• Follow NativePlanet
Share
» »भानगढ़ : किला जहां सूरज ढलते ही शुरू होता है रूहों, भूत प्रेतों का आतंक

भानगढ़ : किला जहां सूरज ढलते ही शुरू होता है रूहों, भूत प्रेतों का आतंक

Posted By: SyedBelal

जी हां बिलकुल सही सुना आपने, हिंदुस्तान को हमेशा से ही रहस्यों , आलौकिक शक्तियों, तंत्रविद्या का देश कहा गया है। जब बात तंत्र विद्या की हो और ऐसे में हम भूत प्रेतों का ज़िक्र न करें तो फिर कहे गए शब्द एक हद तक अधूरे लगते हैं। लेकिन आगे बढ़ने से पहले चंद सवाल। हम लोगों में से कितने ऐसे हैं जो ये मानते और विश्वास करते हैं कि आज भी इस दुनिया में बुरी आत्माओं और भूतों का अस्तित्त्व है? क्या हम किसी भी माध्यम से भूतों से मिल सकते हैं? क्या हम उन्हें देख सकते हैं, उन्हें महसूस कर सकते हैं? सूर्य देव का वो मंदिर जिसको आज भी है अपनी पूजा का इंतेजार

हम में से बहुत से ऐसे होंगे जो अवश्य ही इन बातों पर न कहेंगे वहीँ दूसरी तरफ बहुत से ऐसे भी होंगे जिनका ये मानना होगा कि धरती पर जहां एक तरफ जीवित लोग हैं तो वहीँ मृत्य आत्माओं का भी वास है। बहरहाल आज हम आपको हिन्दुस्तान के उस किले के बारे में बताएंगे जिस का सिर्फ नाम सुनकर ही बड़े बड़े दिलेरों के डर के मारे पसीने छूट जाते हैं।

ये किला है राजस्थान के अलवर जिले में स्थित भानगढ़ का किला । अगर यहां के स्थानीय लोगों की माने तो यहां आने के बाद पर्यटक आज भी एक अलग तरह के डर और बेचैनी का अनुभव करते हैं।

भारत के 10 शानदार और बेहद खूबसूरत हाईवे

भानगढ़ किला देखने में जितना शानदार है उसका अतीत उतना ही भयानक है। ये किला उनके लिए है जो रोमांच के शौक़ीन है और डर पर अपनी जीत दर्ज करना जानते हैं। अगर आप डर को जीतने का साहस रखते हैं तो एक बार जरूर यहाँ जाएं।

किले का इतिहास

किले का इतिहास

यह किला अम्बेर के महान मुगल सेनापति,मान सिंह के बेटे माधो सिंह द्वारा 1613 में बनवाया गया था। राजा माधो सिंह अकबर की सेना के जनरल थे। ये किला जितना शानदार है उतना ही विशाल भी है, वर्तमान में ये किला एक खंडहर में तब्दील हो गया है।

किले में प्राकृतिक झरने, जलप्रपात, उद्यान, हवेलियां और बरगद के पेड़ इस किले की गरिमा को और भी अधिक बढ़ाते हैं। साथ ही भगवान सोमेश्वर, गोपीनाथ, मंगला देवी और केशव राय के मंदिर धर्म की दृष्टि से भी इसे महत्त्वपूर्ण बनाते हैं।

किले के इतिहास को बयां करती एक खौफनाक कहानी

किले के इतिहास को बयां करती एक खौफनाक कहानी

भानगढ़ की राजकुमारी रत्‍नावती जो बेहद खुबसुरत थी और उनके रूप की चर्चा पूरे राज्‍य में थी वो एक तांत्रिक की मौत का कारण बनी क्योंकि तांत्रिक राजकुमारी से विवाह करना चाहता था।

राजकुमारी से विवाह न होने के कारण उसने अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। मरने से पहले भानगढ़ को तांत्रिक से ये श्राप मिला क‍ि इस किले में रहने वालें सभी लोग जल्‍द ही मर जायेंगे और ताउम्र उनकी आत्‍माएं इस किले में भटकती रहेंगी।

उस तांत्रिक के मौत के कुछ दिनों बाद ही भानगढ़ और अजबगढ़ के बीच जंग हुई जिसमें किले में रहने वाले सारे लोग मारे गये। यहां तक की राजकुमारी रत्‍नावती भी उस श्राप से नहीं बच सकी और उनकी भी मौत हो गयी। तब से लेकर आज तक इस किले में रूहों ने अपना डेरा जमा रखा है।

भानगढ़ के बारे में एक अन्य मिथक

भानगढ़ के बारे में एक अन्य मिथक

भानगढ़ के सम्बन्ध में एक अन्य कहानी ये भी है क‍ि यहाँ एक तपस्वी बाबा बालानाथ और राजा अजब सिंह के बीच किसी बात को लेकर एक समझौता हुआ था, जिसे बाद में राजा ने नहीं माना और बाबा ने उसे श्राप दे दिया की इस किले में कोई भी जीवित नहीं रहेगा और जो यहां आयगा वो मार जायगा।

