जल्द ही आर्कियोलॉजीकल सर्वे ऑफ इंडिया (ASI) दिल्ली के मेहरौली आर्कियोलॉजीकल वीलेज में मौजूद 16वीं सदी के प्रसिद्ध जमाली-कमली मस्जिद के मरम्मत का काम शुरू करने वाली है। इस बाबत मीडिया रिपोर्ट्स से मिली जानकारी के अनुसार बल्बन मकबरा परिसर की चहारदीवारी पर भी उग चुके झाड़-झंखारों को साफ कर उसकी मरम्मत भी की जाएगी।
दिल्ली सर्किल के सुपरीटेंडेंट आर्कियोलॉजिस्ट प्रवीण सिंह ने बताया कि इस महीने से ही मरम्मत का काम शुरू किया जा सकता है जिसके लिए टेंडर भी आमंत्रित किया जा चुका है।

बताया जाता है कि जमाली-कमली मस्जिद को बनाने का काम 1528-29 के दौरान बाबर के शासनकाल में शुरू हुआ था, जिसका निर्माण हुमायूं के शासनकाल में पूरा हुआ था। शेख फज़लुल्लाह, जिन्हें जलाल खान उर्फ जमाली के नाम से भी जाना जाता था, एक संत और कवि थे। वे सिकंदर लोधी से हुमायूं के शासनकाल के दौरान जीवित रहे। बल्बन के मकबरे से महज 300 मीटर की दूरी पर बनाये गये इस मस्जिद का नाम उन्हीं के नाम पर रखा गया था। मस्जिद के ठीक पास में 1528-29 के दौरान एक अन्य मकबरा बनाया गया था।
मकबरे में दो कब्रें हैं, जिसमें एक तो जमाली और दूसरी एक अनजान व्यक्ति कमली का है, जिनके बारे में कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है। ASI की टीम टूट रहे इस मकबरे की भी मरम्मत करने की योजना बना रही है। बताया जाता है कि मस्जिद के गुंबद पर प्लास्टर करने का काम शुरू करने के साथ ही मकबरा की भी मरम्मत की जाएगी। यहां से कुछ पत्थर गायब हो चुके हैं, जिनके स्थान पर नये पत्थर लगाए जाएंगे। ASI के अधिकारियों का कहना है कि पिछले 10 सालों से यहां कोई मरम्मत कार्य नहीं हुआ है।
वहीं दूसरी तरफ जल्द ही दिल्ली के लोधी गार्डन में मौजूद प्रसिद्ध मकबरे और मस्जिद की मरम्मत का काम भी ASI शुरू करने वाली है। मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि इस ऐतिहासिक मकबरे और मस्जिद की मरम्मत के बाद ये अपने पुराने रंग-रूप में नजर आएंगे। जिन धरोहरों का संरक्षण ASI करेगी उनमें मोहम्मद शाह, बड़ा गुंबद मस्जिद, शीश गुंबद, सिकंदर लोधी और अठपुरा स्मारक आदि शामिल हैं। ASI के अधिकारियों के अनुसार इनके संरक्षण के लिए टेंडर निकाला गया है।

बताया जाता है कि सिकंदर लोधी के मकबरे का बाहरी गुंबद बदहाल स्थिति में है। जगह-जगह से इसके पत्थर निकल चुके हैं। वहीं वर्गाकार चबूतरे की दोनों छतरियों का रख-रखाव भी नहीं हो रहा है। बड़ा गुंबद, जो मुहम्मद शाह के मकबरे से सिर्फ 300 मीटर की दूरी पर मौजूद है, की टूटती दीवारें, मेहराब और नींव भी कमजोर हो चुकी है। गुंबद में कई जगहों से दरारें नजर आने लगी हैं। इसके साथ ही सिकंदर लोधी के मकबरे से थोड़ी दूरी पर नाले पर बनाया गया 7 मेहराबों वाला पुल भी खराब हो रहा है।
इसे 1556-1605 के दौरान अकबर के शासनकाल के दौरान नवाब बहादुर नामक एक व्यक्ति ने बनवाया था। इसका संरक्षण भी किया जाएगा। सबसे खास बात है कि इन मकबरे, गुंबद आदि के संरक्षण के लिए गुड़, उड़द, बेल के फल और गोंद जैसी प्राकृतिक वस्तुओं के इस्तेमाल करने का दावा किया जा रहा है। मिली जानकारी के अनुसार इसके लिए राजस्थान और मध्य प्रदेश से कारीगरों को बुलाया जाएगा। ASI के अधिकारियों का कहना है कि ये ऐसी वस्तुएं हैं, जिनसे बनने वाली इमारतें लंबे समय तक खराब नहीं होती हैं। इस वजह से स्मारकों के संरक्षण के लिए इसी पद्धति का उपयोग करने का फैसला लिया गया है।



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