पौराणिक मान्यताओं में कहा जाता है कि भगवान श्रीराम ने लंकापति रावण को पराजित कर उसका अंत करने का आर्शिवाद मांगने के लिए मां दुर्गा की पूजा और उनका आह्वान किया था। इसके बाद से ही शारदोत्सव की शुरुआत हुई और हर साल आश्विन के महीने में मां दुर्गा की पूजा करने की परंपरा शुरू हो गयी।
इसी वजह से विजयादशमी के दिन श्रीराम द्वारा किये गये रावण वध का प्रतीक स्वरूप हर साल रावण का पुतला दहन किया जाता है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में भी अलग-अलग रामलीला कमेटियों की ओर से पुतलादहन का आयोजन किया जाता है। इस साल दिल्ली में होने वाला है भारत में रावण का सबसे लंबा पुतला दहन।

NDTV की एक रिपोर्ट से मिली जानकारी के अनुसार दिल्ली की श्री राम लीला सोसायटी ने दावा किया है कि वे इस साल दशहरा के दिन भारत का सबसे ऊंचा रावणदहन करने वाले हैं। बताया जाता है कि श्री राम लीला सोसायटी 211 फीट ऊंचे रावण का पुतला जलाएगी, जिसे बनाने में करीब 4 महीनों का वक्त लग गया है।
मीडिया से बात करते हुए इस राम लीला कमेटी के चेयरमैन राजेश गहलोत ने कहा कि हम सभी देख रहे हैं कि समाज में पाप बढ़ता जा रहा है। रावण का यह पुतला इसी बढ़ते पाप का प्रतीक है, जिसका दहन हम दशहरा के दिन करेंगे। इस साल 12 अक्तूबर 2024 को दशहरा मनाया जाएगा।

कहां होगा यह रावणदहन?
राजेश गहलोत ने कहा कि दशहरा उत्सव में शामिल होने का न्यौता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत भाजपा के कई अन्य नेताओं को भी भेजा गया है। हमें पूरी उम्मीद है कि पीएम मोदी इसमें जरूर शामिल होंगे। श्री राम लीला सोसायटी का रावण दहन दिल्ली के द्वारका इलाके के सेक्टर 10 में किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि इस साल रामलीला की सजावट का थीम अयोध्या का पुराना राम मंदिर रखा गया है जिसे ध्वस्त कर दिया गया था। राम लीला मंच में प्रवेश के लिए जो प्रवेश द्वार बनाए गये हैं उनका डिजाइन दक्षिण भारतीय मंदिरों के प्रवेश द्वार, जिन्हें गोपुरम कहा जाता है, के तर्ज पर बनाया गया है।

राम लीला में एक्टिंग के लिए करीब 400 कलाकारों का ऑडिशन लिया गया था, ताकि हर किरदार के लिए सही और बिल्कुल सटिक एक्टर मिल सकें। रामलीला देखने आने वाले दर्शकों की सुरक्षा और उनकी सुविधाओं का ध्यान रखने के लिए 200 वॉलेंटियर, 100 से ज्यादा सीविल अधिकारी और 50 से ज्यादा दिल्ली पुलिस के कर्मी तैनात हैं।



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