मलय्यो, मक्खन मलाई व दौलत की चाट - यह कहानी है इन तीनों भाईयों की जिन्होंने अपना सफर तो एक साथ शुरू किया लेकिन बाद में एक-दूसरे से बिछड़ गये। तीनों ने अपने लिए एक-एक शहर का चुनाव कर लिया और परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढाल भी लिया। लेकिन इसके बावजूद तीनों की जड़ें एक-दूसरे से जुड़ी रहीं। कहने का मतलब है कि हम आपको इन तीन भाईयों की कहानी बताने वाले हैं जो 3 अलग-अलग शहरों में सर्दियों की जान होते हैं।
अगर यह कहा जाए कि इन शहरों में सर्दियों का स्वाद बढ़ाने में इनका सबसे बड़ा हाथ होता है, तो यह कहना बिल्कुल गलत नहीं होगा। बनारस का मलय्यो हो, लखनऊ की मक्खन मलाई या निमिष और दिल्ली की दौलत की चाट। इन तीनों मिठाईयों में कुछ खास फर्क नहीं होता है। इन्हें बनाने की विधि भी लगभग एक जैसी ही होती है, फर्क होता है तो बस अलग-अलग शहरों में इन्हें मिले नामों में।
तो चलिए सर्दियों की जान इन तीनों मिठाईयों की कहानी जानते हैं, सेलिब्रिटी शेफ रणवीर बराड़ की जुबानी -
बनारस की घाटों पर खिलती सुबह की धूप जैसा मीठा मलय्यो
बनारस में सर्दियों के शुरुआत का अंदाजा ही इस बात से लगाया जाता है कि अब चौक पर मलय्यो बिकना शुरू हो चुका है। दूध को उबालकर मिठास घुली झाग के ऊपर पिस्ता की बौछार...सुनकर ही मुंह में पानी आ गया न। मुंह में बादलों सी घुलती यह मिठाई सिर्फ और सिर्फ सर्दियों के मौसम में ही मिलती है। नवंबर से लेकर फरवरी के अंत या ज्यादा से ज्यादा मार्च के शुरुआती कुछ दिनों में ही इसका स्वाद चखने का मौका मिलता है। उसके बाद फिर साल भर का लंबा इंतजार।
क्या है मलय्यो की कहानी
सेलिब्रिटी शेफ रणवीर बराड़ ने मलय्यो के शुरू होने की कहानी कुछ यूं बयां की, "बनारस में गंगा के किनारे बहुत अच्छी घास हुआ करती थी। ताजी घास जब गाय चरती थी, तो वह अच्छा दूध देती थी। सर्दियों में गाय के दूध में चिकनाई की मात्रा भी बढ़ जाती है। सर्दियों की शाम को दूध दुहकर जब उसे खराब होने से बचाने के लिए बाहर रखा जाता था, तब देखा गया कि उसकी चिकनाई (Cream) ऊपर आने लग जाती है। अगली सुबह जब उस क्रीम को मथा जाता था तो वह मक्खन बनने की जगह झाग बन जाती थी।"
बकौल बराड़, फिर क्या था! बनारस वालों ने अपना दिमाग लगाया और कहा कि अगली सुबह यहीं होगा सबसे पौष्टिक नाश्ता। दूध के ऊपर आयी यहीं झाग कहलायी मलय्यो। इस झाग का स्वाद बढ़ाने के लिए इसमें केसर आदि भी मिलाया जाने लगा। बाद में नीचे बचे दूध को अलग से बेचा जाने लगा। आज भी सर्दियों की सुबह में लोग घाटों पर मलय्यो की दुकानों के बाहर लाइन लगाकर पहले डिब्बे में दूध लेते हैं और फिर घड़े में मलय्यो लेकर ही अपने घर जाते हैं।
लखनऊ का नवाबी मक्खन मलाई
बनारस में जब भी कोई नयी चीज आती, तो वह पूरी दुनिया में मशहूर हो जाती थी। कुछ ऐसा ही मलय्यो के साथ भी हुआ। बनारस के घाटों पर जब मलय्यो का बिकना शुरू हुआ तो इसने अपना जलवा आसपास के शहरों में भी दिखाना शुरू कर दिया। नवाबी शहर लखनऊ ने कहा, 'ऐसा तो नहीं है कि सिर्फ बनारस में गंगा घाटों पर ही अच्छी घास उगती है। हमारे पास भी गोमती नदी के किनारे नर्म घास उगती है। तो अगर बनारस में दूध से मलय्यो बन सकता है तो हमारे यहां की दूध भी मलाईदार होती है, उससे मक्खन मलाई क्यों नहीं बन सकता।'
