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असीम शांति लिए, ईश्वर के करीब ले जाएंगे भारत में मौजूद ये टॉप 5 आध्यात्मिक शहर

By Super

विश्व मानचित्र पर अपनी विविधताऔर अनोखी संस्कृति के चलते एक ख़ास मुकाम प्राप्त कर चुका भारत आज अपने अंदर अनेकों धर्मों को समेटे हुए है। साथ ही यहां मौजूद अलग अलग शहर भी अपने अंदर एक अलग तरह का आध्यात्म संजो कर रखे हुए हैं। कहा जा सकता है कि इन शहरों का भक्तों से अपना एक विशेष तरह का जुड़ाव है जिसे केवल एक भक्त ही महसूस कर सकता है।

आज भारत में मौजूद कई ऐसे शहर हैं जो या तो कभी आध्यात्मिक केंद्र थे या फिर आज ये महत्त्वपूर्ण धार्मिक हब में तब्दील हो गए हैं।ज्ञात कि इन सभी धार्मिक शहरों की ये खासियत है कि कोई न कोई मिथक या किवदंती इनसे जुड़ी हुई है। तो इसी क्रम में आज हम आपको अपने इस लेख के जरिये अवगत कराने वाले हैं भारत में मौजूद टॉप 5 आध्यात्मिक शहरों से।

आज हमारे द्वारा बताए गए ये शहर ऐसे हैं जो किसी भी व्यक्ति का मन मोह सकते हैं साथ ही इनके अंदर ये भी सलाहियत है कि ये परेशानहाल व्यक्ति की चिंताओं का निवारण करने की भी क्षमता रखते हैं। तो अब देर किस बात की आइये जाना जाए कि क्यों धर्म और आध्यात्म दोनों की दृष्टि से अपने में खास ये भारत के ये शहर।

हरिद्वार

हरिद्वार (या हरद्वार) का शाब्दिक अर्थ है, ‘भगवान् तक पहुँचने का रास्ता'। उत्तराखंड राज्य की पहाड़ियों के बीच स्थित, यह एक प्रमुख तीर्थ स्थल है। यह पवित्र शहर भारत के सात पवित्र शहरों अर्थात् ‘सप्त पुरी' में से एक है। इसके अलावा उत्तराखंड के अन्य तीन धार्मिक केंद्र ऋषिकेश, केदारनाथ एवं बद्रीनाथ तक जाने का रास्ता भी इसी स्थान से होकर जाता है। ज्ञात हो कि हरिद्वार शहर को मायापुरी, कपिला, मोक्षद्वार एवं गंगाद्वार के नाम से भी जाना जाता है। इस शहर का उल्लेख कई प्राचीन हिंदू महाकाव्यों में मिलता है। इस शहर का इतिहास राजा विक्रमादित्य के समय से मौजूद है। यह स्थल अपने विश्व प्रसिद्ध धार्मिक केन्द्रों एवं पर्यटक आकर्षणों के लिए जाना जाता है। यहाँ स्थित अधिकतर धार्मिक स्थल पवित्र गंगा नदी के किनारे स्थित हैं। यदि बात इस शहर के पर्यटन आयामों की हो तो आपको बता दें कि यहां ऐसा बहुत कुछ है जो आने वाले किसी भी पर्यटक का मन मोह सकता है।

Photo Courtesy: Pankajgupta16

वाराणसी

वाराणसी को बनारस और काशी के नाम से भी जाना जाता है। यह शहर, दुनिया में सबसे प्राचीन और निरंतर आगे बढ़ने वाला शहर है। इस शहर को भगवान शिव की नगरी कहा जाता है। भगवान शिव, हिंदुओं के प्रमुख देवता है जिन्‍हे सृजन और विनाश का प्रतीक माना जाता है। वाराणसी, हिंदू धर्म के सबसे पवित्रतम शहरों में से एक है। इस शहर को लेकर हिंदू धर्म में बड़ी मान्‍यता है कि अगर कोई व्‍यक्ति यहां आकर मर जाता है या काशी में उसका अंतिम सस्‍ंकार हो, तो उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है यानि उस व्‍यक्ति को जन्‍म और मृत्‍यु के चक्र से मुक्ति मिल जाती है। इसीलिए, इस जगह को मुक्ति स्‍थल भी कहा जाता है। वाराणसी के बारे में लोगों का अटूट विश्‍वास है कि यहां बहने पवित्र नदी गंगा में यदि डुबकी लगा ली जाएं तो सारे पाप धुल जाते है। यदि आप वाराणसी में हों तो यहां मौजूद अलग अलग और अपने में अनूठे घाटों को देखना बिलकुल न भूलें।

