शिक्षा से ही हर तरह की मुश्किलें आसान बनती है और शिक्षा ही नए मौकों के दरवाजें खोलता है। भारत में एक गांव ऐसा ही है जो शिक्षा के मामले में दूसरे राज्यों को प्रेरित कर रहा है। क्या आपको पता है एशिया का सबसे शिक्षित गांव भारत के ही एक राज्य में मौजूद है। क्या आप अंदाजा लगा सकते हैं कि भारत में वह गांव किस राज्य में है? क्या वह गांव केरल में है? या तमिलनाडू में, या फिर बिहार में...?

जी नहीं, भारत ही नहीं बल्कि एशिया का सबसे शिक्षित गांव उत्तर प्रदेश में मौजूद है। उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले में स्थित धौर्रा माफी गांव को सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि एशिया के सबसे अधिक साक्षर गांव के तौर पर चुना गया है। इस गांव का साक्षरता दर 80% से ज्यादा है। जिस कारण इसे 'लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स' में स्थान तो मिला ही है, साथ ही 'गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स' के लिए प्रस्तावित किया गया है। इस उपलब्धि को प्राप्त कर इस गांव और यहां रहने वाले लोगों का सिर गर्व से ऊंचा हो गया है। गांव के लोगों को उम्मीद है कि जल्द ही इस गांव प्रशासन की तरफ से 'स्मार्ट विलेज' का खिताब भी प्रदान किया जाएगा।

पूर्व में एक स्वतंत्र गांव रहा धौर्रा माफी, साल 2018 में अलीगढ़ जिले में शामिल हो चुका है। यह गांव अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के पास ही स्थित है। गांव की आबादी करीब 18,000 से 20,000 है। उत्तर प्रदेश का एक ग्रामीण इलाका होने के बावजूद धौर्रा माफी गांव का विकास देखने लायक है। यहां बिजली और पानी की आपूर्ति दिन भर बनी रहती है। अपने विकास कार्यों की वजह से ही इस गांव को भारत में एक एडवांस्ड गांव के तौर पर भी पहचान मिली हुई है। सिर्फ अपनी साक्षरता की वजह से ही नहीं बल्कि साम्प्रदायिक सद्भावना की वजह से भी यह गांव सुर्खियों में छाया रहता है। गांव में मुस्लिम और गैर-मुस्लिम समुदाय के लोग एक-दूसरे के साथ इतने घुल-मिलकर और प्यार से रहते हैं कि कभी ऐसा लगता ही नहीं है वहां एक नहीं बल्कि विभिन्न जाति व धर्म के लोग साथ में रहा करते हैं।

इस गांव को देशव्यापी लोकप्रियता तब मिली जब सदी के महानायक अमिताभ बच्चन ने अपने क्विज शो 'कौन बनेगा करोड़पति' में पूछा था, 'भारत का सबसे साक्षर गांव कौन सा है?'। साल 2002 में धौर्रा माफी गांव ने भारत के सबसे साक्षर गांव के तौर पर लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में अपना नाम दर्ज करवाया था। इस गांव में कई नामी-गिरामी लोग हुए, जिनमें वैज्ञानिक, डॉक्टर, इंजीनियर, प्रोफेसर और IAS अधिकारी भी शामिल हैं। धौर्रा माफी गांव के कई लोगों ने सरकारी नौकरियां प्राप्त की तो कई विदेशों में सेट्ल हो चुके हैं।
इससे ही पता चलता है कि धौर्रा माफी गांव में मेधा की कोई कमी नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस गांव के पास ही मौजूद अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी ने महिला और पुरुषों को समान शिक्षा प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी है। जानकारी के मुताबिक अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के पूर्व वीसी फैज़ मुस्तफा, डॉ. शादाब बानो, डॉ. नाइमा गुर्रेज और डॉ. सिराज जैसे कई IAS अधिकारी धौर्रा माफी गांव के ही रहने वाले हैं।
धौर्रा माफी गांव के पूर्व ग्रामप्रधान मो. नूरुल अमीन ने इस गांव के सर्वाधिक साक्षरता के रिकॉर्ड पर गर्व की भावना व्यक्त की। हालांकि उन्होंने शिकायती लहजे में यह भी कहा कि उनका गांव एक सामान्य गांव से मॉडल स्मार्ट विलेज में बदल चुका है जो जिला व राज्य प्रशासन की नजरों में अभी तक नहीं आ पाया है।
भारत से सिर्फ धौर्रा माफी गांव ही नहीं बल्कि मेघालय का एक छोटा सा गांव भी एशिया का सबसे साफ गांव का खिताब जीतकर देश का नाम विश्व स्तर पर रोशन कर रहा है।



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