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» »1600 वीं शताब्दी में ब्रिटिश घुमक्कड़ विलियम फिंच ने अयोध्‍या पर क्या लिखा था?

1600 वीं शताब्दी में ब्रिटिश घुमक्कड़ विलियम फिंच ने अयोध्‍या पर क्या लिखा था?

पुरातात्विक सबूतों से यह साबित हो चुका है कि वर्तमान समय में अयोध्या में जहां भगवान श्रीराम का मंदिर बनाया गया है, 12वीं सदी में उस स्थान पर एक भव्य और विशालकाय मंदिर हुआ करता था। लेकिन पुराने उस मंदिर और नये भव्य राम मंदिर के बीच का समय विवादों से घिरा रहा। विवादों के सारे बादल छंटने के बाद अब एक भव्य मंदिर एक बार फिर इसी जगह पर बन चुका है, जहां 22 जनवरी को राम लला की मूर्ति की प्राण प्रतिष्‍ठा की जाएगी।

ayodhya ancient temple

अयोध्या की विवादित भूमि को लेकर कहा गया कि बाबर के सिपहसलार मीर बाकी ने भव्य मंदिर को तोड़कर यहां तीन गुंबदों वाले एक मस्जिद का निर्माण करवाया था। जिसका नाम उसने अपने बादशाह के नाम पर बाबरी मस्जिद रखा। अयोध्या को लेकर काफी शोध किये गये हैं और इसका इतिहास सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि देश की सीमाओं के बाहर दूसरे देशों में भी दर्ज है।

डॉ. आर. एम. एल अवध यूनिवर्सिटी, फैजाबाद के शोधार्थी डॉ. प्रेमनाथ पाण्डेय ने अपने शोध में ब्रिटिश यात्री विलियम फेंच का उल्लेख किया है। विलियम फेंच ने अपनी किताब में अवध (अयोध्या) में एक महल का उल्लेख किया है। अपने शोध में उन्होंने अयोध्या से होकर बहने वाली नदी (सरयू) के बारे में भी बताया है।

शोध के मुताबिक विलियम फिंच (मृत्यु 1613) ईस्ट इंडिया कंपनी (ईआईसी) की सेवा में एक अंग्रेजी व्यापारी थे। उन्होंने मुगल सम्राट जहांगीर के शासनकाल के दौरान कैप्टन हॉकिन्स के साथ भारत की यात्रा की। उन दोनों ने मुगल दरबार में सम्राट से मुलाकात की और इंग्लैंड और भारत के बीच व्यापारिक संबंध स्थापित किए। फिंच ने बाद में भारत के विभिन्न शहरों की खोज की और अपनी पत्रिका में उनका एक मूल्यवान विवरण छोड़ दिया, जिसे बाद में प्रकाशित किया गया। ब्रिटिश अभिलेखागार में उनकी एक किताब आज भी है जिसका नाम है 'पिलग्रीम्स'।

फिंच ने अपनी पुस्तक में किसी जन्मस्थान का वर्णन नहीं किया या क्षेत्र में मस्जिद का उल्लेख नहीं किया। उन्होंने उन खंडहरों का उल्लेख किया जिन्हें राम का महल और घर माना जाता था। फिंच के अनुसार महल चार सौ साल पुराना था। जिस स्थान का वर्णन फिंच ने अपनी पुस्तक में किया आज वहीं पर राम मंदिर बन कर खड़ा हो गया है और 22 तारीख को रामलला की मूर्ति की स्थापना की जाएगी।

विलियम फिंच ने लिखा है कि अवध (अयोध्या) एक प्राचीन नगर है जो एक पठान राजा की राजधानी है और इस समय खण्डहर हो गई है। यहाँ पर रामीचन्द्र (रामचन्द्र) का किला और महल भी खण्डहर के रूप में वर्तमान है। इसको भारतीय बड़ा देवता मानते हैं और कहते हैं कि उन्होंने यहाँ अवतार लिया था। यहाँ पर कुछ ब्राह्मण रहते हैं जो पास की नदी (सरयू) में स्नान करने वाले सभी यात्रीयों के नाम लिखते हैं। उनके अनुसार यह प्रथा चार लाख सालों से चली आ रही है। 1766 से 1771 ई. तक अवध में रहने वाले आस्ट्रिया के एक जेसुइट पादरी टीफीन्थेलर ने अपने संस्मरण में भारत के इतिहास और भूगोल का विवरण फेन्च में दिया है जिसका अंग्रेजी में भी अनुवाद हुआ है।

