दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक मेला है, महाकुंभ। हर 12 साल पर आयोजित होने वाले महाकुंभ मेले का आयोजन अगले साल प्रयागराज में किया जाएगा, जिसको लेकर उत्तर प्रदेश प्रशासन जोरोशोरों से तैयारियां कर रहा है। यूनेस्को (UNESCO) ने भी महाकुंभ को अमूर्त सांस्कृतिक विरासत (Intangible Culture Heritage) की श्रेणी में रखा है। पिछले रविवार को ही उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने महाकुंभ प्रयागराज का लोगो (Logo) लॉन्च किया है, जिसे आपने अब तक सोशल मीडिया पर जरूर देखा होगा।
अगर आपने जरा गौर किया हो तो इस लोगो में आपने अमृत कलश, साधु-संत, एक नदी जिसके दोनों किनारों पर लाखों लोगों की भीड़ भी देखी होगी। क्या है इन प्रतीक चिन्हों का मतलब? महाकुंभ से कैसे जुड़े हैं ये प्रतीक चिन्ह और क्या है इनकी विशेषताएं?

चलिए आपको इन सबके बारे में जानकारी दे देते हैं :
महाकुंभ का ध्येय वाक्य
प्रयागराज महाकुंभ के लोगो के ऊपर इसका ध्येय वाक्य 'सर्वसिद्धप्रदः कुंभः' अंकित है। महाकुंभ दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक मेला है, जिसका अगले साल आयोजन गंगा, यमुना और सरस्वती के संगम तट - प्रयागराज में होगा। इसे लेकर युद्ध स्तर पर राज्य प्रशासन सारी तैयारियां कर रहा है। मुख्यमंत्री ने प्रयागराज महाकुंभ का जो लोगो लॉन्च किया है, उसमें सबसे ऊपर इसका ध्येय वाक्य अंकित है।
'सर्वसिद्धप्रदः कुंभः' जिसका अर्थ होता है सभी प्रकार की सिद्धियों को प्रदान करने वाला कुंभ। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार महाकुंभ को सभी मनोकामनाओं की पूर्ति करने वाला बताया जाता है। हिंदु धर्म में महाकुंभ को मोक्ष का माध्यम भी बताया गया है।
अमृत कलश जोड़ता है समुद्र मंथन से
महाकुंभ के लोगो में बना है अमृत कलश। यह बड़ा ही खास है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार समुद्र मंथन के बाद अमृत कलश बाहर आया था। अमृत कलश से अमृत की 4 बुंदे धरती पर छलक कर गिरी थी। जिन 4 जगहों - प्रयागराज, हरिद्वार, उज्जैन और नासिक में अमृत की बूंदें कलश से छलक कर गिरी थी वहां आज अर्द्धकुंभ और महाकुंभ का आयोजन किया जाता है। हिंदु धर्म में किसी भी शुभ कार्य का प्रतीक कलश को ही माना जाता है।
साधु हैं प्रतीक - सभी जाति और मतों के लोग बिना बुलाए होते शामिल
महाकुंभ मेले में शामिल होने के लिए किसी भी साधु, सन्यासी अथवा जाति व मतों के लोगों को न्यौता नहीं देना पड़ता है। इसी बात का प्रतीक स्वरूप इस लोगो में प्रणाम की मुद्रा में साधु-संतों और संगम में डुबकी लगाते लाखों लोगों दिखाया गया है। इस साल महाकुंभ मेले में लाखों की संख्या में हिंदू धर्म में विश्वासी लोगों के शामिल होने की संभावना है।
जिस तरह किसी भी शुभ कार्य से पहले कलश की स्थापना की जाती है, ठीक वैसे ही शंखनाद को भी बड़ा ही शुभ माना गया है। शंखनाद को शुभ शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। इसी वजह से लोगो में शंखनाद करते साधु को दर्शाया गया है।
सृष्टी के सृजन और प्रलय का साक्षी है अक्षय वट
प्रयागराज महाकुंभ के लोगो में आपको बरगद का एक पेड़ भी दिखाई दे रहा होगा, जो अक्षय वट है। मान्यता है कि अक्षय वट सृष्टि के सृजन और प्रलय दोनों का साक्षी रहा है। इसलिए महाकुंभ लोगो में अक्षय वट को भी स्थान दिया गया है। प्रयागराज में त्रिवेणी संगम के पास ही अक्षय वट मौजूद है, जिसके दर्शन के बिना संगम स्नान को पूरा नहीं माना जाता है। इसके साथ ही इस लोगो में प्रयागराज के बड़े हनुमान जी (लेटे हुए हनुमान जी) को भी दर्शाया गया है।



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