिलाकर मावा भरा जाता है। बता दें, बकलावा को सिर्फ शाही परिवार के कुलिन सदस्यों के लिए ही बनाया जाता था।

तुर्की से भारत कैसे आयी गुजिया

इतिहासकारों का कहना है कि भारत में गुजिया का सबसे पहला जिक्र 16वीं सदी में मिलता है। इसे सबसे पहले उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड में बनाया गया था, जहां से यह राजस्थान, मध्य प्रदेश, बिहार और दूसरे राज्यों में लोकप्रिय हुआ। यहीं वजह है कि होली पर सबसे अधिक गुजिया बनायी और खाई उत्तर प्रदेश में ही जाती है।

बताया जाता है कि बुंदेलखंड प्राचीन समय में रेशम के व्यापारियों के लिए सिल्क रूट का एक हिस्सा था। अरब देशों के मुस्लिम व्यापारी और मुगल जब भारत आए तो तुर्की की मिठाई बकलावा ने भी अपना चोला बदला और उनके साथ भारत आ पहुंची। यहां वह गुजिया के नाम से मशहूर हुई।

mawa gujhiya holi 2024

होली पर ही क्यों बनायी जाती है गुजिया

कहा जाता है कि बुंदेलखंड में जब गुजिया अपनी लोकप्रियता बढ़ा रही थी, तब इसकी भनक पास में स्थित बृज को भी लग गयी। अब मिठाई खाना पसंद करने वाले बृजवासियों ने इसे अपनी पसंदीदा मिठाई में शामिल भी किया और सबसे पहले होली वाले दिन गुजिया का भोग श्रीकृष्ण को लगाया। बस तब से ही दूसरे त्योहारों के साथ-साथ होली पर गुजिया बनाने का प्रचलन बढ़ने लगा।

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