ayodhya ancient ram mandir

पादरी टीफेन्थेलर ने अपने संस्मरण में लिखा कि बाबर ने राम-जन्मस्थान पर स्थित मन्दिर को नष्ट करके उसके खंभों का उपयोग करते हुए एक मस्जिद बना दी। लेकिन हिन्दुओं ने उस स्थान पर अपना अधिकार छोड़ने से इन्कार कर दिया। मुगलों द्वारा उनको रोकने के प्रयासों के बावजूद वे इस स्थान पर पूजा के लिए आते रहे। मस्जिद के प्रांगण में ही उन्होंने एक राम चबूतरा बना लिया था जिसकी तीन बार प्रदक्षिणा करने के बाद वे भूमि पर साष्टांग प्रणाम किया करते हैं। वे चबूतरा और मस्जिद में पूजा करते हैं। इससे भी अधिक प्रसिद्ध स्थल सीता की रसोई है जो राम की पत्नी थीं। यह शहर के पास एक ऊँचे टीले के बीच में है।

पादरी ने अपने संस्मरण में आगे लिखा सम्राट औरंगजेब ने रामकोट किले को ध्वस्त करके उसी स्थान पर तीन गुम्बदों वाला एक मुसलमानी पूजा-स्थल निर्मित कराया। कुछ लोगों का कहना है कि इसे बाबर ने बनवाया था। यहां लगे पाँच हाथ ऊँचे काले पत्थरों से बने उन चौदह स्तम्भों को कोई भी देख सकता है। इनमें से 12 स्तम्भ तो मस्जिद के अन्दर मेहराबों को संभालने के लिए लगे है। कहा जाता है कि स्तम्भों के ये टुकड़े जिन पर कलाकारों ने नक्काशी की हुई है, बन्दरों के राजा हनुमान द्वारा लंका, जिसे यूरोप के लोग सिलोन (श्रीलंका का पुराना नाम) कहते हैं, से लाए गए थे।

इसके बाई तरफ पाँच इंच ऊँचा एक चबूतरा है जो चूना पत्थर से आच्छादित है। हिन्दू इसको वेदी कहते हैं। इसका कारण यह है कि यहाँ पर विष्णु ने राम के रूप में जन्म लिया था और यहीं उनके तीन भाई भी पैदा हुए थे। बाद में औरंगजेब, कुछ कहते हैं बाबर, ने इसको नष्ट कर दिया जिससे हिंदूओं को यहां पर अपने उत्सव मनाने से रोका जा सके। फिर भी वे इन दोनों ही स्थानों पर राम का जन्मस्थान मानकर तीन बार इस स्थान की प्रदक्षिणा करके, फिर भूमि पर दण्डवत् प्रणाम करके पूजा जाते हैं। ये दोनों ही स्थान चारदीवारी से घिरे है।

ayodhya present temple construction

यहां दी गयी सभी जानकारियां फैजाबाद यूनिवर्सिटी में हुए शोधकार्यों के आधार पर ही दी गयी है। लंबे समय तक रामजन्मभूमि को लेकर विवाद चलते रहे और इस दौरान विवाद ने कई बार हिंसात्मक संघर्षों का भी आकार ले लिया था। आखिरकार सबुतों के आधार पर कोर्ट ने विवादित भूमि को भगवान श्रीराम की जन्मभूमि करार देते हुए इस पर मंदिर बनाने का फैसला सुनाया था।

लेकिन मुसलिम पक्ष की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए ही अयोध्या में राम मंदिर से 25 किमी दूर धनीपुर में मस्जिद निर्माण के लिए जमीन देने का फैसला सुनाया। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर का उद्घाटन समारोह शुरू हो चुका है और 22 जनवरी को मंदिर के भूतल के गर्भगृह में रामलला की मूर्ति स्थापित कर दी जाएगी।

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