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क्या है अयोध्या की 84 कोसी परिक्रमा का इतिहास, कौन-कौन से हैं इसके विश्राम स्थल!

तीर्थ नगरी अयोध्या में आने वाले भक्तों के लिए 84 कोसी की परिक्रमा भगवान की भक्ति करने का ही एक तरीका होती है। आमतौर पर अयोध्या में तीन तरह की परिक्रमाएं की जाती हैं, जो सभी भगवान राम से जुड़ी परिक्रमाएं हैं। इनमें से 84 कोसी की परिक्रमा सबसे लंबी और सबसे कठिन भी मानी जाती है। इस परिक्रमा पथ में पूरी अयोध्या नगरी समेत आसपास के जिलों से भी कई जगहें शामिल होती हैं।

84 kosi yatra

24 दिनों की यह पूरी परिक्रमा उन सभी क्षेत्रों से होकर की जाती है, जो भगवान राम के राज्य यानी अवध से जुड़ी होती है।

कौन-कौन सी होती हैं परिक्रमाएं

अयोध्या में तीन तरह की परिक्रमाएं होती हैं और तीनों परिक्रमाएं ही भगवान राम से जुड़ी हैं।

  • 8 कोसी परिक्रमा जो लगभग 15 किमी लंबी होती है।
  • 14 कोसी परिक्रमा जो लगभग 42 किमी लंबी होती है।
  • 84 कोसी परिक्रमा जो करीब 275 किमी लंबी होती है।

इनमें से 84 कोसी परिक्रमा में अयोध्या, अंबेदकर नगर, बाराबंकी, बस्ती और गोंडा समेत कुल 5 जिले शामिल होते हैं। कहा जाता है कि जिस व्यक्ति ने 84 कोसी परिक्रमा को पूरा कर लिया, उसे 84 योनि के बंधन से मुक्ति मिल जाती है। अयोध्या की 14 कोसी परिक्रमा और इसके विश्राम स्थलों के बारे में हम फिर कभी आपको बताएंगे। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार 84 कोसी परिक्रमा की शुरुआत त्रेतयुग में हुई थी।

ayodhya full image

परिक्रमा का आयोजन रामनवमी और चैत्र पूर्णिमा के बीच होता है। सरयू नदी में स्नान करने के साथ लोग परिक्रमा करना शुरू करते हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इसी दिन राजा दशरथ द्वारा पुत्र प्राप्ति के लिए अयोध्या से 20 किमी दूर मनोरमा नदी के तट पर किये गये पुत्रेष्ठी यज्ञ की पूर्णाहूति दी गयी थी। प्रतिपदा को प्रातःकाल स्नान करके भगवान श्री राम का नाम लेकर चौरासी कोसी परिक्रमा की शुरुआत की जाती है। इसमें कई विश्राम स्थल भी होते हैं, जहां रुककर भक्त आराम करते हैं और फिर आगे बढ़ते हैं।

आमतौर पर बाकी दोनों परिक्रमाएं हर साल काफी संख्या में भक्त पूरा करते हैं लेकिन 84 कोसी की परिक्रमा को महज 100-150 लोग ही पूरा कर पाते हैं। हाल ही में उत्तर प्रदेश सरकार ने 84 कोसी परिक्रमा पथ के पूरे रास्ते में शराब बिक्री पर पूरी तरह से रोक लगा दी है।

84 कोस की वृहद् परिक्रमा में सम्पूर्ण अवध क्षेत्र होता है। वर्ष भर में यह एक बार चैत्र शुक्ल रामनवमी और पूर्णिमा के बीच प्रारम्भ होती है। भक्त मण्डली या जमात के साथ, अयोध्या माहात्म्य में वर्णित एवं निर्धारित पड़ावों पर विश्राम करते हुए लगभग एक माह में इसे करते हैं।

saryu river aarti

यात्रा के दौरान विश्राम स्थल इस प्रकार हैं -

1. रामरेख 10 मील।
2. सेरवा घाट 12 मील। यहां श्रृंगी ऋषि की गुफा दर्शनीय है।
3. गोसाईंगंज 6 मील तमसा तटा।
4. आगागंज और टिकरी के मध्य, 5 मील।
5. रामपुर भगन गांव, सूर्यकुण्ड, 5 मील ।
6. दराबगंज 6 मील। सीता कुण्ड, रामकुण्ड आदि का दर्शन।
7. देवसिया पारा 8 मील।
8. रूरूढेमा होते हुए आस्तीकन गांव 8 मील।
9. सिरसा गांव, जनमेजय कुण्ड 8 मील।
10. अमानीगंज 6 मील।
11. रूदौली 8 मील।
12. पटरंगा 12 मील।
13. घाघरा का कमियार घाट पार कर पंचवटी, 14 मील।
14. सरयू तट, जम्बू तीर्थ 5 मील।
15. बाराह क्षेत्र पचखा गांव, सरयू घाघरा संगम 12 मील। यहां बाराह भगवान एवं श्रीनरहरिदासजी की चरणापादुका दर्शनीय है।
16. वाराही देवी (उत्तरी भवानी) 10 मील।
17. रांगी 8 मील।
18. नवाबगंज 10 मील।
19. सिकन्दरपुर के मार्ग से मखौड़ा - मनोरमा 10 मील।
20. अशोक वाटिका, सीता कुण्ड 12 मील।

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