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वंदे भारत नहीं, कुछ और था पहली सेमी हाई स्पीड ट्रेन का नाम, क्यों बदलकर रखा गया नया नाम!

फरवरी 2019 में शुरू हुआ था भारत की पहली सेमी हाई स्पीड वंदे भारत एक्सप्रेस का सफर। राजधानी दिल्ली से महादेव की नगरी काशी (वाराणसी) के बीच चली थी पहली वंदे भारत एक्सप्रेस। देशभर में अब उत्तर को दक्षिण से, पूर्व को पश्चिम से जोड़ने वाली 80 से अधिक वंदे भारत एक्सप्रेस का संचालन किया जा रहा है। लेकिन क्या आप जानते हैं...

हम इतनी देर से जिस वंदे भारत एक्सप्रेस को लेकर चर्चाएं कर रहे हैं, उसका पहला नाम या यूं कहे शुरुआती नाम वंदे भारत एक्सप्रेस था ही नहीं, बल्कि कुछ और ही रखा गया था इसका नाम। क्या था वंदे भारत एक्सप्रेस का पहला नाम? क्यों बदलकर भारत की पहली सेमी हाई स्पीड ट्रेन वंदे भारत का नया नाम रखा गया?

vande bharat blue and saffron

डिजाइन से लेकर ट्रैक पर उतरने के लिए मात्र 1 साल का लक्ष्य

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में अपने पहले कार्यकाल के दौरान केंद्र सरकार ने साल 2017 में एक अत्याधुनिक सेमी हाई स्पीड ट्रेन चलाने की कल्पना की थी। यह ट्रेन सभी प्रकार की अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस और वर्तमान में देश में चल रही सभी मेल/एक्सप्रेस से अलग होने वाली थी। इस ट्रेन को विदेशों की हाई स्पीड ट्रेन से भी बेहतर बनाने के बारे में सोचा गया था।

भारतीय रेलवे ने इसके लिए खास कोच तैयार करने का फैसला लिया जिसे चेन्नई की इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) में तैयार किया जाना था। भारत सरकार साल 2018 में इसे ट्रैक पर उतारना चाहती थी। इसलिए कोच व ट्रेन को डिजाइन करने से लेकर रैक तैयार करने तक को 1 साल के अंदर ही पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था।

blue white vande bharat express

क्या रखा गया था पुराना नाम

संचालन शुरू होने के बाद से ही वंदे भारत एक्सप्रेस यात्रियों की पसंदीदा ट्रेन बन गयी है। कम समय में ही यात्रियों को अत्याधुनिक सुविधाओं के साथ अपने गंतव्य पर पहुंचाने के लिए यह ट्रेन खासी लोकप्रिय मानी जाती है। इस अत्याधुनिक ट्रेन को साल 2018 में ही भारत सरकार ने ट्रैक पर उतारने का फैसला लिया था।

इसलिए शुरुआती दौर में निर्णय लिया गया था कि इस ट्रेन का नाम ट्रेन18 (Train18) रखा जाएगा। शुरुआती दौर में भारतीय रेलवे की तरफ से यह जानकारी दी गयी थी कि भारत की पहली सेमी हाई स्पीड ट्रेन ट्रेन18 होगी।

2018 में न होकर क्यों 2019 में शुरू हुई यह ट्रेन

आप जरूर सोच रहे होंगे कि जब 2018 में ही इसे चलाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था तो फिर यह ट्रेन 2019 में क्यों शुरू हुई? दरअसल, सरकारी लक्ष्य के अनुसार साल 2018 के अंत तक वंदे भारत एक्सप्रेस (तत्कालिन ट्रेन18) का पहला रेक तैयार भी हो चुका था।

saffron vande bharat express

लेकिन नयी तकनीक वाली पूरी तरह से देश में निर्मित यह ट्रेन थी, इसलिए यात्रियों की सुरक्षा को सुनिश्चित करने में इसका ट्रायल रन करने में ही 3-4 महीने का समय लग गया था और फरवरी 2019 में दिल्ली-वाराणसी रूट पर आखिरकार इसे लॉन्च करने का फैसला किया गया।

क्यों बदल दिया गया नाम

फरवरी 2019 में दिल्ली-वाराणसी रूट पर देश की पहली सेमी हाई स्पीड ट्रेन को लॉन्च करने का फैसला तो ले लिया गया लेकिन ट्रेन18 में वह बात नजर नहीं आ रही थी। पूरी तरह से स्वदेशी तकनीकों से निर्मित इस ट्रेन के नाम में भी भारतीयता की झलक दिखनी चाहिए थी, जो पुराने नाम में Missing थी। आखिरकार काफी मंथन करने के बाद ट्रेन18 का नाम बदलकर वंदे भारत एक्सप्रेस रखने का फैसला लिया गया।

विदेशों में जहां किसी भी ट्रेन को डिजाइन करने से लेकर उसे तैयार करने में कम से कम 36-38 महीनों का समय लग जाता है। वहीं ICF चेन्नई के 520 इंजीनियरों ने महज 18 महीने में इस ट्रेन को तैयार करने का कमाल कर दिखाया। यह ट्रेन पूरी तरह से मेड इन इंडिया है, क्योंकि इसे बनाने में 80 फीसदी भारतीय सामग्रियों का इस्तेमाल किया गया है।

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