महज 19 दिनों का इंतजार...उसके बाद नवनिर्मित भव्य राम मंदिर में दिव्य रामलला की मूर्ति की स्थापना होगी। कहा जाता है कि रामलला को जन्मभूमि में स्थापना के लिए करीब 500 सालों का इंतजार करना पड़ा है। लेकिन स्थापना का इंतजार सिर्फ रामलला को ही नहीं, बल्कि अयोध्या के ही एक अन्य मंदिर में भी भगवान राम को करना पड़ा था। करीब 220 सालों तक सरयू नदी में डूबे रहने के बाद आखिरकार उनकी स्थापना मंदिर में की जा सकी थी।

अब तक तो आप समझ ही चुके होंगे कि हम अयोध्या के किस मंदिर के बारे में बात कर रहे हैं। नहीं समझे...चलिए थोड़ा Hint और देते हैं। यह 2000 साल पुराना भगवान श्रीराम का मंदिर है। अब समझ गये न...जी हां, हम अयोध्या के श्रीकाले राम मंदिर के बारे में ही बात कर रहे हैं। श्रीकाले राम मंदिर के बारे में कहा जाता है कि इस मंदिर में दर्शन किये बिना अयोध्या की यात्रा को सम्पूर्ण नहीं माना जाता है।
आइए अयोध्या के श्रीकाले राम मंदिर का इतिहास और विशेषताएं बताते हैं :-
कब हुई स्थापना
अयोध्या के श्रीकाले राम मंदिर की स्थापना करीब 2000 साल पूर्व महाराज विक्रमादित्य ने की थी। इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता है कि यहां भगवान श्रीराम अपने सभी भाईयों, भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न समेत विराजमान हैं। चारों भाईयों की मूर्तियों का निर्माण काले रंग के शालिग्राम शिलाओं से किया गया है। महाराज विक्रमादित्य ने इन मूर्तियों को श्रीराम जन्मभूमि पर स्थापित किया था।

लगभग 1500 सालों तक ये मूर्तियां श्रीराम जन्मभूमि पर ही स्थापित रही। मिली जानकारी के अनुसार वर्ष 1528 बाबर ने जब अयोध्या पर आक्रमण किया तो मुगलों से बचाने के लिए मंदिर के तत्कालिन पुजारी और संत श्यामानंद सरस्वती ने मूर्तियों को सरयू नदी में प्रवाहित कर दिया।
220 सालों तक सरयू में डूबी रही मूर्तियां
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार वर्ष 1748 में महाराष्ट्र का एक ब्राह्मण जो सरयू नदी के तट पर तपस्या कर रहा था, उसे एक दिन सपने में भगवान श्रीराम ने दर्शन दिये और इन मूर्तियों के सरयू नदी में डूबे रहने के बारे में बताया। साथ में उन्हें भगवान का आदेश भी मिला कि मूर्तियों की स्थापना की जाए।
ब्राह्मण जैसे ही नदी में स्नान करने गये तो उन्हें सभी मूर्तियां मिल गयी। इस बीच 220 सालों का लंबा समय बीच चुका था। जैसे ही मूर्तियां उन्हें मिली, उनके मुंह से बरबस निकल पड़ा, "काले राम जी मिल गये।" कहा जाता है कि उसके बाद से ही इस मंदिर में भगवान श्रीराम को श्रीकाले राम के नाम से जाना जाने लगा।

श्रीराम मंत्र किया गया है स्थापित
श्रीकाले राम जी मंदिर में भगवान श्रीराम के मंत्र 'श्रीराम जय राम, जय जय राम' को 13 करोड़ बार लिख कर स्थापित किया गया है। इसके साथ ही मंदिर में 18 पुराण, चारों वेद, गीता, रामायण आदि सभी धार्मिक पुस्तकों को स्थापित किया गया है। मान्यता है कि अगर कोई भी श्रद्धालु इन पुस्तकों व श्रीराम मंत्र की परिक्रमा करता है, तो उसे सभी पापों से मुक्ति मिल जाती है।
बता दें, श्रीकाले राम मंदिर अयोध्या के 7 प्रमुख स्थानों में से एक माना जाता है। अयोध्या में राम मंदिर की स्थापना का समय जैसे-जैसे नजदीक आ रहा है यहां की ऐतिहासिक धरोहर श्रीकाले राम मंदिर में दर्शन व परिक्रमा के लिए आने वाले भक्तों की संख्या दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है।

कब खुलता है मंदिर का पट
सर्दियों और गर्मियों के मौसम में अयोध्या के श्रीकाले राम मंदिर का समय भी अलग-अलग होता है। जानकारी के मुताबिक सर्दियों के मौसम में मंदिर के पट सुबह 5:00 से 11:30 तक और शाम 4:30 बजे से रात 8:30 बजे तक खुला रहता है। सुबह की आरती 6:30 बजे और शाम को 8:30 बजे होती है, जिसके बाद मंदिर के कपाट को बंद कर दिया जाता है।
वहीं गर्मियों के समय में मंदिर के कपाट सुबह 4:30 बजे से 11:30 बजे तक और शाम 4:30 बजे से 7:00 बजे तक खुले रहते हैं। बताया जाता है कि आरती के समय में कोई परिवर्तन नहीं होता है। यह मंदिर अयोध्या में राम की पैड़ी के पास स्थित है।



Click it and Unblock the Notifications














