इस साल दिवाली के समय भगवान श्रीराम की नगरी अयोध्या 22.23 लाख मिट्टी के दीयों से जगमगायी थी। इसके साथ अपना ही पिछला रिकॉर्ड तोड़ते हुए अयोध्या ने दीपोत्सव पर इस साल फिर से गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में अपना दर्ज करवाया है। अब रामोत्सव में एक बार फिर से अयोध्या अपने नाम एक नया विश्व रिकॉर्ड दर्ज करवाने की तैयारी कर रहा है। लेकिन जरा रुकिए...रामोत्सव होता क्या है? यह कब मनाया जाता है?

रामोत्सव कोई पुराना पर्व या त्योहार नहीं बल्कि अगले साल अयोध्या के राम मंदिर में रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा के उपलक्ष्य में पूरे उत्तर प्रदेश में मनाया जाने वाला एक उत्सव है।
चलिए रामोत्सव और नये विश्व रिकॉर्ड के बारे में विस्तार से बताते हैं :-
क्या है रामोत्सव
रामोत्सव अगले साल यानी 2024 के जनवरी माह में उत्तर प्रदेश की राज्य सरकार द्वारा राज्य भर में मनाया जाएगा। इसे राज्य के सभी 75 जिलों में बड़े पैमाने पर मानने की तैयारियां चल रही हैं। रामोत्सव की शुरुआत मकर संक्रांति के समय यानी 14/15 जनवरी को होगी और इसका समापन राम मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के साथ यानी 22 जनवरी को होगी। राज्य का पर्यटन और सांस्कृतिक विभाग 75 जिलों के उन मंदिरों की सूची तैयार करने में अभी व्यस्त है, जहां विभिन्न प्रकार के धार्मिक अनुष्ठान जैसे रामचरितमानस का पाठ, रामायण का पाठ, हनुमान चालिसा का पाठ व अन्य आयोजित किया जाएगा।

उत्तर प्रदेश सरकार रामलला की प्राण प्रतिष्ठा को वैश्विक मंच पर भारतीय संस्कृति को दर्शाने के एक माध्यम के तौर पर उभारना चाहती है। पर्यटन विभाग के मुख्य सचिव मुकेश मेशराम ने इस बात की पुष्टि करते हुए कहा कि हम उन सभी मंदिरों की सूची तैयार कर रहे हैं जहां धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा।
बता दें, मकर संक्रांति का त्योहार सूर्य के उत्तरायण से दक्षिणायन होने व सर्दियों के खत्म होने के प्रतिक के रूप में मनाया जाता है। बिहार, उत्तर प्रदेश और झारखंड के अधिकांश हिस्सों में इसे खिचड़ी या दही-चुड़ा के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन मुख्य रूप से खिचड़ी, दही-चिवड़ा, चिवड़ा/मुढ़ी/तिल से बनी लाई आदि खाना शुभ माना जाता है।
कौन सा विश्व रिकॉर्ड बनेगा

हाल ही में अयोध्या में सरयू नदी के तट पर दीपोत्सव पर 22.23 लाख मिट्टी के दीए जलाकर अयोध्या ने अपना ही पुराना विश्व रिकॉर्ड तोड़ते हुए इस साल फिर से गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज करवाया है। अब राम जन्मभूमि पर रामोत्सव के समय एक बार फिर से एक नया विश्व रिकॉर्ड बनाने की तैयारियां की जा रही है। जी नहीं, इस बार फिर से दीये नहीं जलाए जाएंगे।
बल्कि अयोध्या में 1,111 शंखों का वादन कर विश्व कीर्तिमान स्थापित करने का प्लान बनाया गया है। इसके साथ ही ड्रोन शो और 2500 महिलाओं द्वारा तलवार रास कार्यक्रम भी आयोजित किया जाएगा। उत्तर प्रदेश राज्य ललित कला अकादमी ख्याति प्राप्त चित्रकारों द्वारा भगवान श्रीराम के आदर्श स्वरूपों को दर्शाने वाली 108 चित्रों का चित्रांकण करवाएगी।
निकाली जाएगा चरण पादुका यात्रा
रामोत्सव के दौरान श्रृंखलाबद्ध तरीके से जिन कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा उनमें अवधेशानंद जी महाराज, मोरारी बापू, रामभद्राचार्य, जया किशोरी और देवी चित्रलेखा सहित अन्य कथावाचकों द्वारा रामकथा का वाचन किया जाएगा। भजन संध्या में अनूप जलोटा, अनुराधा पौडवाल, हरिहरन, शंकर महादेवन, कैलाश खेर, सोनू निगम और ए.आर. रहमान जैसे दिग्गज अपनी प्रस्तुतियां देंगे।
उत्तर प्रदेश के 826 स्थानीय निकायों के मंदिरों से राम पादुका यात्रा निकाली जाएगी। उत्तर से लेकर दक्षिण भारत को जोड़ते हुए यह यात्रा श्रीराम के वनवास के प्रतिक स्वरूप राम वन गमन पथ से ही आगे बढ़ेगी। गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने 'रामोत्सव' के लिए ₹100 करोड़ आवंटित किया है।

अयोध्या के राम मंदिर में रामलला की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा समारोह का आयोजन 22 जनवरी 2024 को किया जाएगा, जिसमें स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शामिल होंगे। मंदिर प्रशासन की तरफ से रामलला की प्राण प्रतिष्ठा का निमंत्रण पत्र वितरित करने का काम भी शुरू हो चुका है। राम मंदिर के उद्घाटन में योगी सरकार सिर्फ देश ही नहीं बल्कि दुनिया भर को एक सूत्र में बांधने के लिए प्रयासरत है।
इस समारोह के लिए महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा, कर्नाटक, सिक्किम, केरल, छत्तीसगढ़, जम्मू कश्मीर और लद्दाख से रामलीला मंडलियों को आमंत्रित किया ही गयी है। साथ में नेपाल, कंबोडिया, सिंगापुर, थाईलैंड, इंडोनेशिया से तो रामलीला मंडलियों को भी आमंत्रित किया गया है।



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