जो लोग एयरपोर्ट से होकर यात्रा करते हैं, उन्हें पता होता है कि एयरपोर्ट पर सिक्योरिटी जांच के समय बैग से लैपटॉप, कैमरा, एडाप्टर, पानी की बोतल निकालकर उसे ट्रे में रखकर X-ray स्कैनर में डालना और स्कैन हो जाने के बाद वापस बैग में रखना कितना झंझट का काम होता है।कोलकाता एयरपोर्ट पर अब सिक्योरिटी चेकिंग में लगने वाला लंबा समय और झंझट जल्द खत्म होने वाला है।

कोलकाता के नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट से होकर यात्रा करने वाले यात्रियों को सिक्योरिटी जांच के दौरान अपने केबिन बैग से लैपटॉप, कैमरा, एडॉप्टर या फिर पानी या किसी भी तरल पेय पदार्थ की बोतल को बाहर निकालकर ट्रे में डालने की जरूरत खत्म होने वाली है। कोलकाता एयरपोर्ट पर जल्द ही 2डी मशीनों को हटाकर केबिन बैग के लिए 3डी स्कैनर और यात्रियों के लिए फुल बॉडी स्कैनर लगाया जाएगा। इसकी वजह से ही सिक्योरिटी जांच के दौरान लगने वाला अतिरिक्त समय अब काफी कम हो जाने वाला है।
ब्यूरो ऑफ सीविल एविएशन सिक्योरिटी (BCAS) ने हाल ही में आदेश जारी किया है कि वे सभी एयरपोर्ट जहां 50 या उससे अधिक यात्रियों की आवाजाही होती है, उन सभी एयरपोर्ट्स पर 31 दिसंबर से पहले केबिन बैग्स की जांच के लिए 3D Tomography X-ray (CTX) मशीन लगाना होगा। मिली जानकारी के अनुसार कोलकाता समेत 3 अन्य संवेदनशील एयरपोर्ट्स पर 31 दिसंबर तक फुल बॉडी स्कैनर भी लगाया जाएगा। कोलकाता एयरपोर्ट के एक अधिकारी ने बताया कि ये दोनों मशीनें कोलकाता एयरपोर्ट के लिए गेमचेंजर साबित होने वाली है। बताया जाता है कि इस बाबत टेंडर जारी किया जा चुका है और इस साल के अंत तक दोनों मशीनों को लगा दिया जाएगा।
3D CTX के क्या होंगे फायदे

फिलहाल कोलकाता एयरपोर्ट पर CTX मशीन का इस्तेमाल बैगेज की जांच के लिए की जाती है, जहां बैग्स को बिना खोले ही उनकी जांच संभव हो पाती है। केबिन बैग्स के लिए इन मशीनों के लग जाने के बाद यात्रियों को निम्न सुविधाएं होंगी :
- इलेक्ट्रॉनिक मशीनों, चार्जर, लैपटॉप को बाहर ट्रे में निकालने की जरूरत नहीं होगी।
- पानी की बोतल, तरल पेय पदार्थों की बोतलों को अब बैग से निकालने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
- सिक्योरिटी जांच में लगने वाला समय कम हो जाएगा, क्योंकि इन सामानों को पहले बैग से निकालना और फिर बैग में डालने का समय बचेगा।
फुल बॉडी स्कैनर के क्या होंगे फायदे
- कोलकाता एयरपोर्ट पर कुल 13 फुल बॉडी स्कैनर लगाए जाएंगे। डोर फ्रेम मेटल डिटेक्टर (DFMD) को हटाया नहीं जाएगा। इसका इस्तेमाल स्पेशल मामलों जैसे व्हीलचेयर वाले यात्रियों या वैसे यात्री जो किसी कारणवश फुल बॉडी स्कैनर से होकर नहीं गुजर सकेंगे, उनके लिए किया जाएगा।
- फुल बॉडी स्कैनर बिना किसी शरीर के किसी हिस्से को छुए ही जांच करेगा।
- मेटल डिटेक्टर में जहां सिर्फ धातु ही पकड़े जाते हैं, वहीं बॉडी स्कैनर नॉन-मेटल को भी ढूंढ निकालने में सक्षम होगा।
- इस तकनीक का इस्तेमाल विदेशों में कई एयरपोर्ट्स पर किया जाता है। वर्तमान में दिल्ली एयरपोर्ट पर इसका ट्रायल भी चल रहा है।
किन एयरपोर्ट्स पर लगेंगे फुल बॉडी स्कैनर
- चेन्नई एयरपोर्ट
- पुणे एयरपोर्ट
- गोवा एयरपोर्ट
वर्तमान में कितने मशीनें लगी हैं एयरपोर्ट पर
कोलकाता एयरपोर्ट पर वर्तमान में 4 सिक्योरिटी होल्ड एरिया (SHA) है। प्रत्येक SHA पर जांच के लिए 6 काउंटर हैं, जिनमें से 4 पुरुषों व 2 महिलाओं के लिए है। इस तरह कुल 24 काउंटर हैं। कोलकाता एयरपोर्ट पर कुल 15 2D एक्सरे मशीन हैं, जिसमें से 12 घरेलु और 3 अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर लगी हुई हैं।



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