तब से लेकर आज तक ये किला यूं ही वीरान पड़ा है और आज भी इसमें भूत हैं। लोगों का मानना है कि यही कारण था कि किले को इसके निर्माण के तुरन्त बाद ही छोड़ दिया गया था, और शहर प्रेतवाधित होने की वजह से सुनसान हो गया।

अब कौन करता है किले की हिफाज़त

अब कौन करता है किले की हिफाज़त

फिलहाल इस किले की देख रेख भारत सरकार द्वारा की जाती है। किले के चारों तरफ आर्कियोंलाजिकल सर्वे आफ इंडिया (एएसआई) की टीम मौजूद रहती हैं।

 आज भी सुनाई देती हैं तलवार और चीखों की आवाज़

आज भी सुनाई देती हैं तलवार और चीखों की आवाज़

इस किले में आज भी आने वालों को तलवारों की आवाज और लोगों की चींखें सुनाई देती है। इसके अलांवा किले के भीतर कमरों में महिलाओं के रोने या फिर चूड़ियों के खनकने की भी आवाजें साफ सुनाई देती हैं। किले के पिछले हिस्‍सें में एक छोटा सा दरवाजा है जिसके पास बहुत अंधेरा रहता है। कई बार वहां किसी के बात करने की आवाज या एक विशेष प्रकार की गंध को भी लोगों ने महसूस किया है।

एएसआई भी बोल उठी यहां शाम के बाद मत आना

एएसआई भी बोल उठी यहां शाम के बाद मत आना

एएसआई ने सख्‍त हिदायत दे रखी है कि सूर्यास्‍त के बाद इस इलाके में कोई भी व्‍यक्ति न रुके। यहां तक की ये भी कहा जाता है क‍ि इस किले में सूर्यास्‍त के बाद जो भी गया वो फिर कभी भी वापस नहीं आया। ये तक कहा गया है की यहां आने वालों को कई बार रूहों द्वारा परेशान किया गया है और कुछ लोगों को अपनी जान तक से हाथ धोना पड़ा है।

भगवान हनुमान को समर्पित हनुमान मंदिर

भगवान हनुमान को समर्पित हनुमान मंदिर

भानगढ़ जाने वाले पास के ही हनुमान मंदिर अवश्य जाएं। पौराणिक मान्यता है कि कभी कोई यहां से खाली हाथ नहीं गया और श्री राम भक्त हनुमान आने वाले फरयादियों की सभी मनोकामना पूरी करते हैं।

डर को बयां करती दास्तां

डर को बयां करती दास्तां

अब इसे अंधविश्वास कहें या कुछ और यहां आज तक जो भी आया है उसे न जाने क्यों एक अजीब से दर की अनुभूति होती है जैसे ही वो किले में प्रवेश करता है।

खूबसूरती के क्या कहने

खूबसूरती के क्या कहने

भले ही आज इस किले को भूतिया और वीरान कहा जाता है लेकिन अगर यहां आने वाले इसकी वास्तुकला को गौर से देखें तो उन्हें एहसास होगा कि इसकी खूबसूरती बेमिसाल है और ये किसी का भी मन मोह सकती है।

रोमांच के शौक़ीन हैं तो यहां जरूर आएं

रोमांच के शौक़ीन हैं तो यहां जरूर आएं

भानगढ़ किला देखने में जितना शानदार है उसका अतीत उतना ही भयानक है। ये किला उनके लिए है जो रोमांच के शौक़ीन है और डर पर अपनी जीत दर्ज करना जानते हैं। अगर आप डर को जीतने का साहस रखते हैं तो एक बार जरूर यहाँ जाएं।

अपने ज़माने का नायाब किला

अपने ज़माने का नायाब किला

कहा जाता है कि जिस समय इस किले का निर्माण हुआ उस समय सभी इसकी सुंदरता पर मोहित हो उठे। इस किले को बनाते वक़्त इस बात का पूरा ध्यान रखा गया था कि दुश्मनों से क्षेत्र की सम्पूर्ण सुरक्षा हो सके।

दरो दीवार बयान करते हैं कहानी

दरो दीवार बयान करते हैं कहानी

यह किला अम्बेर के महान मुगल सेनापति,मान सिंह के बेटे माधो सिंह द्वारा 1613 में बनवाया गया था। राजा माधो सिंह अकबर की सेना के जनरल थे। ये किला जितना शानदार है उतना ही विशाल भी है, वर्तमान में ये किला एक खंडहर में तब्दील हो गया है।

गलियारे में आज भी सुनाई देती हैं तलवारों की आवाज

गलियारे में आज भी सुनाई देती हैं तलवारों की आवाज

यहां आने वाले कुछ लोगों ने यहां तक कहा है कि उन्हें यहां बने गलियारों के पीछे से कई तलवारों के खनकने की आवाजें सुनाई दी हैं।

आइये मगर संभाल के

आइये मगर संभाल के

हम आपसे बस इतना ही कहेंगे आप यहां आ तो रहे हैं मगर एक बात का ध्यान रखिये यहां आने के बाद शाम से पहले ही वापस निकल जाइयेगा। क्यूंकि बुरा वक़्त बता के नहीं आता।

यात्रा पर पाएं भारी छूट, ट्रैवल स्टोरी के साथ तुरंत पाएं जरूरी टिप्स