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अयोध्या का राम मंदिर : उद्घाटन से पहले जानें 10 रोचक बातें, जो आपको नहीं थी पता

22 जनवरी को राम मंदिर का उद्घाटन होने वाला है। मंदिर के गर्भगृह में रामलला की मूर्ति में प्राण प्रतिष्ठा होगी। दुनिया भर से लोगों को इस समारोह में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया है और मेहमानों के अयोध्या पहुंचने का सिलसिला भी शुरू हो चुका है। भूतल में रामलला की स्थापना के बाद ही प्रथम तल और राम मंदिर के बाकी निर्माण कार्यों में तेजी लायी जाएगी।

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राम मंदिर के उद्घाटन से पहले हम आपको 10 ऐसी रोचक जानकारियां दे रहे हैं, जो इस मंदिर को कई मायनों में अलग बनाती हैं।

1. भारत का सबसे बड़ा मंदिर

अयोध्या का राम मंदिर भारत का सबसे विशाल मंदिर है। मंदिर का नक्शा तैयार करने वाले सोमपुरा परिवार की तरफ से बताया गया कि 30 साल ही पहले चंद्रकांत सोमपुरा और उनके बेटे आशिष सोमपुरा ने इस मंदिर का नक्शा तैयार कर लिया था। इस मंदिर की कुल ऊंचाई करीब 161 फीट होगी, जो लगभग 28,000 वर्गफीट के क्षेत्र में फैला होगा।

2. मंदिर के वास्तुकार

राम मंदिर के वास्तुकला एक ऐसे वास्तुकार परिवार ने तैयार किया है जिसने दुनियाभर में 100 से अधिक मंदिरों की वास्तुकला तैयार की है। इनमें गुजरात का सोमनाथ मंदिर भी शामिल है। राम मंदिर के मुख्य वास्तुकार चंद्रकांत सोमपुरा हैं, जिन्होंने 30 साल पहले जब अयोध्या में राम मंदिर बनेगा इसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी, उस समय तत्कालिन विवादित भूमि का दौरा किया था और मंदिर का नक्शा तैयार किया था। इस काम में उनके दोनों बेटों आशिष और नीखिल ने उनकी मदद की है।

3. राम मंदिर की नींव

किसी भी दूसरे मंदिरों की तुलना में राम मंदिर की नींव भी काफी खास है। मिली जानकारी के अनुसार राम मंदिर की नींव में करीब 2587 पवित्र जगहों से लायी गयी मिट्टी मिलायी गयी है। इनमें झांसी, बिठुरी, हल्दीघाटी, यमुनोत्री, चित्तौरगढ़, स्वर्ण मंदिर आदि शामिल है।

ayodhya ram mandir campas

4. श्रीराम नाम के ईंट

राम मंदिर के निर्माण में जितनी भी ईंटों का इस्तेमाल किया गया है, हर ईंट पर भगवान श्रीराम का नाम लिखा गया है। ठीक उसी तरह से जैसे लंका जाने के लिए समुद्र पर बनाये गये सेतु समुद्रम में भगवान राम का नाम लिखे पत्थर भी तैरने लगे थे।

5. स्टील या लोहे का नहीं हुआ उपयोग

रिपोर्ट्स के मुताबिक राम मंदिर का निर्माण पूरी तरह से पत्थरों से किया गया है। इसके निर्माण में स्टील या लोहे का कोई उपयोग नहीं हुआ है। पत्थरों को जोड़ने के लिए सीमेंट नहीं बल्कि पुरानी वास्तुशिल्प का उपयोग किया गया है।

6. थाईलैंड से आयी मिट्टी

22 जनवरी को जब राम मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा का अनुष्ठान होगा, उस समय थाईलैंड से भेजी गयी पवित्र मिट्टी का इस्तेमाल भी किया जाएगा। दरअसल, थाईलैंड में भी रामायण और भगवान राम को काफी अधिक महत्व दिया जाता है।

golden door of ram mandir

7. राम मंदिर की खासियतें

तीन मंजीला राम मंदिर का निर्माण 2.7 एकड़ के क्षेत्र में किया गया है। भूतल में रामलला को स्थापित किया जा रहा है तो प्रथम तल में राम दरबार बनाया जाएगा। राम मंदिर के लिए राजस्थान के भरतपुर से गुलाबी बलुआ पत्थर लाये गये हैं। मंदिर 360 फीट लंबी, 235 फीट चौड़ी और 161 फीट ऊंची होगी। मंदिर में 14 गेट और 5 शिखर होंगे।

8. पवित्र नदियों का जल

5 अगस्त 2020 को जब राम मंदिर की नींव के लिए भूमिपूजन हुआ था उसमें देशभर के 150 पवित्र नदियों का जल का उपयोग किया गया था। यह जल देश के अलग-अलग कोने से इकट्ठा किया गया था।

9. टाइम कैप्सूल

राम मंदिर की नींव में करीब 200 फीट की गहराई में तांबे से बने कैप्सूलनुमा टाइम कैप्सूल को रखा गया है जिसमें भगवान राम, अयोध्या और राम मंदिर को लेकर हुए संघर्ष की पूरी कहानी का वर्णन किया गया है। भविष्य की पीढ़ी को राम मंदिर और भगवान राम के महत्व की जानकारी देने के लिए ही इसे नींव में रखा गया है।

lord ram lakshman and sita

10. नागर शैली की वास्तुकला

राम मंदिर का निर्माण पूरी तरह से नागर शैली के आधार पर किया गया है। मंदिर में करीब 360 खंभे बनाये गये हैं। प्रत्येक खंभे पर भगवान की मूर्ति को उकेरी गयी है। राम मंदिर को किसी मास्टरपीस की तरह तैयार किया जा रहा है जो हजारों साल बाद भी लोगों को सुकून प्रदान करेगा।

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