दिल्ली और NCR में हवा के गिरते स्तर को सुधारने के लिए कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) ने GRAP 2 यानी ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान को लागू करने का आदेश दे दिया है। लगभग 94 दिनों तक साफ हवा में सांस लेने के बाद सोमवार को दिल्लीवासियों ने 'बेहद खराब' गुणवत्ता वाली हवा में सांस ली। दिल्ली में वायु की गुणवत्ता का औसत सूचकांक AQI 310 पर पहुंच चुका है।
उम्मीद की जा रही है कि GRAP स्टेज 2 के लागू होने के बाद वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी और इसका टार्गेट एक्शन भी सुनिश्चित हो सकेगा। दिल्ली व NCR में आज सुबह (22 अक्तूबर) को सुबह 8 बजे से GRAP स्टेज 2 को लागू कर दिया गया है, जिसके तहत कई तरह की पाबंदियों को भी लागू किया जा रहा है।

दिल्ली में वायु प्रदूषण बढ़ने की प्रमुख वजह
दिल्ली और आसपास के NCR क्षेत्र में सोमवार की सुबह 8 बजे AQI 300 को पार कर गया, जिसके बाद कहा जा सकता है कि दिल्ली की हवा में जहर घुल चुका है। दिल्ली में वायु प्रदूषण के बढ़ने की मुख्य वजह पंजाब और हरियाणा के खेतों में पराली जलाना माना जाता है। हालांकि पराली जलाने पर सरकार की तरफ से रोक लगायी गयी है, इसके बावजूद पड़ोसी राज्य पंजाब और हरियाणा में किसान खेतों में पराली जलाते हैं।
पराली जलाने से निकलने वाला धुआँ और राख दिल्ली पहुंचकर वहां की हवा को जहरीली बनाते हैं। लगातार खराब गुणवत्ता वाली हवा में सांस लेने की वजह से सांस लेने संबंधित परेशानियां शुरू हो जाती हैं। इसलिए लोगों से मास्क का इस्तेमाल करने की सलाह दी जा रही है।
कहां कितना खराब रही हवा की गुणवत्ता
दिल्ली के कई इलाकों में हवा 'बेहद खराब' (Very Poor) गुणवत्ता वाली रही।
| जगह | AQI |
| आनंद विहार | 375 |
| वजीरपुर | 355 |
| जहांगीरपुर | 359 |
| मुंडका | 328 |
| रोहिणी | 325 |
| अक्षरधाम मंदिर | 307 |
मीडिया रिपोर्ट्स से मिली जानकारी के मुताबिक रविवार की शाम को दिल्ली का औसत AQI 277 था, जिसे खराब माना जा सकता है। शाम को 7 बजे यह 289 और रात को 11 बजे तक 303 पर पहुंच गया था। कहा जा रहा है कि ऐसी स्थिति में यदि पराली जलाने वाली घटनाएं और घटी तो दिल्ली की हवा और भी ज्यादा जहरीली हो जाएगी।

GRAP 2 में क्या-क्या पाबंदियां लागू
- रोज सड़कों पर वैक्यूम स्वीपिंग और जल छिड़काव कर धूल को नियंत्रित करने का प्रयास किया जाएगा।
- भारी ट्रैफिक वाली सड़कों पर धूल के कणों को बढ़ने से रोकने के लिए मशीनों का प्रयोग करना होगा और जमा धूल का निपटान सही तरीके से करना होगा।
- निर्माण व ध्वस्त करने वाली साइट्स पर धूल नियंत्रण उपायों के पालन पर निगरानी तेज करनी होगी।
- डीजल जनरेटर पर निर्भरता को कम कर बिजली आपूर्ति को सुनिश्चित करनी होगी।
- NCR के सभी क्षेत्रों में जनरेटर चलाने के लिए निर्धारित समय-सारणी का सख्ती से पालन करना होगा।
- समाचार पत्र, टीवी, रेडियो आदि के माध्यम से लोगों को वायु प्रदूषण के स्तर के बारे में जानकारी देना, प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए उन्हें 'क्या करना चाहिए' और 'क्या नहीं करना चाहिए' की सलाह देते रहना।
- निजी वाहनों के इस्तेमाल को रोकने के लिए पार्किंग शुल्क में वृद्धि।
- आम जनती की सरल आवाजाही को सुनिश्चित करने के लिए इलेक्ट्रिक बसों और मेट्रो सेवाओं के फेरों में वृद्धि करनी होगी।
- सर्दियों के मौसम में खुले बायो-मास या कचड़ों को जलाने से रोकने के लिए इलेक्ट्रिक हीटर देना अनिवार्य।



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