शानदार प्राकृतिक दृश्य, वाईल्ड लाइफ कॉरिडोर और फर्राटेदार रफ्तार से भागती गाड़ियां। दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे (Delhi-Dehradoon Expressway) की ये खूबियां ही इसे लोकप्रिय बनाती है। इस एक्सप्रेसवे का निर्माण कार्य लगभग पूरा हो चुका है और एक बड़े हिस्से को गाड़ियों की आवाजाही के लिए खोला भी जा चुका है। 213 किमी लंबे दिल्ली के अक्षरधाम से देहरादून के बीच इस एक्सप्रेसवे का निर्माण करीब ₹1200 करोड़ की लागत से किया जा रहा है।
अब एक्सप्रेसवे को पूरी तरह से खोलने की तैयारियां तो की जा रही हैं, लेकिन रास्ते का रोड़ा बन गया है एक घर। दिल्ली-गाज़ियाबाद बॉर्डर पर मौजूद एक घर ने इस एक्सप्रेसवे के अंतिम पड़ाव के निर्माण का रास्ता काट दिया है, जिस वजह से इसे पूरा नहीं किया जा सका है और अब इसके खुलने की संभावनाओं पर आशंका के बादल मंडराने लगे हैं।

क्यों रोड़ा बन रहा है यह घर?
दिल्ली-गाज़ियाबाद बॉर्डर पर लगभग 1600 वर्ग मीटर के क्षेत्र में बने एक घर में रहता है वीरसेन सरोहा और उनका परिवार। यह घर ही दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे की राह का सबसे बड़ा रोड़ा बना बैठा है। इससे पहले वर्ष 1998 में जब उत्तर प्रदेश हाउसिंग बोर्ड ने 6 गांवों के 2,614 एकड़ भूमि में मंडोला आवास योजना के लिए अधिग्रहण करने की विज्ञप्ति जारी की थी, उस समय इन गांवों के कई परिवारों ने अपनी जमीन देने से इंकार कर दिया था। जिन लोगों ने अपनी जमीन बोर्ड को देने से इंकार करते हुए आंदोलन शुरू कर दिया था, उनमें सरोहा परिवार भी शामिल था।
Times of India की मीडिया रिपोर्ट के अनुसार इन परिवारों ने जमीन के लिए अधिक कीमत की मांग करते हुए आंदोलन किया था। हालांकि बाद में समझाने-बुझाने पर अधिकांश परिवार अपनी जमीन देने के लिए राजी हो गए। लेकिन वीरसेन सरोहा ने अपनी जमीन से इंकार करते हुए इलाहबाद (प्रयागराज) हाईकोर्ट का रूख किया। नतीजा यह हुआ उनकी जमीन के अधिग्रहण पर रोक लगा दी गयी और यह आवास योजना ही ठंडे बस्ते में डाल दी गयी।
नेशनल अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने जब इस एक्सप्रेसवे के निर्माण की घोषणा की, तब एक प्रकार से हाउसिंग बोर्ड ने अपना आभार व्यक्त किया था। लेकिन इस बार भी वीरसेन का घर एक्सप्रेसवे के रास्ते का कांटा बन गया। आज भी यह घर ठीक उसी तरह से अपनी जगह खड़ा है जैसा 90 के दशक में था। इस घर के आसपास की सारी चीजें बदल गयी, एक्सप्रेसवे के बन जाने से यहां के घर टूट गये, स्थानीय निवासी मुआवजा लेकर दूसरी जगहों पर अपने नए घर में चले गये लेकिन सरोहा परिवार आज भी यहां रहता है।
कितना तैयार हुआ है एक्सप्रेसवे?
दिल्ली के अक्षरधाम से ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे (EPE) के बीच NHAI इस एक्सप्रेसवे को दो हिस्सों में बना रही है। इसमें से एक हिस्सा अक्षरधाम से उत्तर प्रदेश की सीमा लोनी तक 14.7 किमी तक और दूसरा हिस्सा लोनी से EPE पर खेकरा तक 16 किमी बनाया जा रहा है।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार इन दोनों हिस्सों का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है, 1600 वर्ग मीटर के क्षेत्र को छोड़कर, जहां वीरसेन का घर बना हुआ है। पूरे एक्सप्रेसवे का निर्माण कार्य भी लगभग पूरा हो चुका है, जिसके जून में खोल देने की संभावना भी जतायी जा रही है। लेकिन क्या इस एक्सप्रेसवे को जून में खोला जा सकेगा?
NHAI के अधिकारियों के हवाले से मीडिया रिपोर्ट में बताया गया है कि घर के मालिक और उनके परिवार ने सुप्रीम कोर्ट में मामला दर्ज किया है, इसलिए यहां पर एक्सप्रेसवे का निर्माण रोक देना पड़ा है। सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच को इस मामले की सुनवाई करने का निर्देश दिया है।
16 अप्रैल को लखनऊ हाई कोर्ट में इस मामले की सुनवाई होनी है। बताया जाता है कि सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई में तेजी लाने का निर्देश दिया है क्योंकि बड़ी संख्या में लोगों की भलाई के लिए इस एक्सप्रेसवे का खुलना इसी मामले पर निर्भर करता है।
NHAI के अधिकारियों का कहना है कि अक्षरधाम-EPE सेक्शन से होकर दिल्ली से बागपत तक की दूरी 30 मिनट से भी कम समय में तय की जा सकेगी। इस एक्सप्रेसवे का लगभग 20 किमी हिस्सा एलिवेटेड है। इसमें राजाजी नेशनल पार्क और शिवालिक रिजर्व फॉरेस्ट से होकर गुजरने वाला वाईल्ड लाइफ कॉरिडोर भी शामिल है। एक्सप्रेसवे पर अक्षरधाम से लोनी तक का 18 किमी का हिस्सा टोल-फ्री है। वर्तमान में दिल्ली से देहरादून तक सड़क मार्ग से आने-जाने में करीब 5 से 6 घंटे का समय लग जाता है लेकिन यह एक्सप्रेसवे इस समय को घटाकर सीधा आधा यानी मात्र 2.5 घंटा कर देगा।



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