राम मंदिर के उद्घाटन में महज 23 दिनों का समय बचा हुआ है। 22 जनवरी 2024 को राम मंदिर का उद्घाटन होने के साथ श्रद्धालुओं का लगभग 500 साल पुराना इंतजार खत्म होने वाला है। अयोध्या में सिर्फ भव्य राम मंदिर का ही निर्माण नहीं किया जा रहा है बल्कि अयोध्या नगरी को ही नये अंदाज में सजाया और संवारा गया है। अयोध्या के साथ देश और दुनियाभर का परिवहन संपर्क बढ़ाने के लिए आनन-फानन में अयोध्या एयरपोर्ट तैयार किया गया।

अयोध्या के नवनिर्मित एयरपोर्ट 'महर्षि वाल्मीकि इंटरनेशन एयरपोर्ट अयोध्या धाम' का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया। वहीं अमृत भारत परियोजना के तहत अयोध्या स्टेशन को स्मार्ट रेलवे स्टेशन में परिवर्तित कर इसका लुक भी किसी एयरपोर्ट के तर्ज पर ही तैयार किया गया है। इसका उद्घाटन भी 30 दिसंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया। रेल और वायु से अयोध्या का संपर्क बढ़ाने के साथ-साथ सड़क मार्ग से भी अयोध्या को देश और राज्य के दूसरे शहरों व जिलों से जोड़ा गया है।

इसी क्रम में अयोध्या में प्रवेश करने के लिए 6 नये रास्ते बनाए गये हैं, जिनको रामायण के आधार पर ही अलग-अलग नाम दिये गये हैं। ये 6 रास्ते भगवान श्रीराम की नगरी अयोध्या को उत्तर प्रदेश के 6 अन्य जिलों और शहरों से जोड़ेगी।
कौन-कौन जिलों/शहरों से जुड़ चुका है अयोध्या
- लखनऊ
- गोंडा
- वाराणसी
- प्रयागराज
- रायबरेली
- गोरखपुर
किस जिला/शहर से अयोध्या में प्रवेश करने का कौन सा द्वार

अयोध्या को उत्तर प्रदेश के 6 अलग-अलग जिलों या शहर से जोड़ने वाली 6 मार्ग तैयार की गयी है। ये मार्ग अयोध्या का प्रवेश द्वार होंगे। इन सभी द्वारों को रामायण के आधार पर ही अलग-अलग नाम दिये गये हैं। केंद्रीय मंत्री स्मृति इरानी ने एक वीडियो साझा कर इन सभी द्वारों का नाम और वह किस शहर या जिले को अयोध्या से जोड़ेंगी, इस बारे में विस्तार से बताया है।
मिली जानकारी के अनुसार अयोध्या को लखनऊ से जोड़ने वाला रास्ता 'श्रीराम द्वार' कहलाएगा। वहीं गोंडा की तरफ से अयोध्या आने वाले भक्तों को 'लक्ष्मण द्वार' से प्रवेश करना होगा। वाराणसी से जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए अयोध्या का प्रवेश द्वार 'जटायु द्वार' कहलाएगा। प्रयागराज से अयोध्या में प्रवेश करने वाले श्रद्धालु 'भरत द्वार' से अयोध्या में प्रवेश करेंगे। अयोध्या में अगर कोई रायबरेली से आ रहा है तो वह 'गरुड़ द्वार' से प्रवेश करेगा। गोरखपुर से अयोध्या तक जाने वाले श्रद्धालुओं को 'हनुमान द्वार' से होकर जाना होगा।
प्राण प्रतिष्ठा की मूर्ति का फैसला हुआ सुरक्षित

22 जनवरी को राम मंदिर के गर्भगृह में स्थापित होने के लिए 3 मूर्तियों का निर्माण किया गया है। तीनों मूर्तियों का निर्माण पूरा हो चुका है और मीडिया रिपोर्ट्स से मिल रही जानकारी के अनुसार कौन सी मूर्ति मंदिर के गर्भगृह में स्थापित होगी, इसका फैसला भी श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने ले लिया है। हालांकि यह फैसला अभी सुरक्षित रखा गया है। राम मंदिर के ट्रस्टी युगपुरुष परमानंद के एक बयान के मुताबिक तीनों मूर्तिकारों ने बेहतरीन काम किया है। उनका परिश्रम और चिंतन लाजवाब है।
राम मंदिर में रामलला की 1 ही मूर्ति स्थापित होगी। बाकी की दो मूर्तियों का क्या होगा? जानने के लिए NativePlanet का यह आर्टिकल जरूर पढ़े :
तीनों मूर्तियों में ही रामलला की बाल सुलभ कोमलता झलक रही है। मूर्तियों का निर्माण निर्धारित मानकों के आधार पर ही किया गया है। जो निम्न हैं :-
- मूर्ति की कुल ऊंचाई 52 इंच हो।
- श्रीराम की भुजाएं घुटनों तक लंबी हो।
- मस्तक सुंदर, आंखें बड़ी और ललाट भव्य हो।
- कमल दल पर खड़ी मुद्रा में मूर्ति होनी चाहिए।
- हाथ में तीर व धनुष हो।
- मूर्ति के चेहरे पर 5 साल के बच्चे की बाल सुलभ कोमलता झलकनी चाहिए।



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