Photo Courtesy: Arian Zwegers

बोधगया

बोधगया बिहार में स्थित है और ऐतिहासिक रूप से उरूवेला, समबोधि, वज्रासन या महाबोधि के नाम से जाना जाता था। बोधगया अपने कद्रदानों को आध्यात्म और वास्तुकला आश्चर्य का अनुभव कराता है। चूँकि बिहार में कई मठ पाये जाते हैं और इसका नाम भी विहार से उत्पन्न हुआ है जिसका अर्थ है मठ होता है। बौद्ध धर्म तथा धार्मिक आध्यात्म के परिपेक्ष्य में बोधगया का स्थान काफी ऊँचा है। बोधगया पर्यटन के अन्तर्गत बौद्ध धर्म तथा कई अन्य पंथों के सबसे ज्यादा प्रामाणिक और ऐतिहासिक केन्द्र आते हैं। बोधगया बौद्ध धर्म अनुयायियों का प्रमुख तीर्थस्थल है। स्थान के रूप में बोधगया की अपनी आत्मा है जो शान्ति और सौम्यता से ओत-प्रोत है। यदि बात बोधगया और इसके आसपास के पर्यटक स्थल की हो तो आपको बता दें कि महाबोधि मन्दिर, विष्णुपद मन्दिर, बोधि वृक्ष, दुंगेश्वरी गुफा मन्दिर और जामा मस्जिद यहां के सबसे प्रमुख आकर्षण हैं।

Photo Courtesy: Rao'djunior

अमृतसर

पंजाब में स्थित अमृतसर सिक्ख समुदाय का आध्यात्मिक और सांस्कृतिक केन्द्र है। यह उत्तर-पश्चिम भारत के सबसे बड़े शहरों में से एक है। इस शहर की स्थापना 16वीं शताब्दी में चौथे सिक्ख गुरू, गुरू रामदास जी ने किया था और इसका नाम यहां के एक पवित्र तालाब अमृत सरोवर के नाम पर पड़ा। 1601 में गुरू रामदास जी के उत्तराधिकारी गुरू अर्जुन देव जी ने अमृतसर का विकास किया। उन्होंने यहां एक भव्य मंदिर का निर्माण कार्य भी पूरा किया, जिसकी शुरुआत गुरू रामदास जी ने की थी। अमृतसर में कई ऐतिहासिक गुरुद्वारे हैं। इनमें से हरमंदिर साहिब सबसे महत्वपूर्ण है, जिसे स्वर्ण मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। इसके अलावा भी यहां कई महत्त्वपूर्ण दर्शनीय स्थल मौजूद हैं जिनकी यात्रा आपको अवश्य करनी चाहिए।

Photo Courtesy: Arian Zwegers

ऋषिकेश

हिमालय का प्रवेश द्वार ऋषिकेश, जिसे देवभूमि के नाम से भी जाना जाता है, देहरादून जिले का एक प्रमुख तीर्थस्थान है। पवित्र गंगा नदी के तट पर स्थित इस स्थान का हिन्दू समुदाय में बहुत अधिक धार्मिक महत्व है। प्रतिवर्ष, पूरे देश भर से भारी संख्या में पर्यटक इस स्थान के धार्मिक स्थलों, महान हिमालय को देखने तथा गंगा नदी में डुबकी लगाने आते हैं। हिमालय की तलहटी में स्थित ऋषिकेश कई हिन्दू देवी-देवताओं का घर है। इस स्थान के प्राचीन मन्दिरों तथा आश्रमों की ख्याति दूर-दूर तक फैली है। इस क्षेत्र में योग और ध्यान के केन्द्र भी है जहाँ पर अनुभवी प्रशिक्षकों द्वारा योग और ध्यान का प्रशिक्षण नियमित रूप से दिया जाता है। हिन्दू महाकाव्य के विपरीत एक हिन्दू मान्यता के अनुसार रावण का वध करने के पश्चात भगवान राम ने यहीं पर तपस्या की थी। यदि आप ऋषिकेश में हों तो आप यहां ऋषिकुण्ड, वशिष्ठ गुफा, काली कमलीवाले पंचायती क्षेत्र, ओंकारानन्द आश्रम, शिवपुरी, नीलकंठ महादेव मंदिर, गीता भवन, त्रिवेणी घाट और स्वर्ग आश्रम की यात्रा करना बिलकुल न भूलें।

भारत के टॉप 5 आध्यात्मिक शहर

Photo Courtesy: Iqbal Mohammed

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