बस फिर क्या था...गोमती नदी के किनारे की नर्म घास खाकर जब गाय ने दूध दिया और उसे जब ओस में रखकर ठंडा किया गया तो उसपर आयी मलाई को फेंटकर बनायी गयी मक्खन मलाई। लेकिन बिना नवाबी ठाठ के लखनऊ कैसे पूरा हो सकता है। इसलिए मक्खन मलाई में भी नवाबी ठाठ आयी और उसमें ड्राई फ्रूट, कूटी हुई हल्की मिश्री आदि मिलाया जाने लगा। लखनऊ में मक्खन मलाई को मिला एक और नाम और कहा जाने लगा निमिष। लखनवी मक्खन मलाई में केसर मिलाना अनिवार्य हो गया। इस बीच लखनऊ ने मक्खन मलाई का अपना अलग वर्जन तैयार किया।
मक्खन मलाई का लखनवी अंदाज
लखनऊ में मक्खन मलाई को अपने अंदाज में बनाया जाने लगा। यहां मक्खन मलाई को कागजी समोसे के साथ खाया जाने लगा। कागजी समोसा Puff पेस्ट्री जैसा होता है, जिसका नमकीन स्वाद जब मक्खन मलाई के मीठे अंदाज से मिलता है तो उसका स्वाद कई गुना बढ़ा देता है। रणवीर बराड़ की सलाह है कि कभी भी आप अगर सर्दियों में लखनऊ जाएं तो अकबरी गेट और गोल दरवाजे के आसपास सुबह-सुबह जरूर जाएं।
लखनऊ में मक्खन मलाई का स्वाद नवंबर से फरवरी तक ही मिलेगी। लखनऊ में मक्खन मलाई को निमिष के नाम से भी जाना जाता है। सर्दियों की सुबह लखनऊ की गलियों में लोग फेरी लगाकर मक्खन मलाई तो बेचते ही हैं, साथ ही सर्दियों में यहां आपको काली गाजर का हलवा भी मिलेगा, जिसका स्वाद चखना बिल्कुल न भूले।
दिल्ली में मीठी चाट बनी 'दौलत की चाट'
जब बनारस और लखनऊ में मलय्यो और मक्खन मलाई धूम मचा रही थी तो दिल्ली भला कैसे पीछे रह जाती। पुरानी दिल्ली में बनारस की चाट भी काफी पसंद की जाती थी। दिल्लीवालों ने भी कहा, अगर बनारस के पास गंगा और लखनऊ के पास गोमती है, तो हमारे पास भी तो यमुना है। यमुना किनारे की ताजी घास खाकर हमारी गायों के दूध में भी तो थोड़ी-बहुत मलाई आती है। दिल्ली में भी सर्दियां ठीक ही पड़ती है, तो ओस के नीचे रखने पर हमारे यहां भी दूध पर क्रीम आ जाएंगी।
तब उसी पद्धति से बना तो लिया गया दौलत की चाट, लेकिन बाद में यह समझ आया कि लखनऊ या बनारस जैसा दूध दिल्ली में नहीं मिलता है। दौलत की चाट का स्वाद मलय्यो या मक्खन मलाई जैसा करने के लिए दिल्ली में डाला जाने लगा खोवा, ड्राई फ्रूट और ठंडई का सीरप। इसके पीछे दिल्लीवालों का तर्क था कि चाट में तो कई तरह की चीजें भी जा सकती हैं।
कुल मिलाकर यह कहानी बनारस से शुरू हुई, लेकिन दूध, जगह और ठंड के हिसाब से उसे अलग-अलग जगहों पर उसी आधार पर एडजस्ट किया गया। मलय्यो से यह पहले मक्खन मलाई और फिर दौलत की चाट बनी।
तो इस साल सर्दियों में दूध की मलाई से बनी बादलों जैसी नर्म इस मिठाई का स्वाद आप इनमें से किस शहर में चखने का प्लान बना रहे हैं...!



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