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प्रयागराज के पास मौजूद यह हेरिटेज साइट है बुद्ध और दुष्यंत-शकुंतला से संबंधित

उत्तर प्रदेश हमेशा अपने गौरवशाली इतिहास के लिए जाना जाता है। प्रयागराज के निकट स्थित भीटा ऐसा ही एक ऐतिहासिक स्थल है, जो बौद्धकालीन पुरातत्व स्थल है। भीटा की गुफाओं का संबंध सिर्फ बौद्ध धर्म से ही नहीं बल्कि कालीदास रचित 'अभिज्ञान शकुंतलम' के दुष्यंत और शकुंतला से भी है।

Prayagraj

चलिए इस ऐतिहासिक स्थान के बारे में आपको विस्तृत जानकारी देते हैं

व्यापारिक दृष्टि से महत्वपूर्ण था भीटा

Bhita

भीटा के बारे में मिले तथ्यों के अनुसार यहां प्रागैतिहासिक काल से जुड़े अवशेष मिले हैं। संगम नगरी प्रयागराज के निकट स्थित यह स्थान व्यापारिक दृष्टिकोण से काफी महत्वपूर्ण था। भीटा की खुदाई सबसे पहले अंग्रेजों के जमाने में हुई थी। उस समय जानकारी मिली थी कि यहां 6ठवीं शताब्दी में एक समृद्ध सभ्यता थी। यह स्थान मौर्यकाल से लेकर गुप्तकाल तक काफी समृद्ध था। इतना ही नहीं यहां सीता की रसोई होने के निशान भी मिले हैं। बताया जाता है कि यहां अंग्रेजों के शासनकाल में यहां दो बार खनन का कार्य किया गया था।

ईंटों के लिए हुई खुदाई तो खुले पुरानी सभ्यता के राज

Rhino Seal Bhita

1857 में हुए सिपाही विद्रोह के बाद अंग्रेजी सरकार ने ईस्ट इंडिया रेलवे का विस्तार करने का निर्णय लिया। इसी समय प्रयागराज (तत्कालिन इलाहबाद) के घूरपुर इलाके में रेलवे ट्रैक बिछाने के लिए ईंटों की जरूरत हुई थी। इसलिए ठेकेदारों ने पास स्थित टीले की खुदाई करनी शुरू कर दी थी। उसी खुदाई में उन्हें बड़े आकार के पुरानी ईंटें मिलने लगी।

खुदाई करते हुए दिवारों के अवशेष भी मिले तो ठेकेदारों ने इसकी जानकारी तुरंत अंग्रेज अधिकारियों को दी। 1872 के दौरान इस जगह के बारे में अंग्रेजों को जानकारी मिली। उस समय एक टीले की खुदाई प्रसिद्ध पुरातत्वविद जनरल कनिंघम ने करवायी थी।

मौर्यकाल से गुप्तकाल तक की सभ्यता के मिले निशान

Bhita

भीटा में खुदाई से मौर्यकालीन विशाल ईंटें, मूर्तियां, मिट्टी की मुद्राएं और कई अभिलेख बरामद हुए। इन अभिलेखों और खुदाई में मिली वस्तुओं का अध्ययन करने से पता चला कि मौर्यकाल से लेकर गुप्तकाल तक यह क्षेत्र काफी समृद्धशाली हुआ करता था। भीटा के निकट ही स्थित गांव मानकुंवर से गौतम बुद्ध की एक सुन्दर प्रतिमा मिली। इस मूर्ति पर गुप्तवंश के सम्राठ कुमारगुप्त का एक अभिलेख भी अंकित है। भीटा में अच्छी-खासी आबादी के निवास करने के चिन्ह मिले हैं। जिससे पता चलता है कि उस समय यह काफी समृद्ध नगर हुआ करता था।

मिले दुष्यंत-शकुंतला से संबंधित चित्र

Bhita plate

1909-10 के दौरान आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया की तरफ से सर जॉन मार्शल ने दूसरे टीले खुदाई करवायी। खुदाई में मिट्टी से बना एक वर्तुल पट्ट बरामद हुआ। इस पर जो चित्र अंकित था, वह कालिदास रचित 'अभिज्ञान शकुंतलम' में दुष्यंत और शकुंतला की कथा से काफी मिलती-जुलती है। मिट्टी की बनी इस वर्तुल पट्ट में दुष्यंत और उनके सारथी कण्व को आश्रम में प्रवेश करते हुए दिखाया गया।

इस दृश्य में आश्रमवासी उनसे आश्रम के हिरण को ना मारने का अनुरोध करते और पास ही एक कुटिया के सामने एक कन्या आश्रम के पौधों को सींचती नजर आ रही है। अगर यह दृश्य वास्तव में 'अभिज्ञान शकुंतलम' से प्रेरित है तो कालिदास का समय गुप्तकाल के बजाए पहली या दूरी शती से भी काफी पहले का माना जा सकता है। हालांकि इस बात की अभी तक कोई पुष्टि नहीं हुई है।

भीटा बौद्ध विहार के नाम से था प्रसिद्ध

Sujandev temple

भीटा का नाम बौद्ध विहार के लिए भी काफी ज्यादा प्रसिद्ध था। कभी यहां बौद्ध भिक्षुओं का जमावड़ा लगा रहता था लेकिन उपेक्षित रहने के कारण अब यह जगह पूरी तरह से सुना पड़ा हुआ है। पत्थरों पर मिले भगवान बुद्ध के चित्र इस बात को प्रमाणित करते हैं कि इस स्थान का संबंध गौतम बुद्ध से भी रहा है। कहा जाता है कि किसी वर्षावास के दौरान गौतम बुद्ध भीटा में रुके थे और उन्होंने वहां अपने अनुयाइयों को प्रवचन व उपदेश भी दिया था।

इसके साथ ही यहां यमुना के किनारे सुजावन देव का मंदिर भी है, जो पर्यटकों को आज भी अपनी तरफ आकर्षित करता है। यह मंदिर भगवान शिव और यमुना को समर्पित है। कहा जाता है कि भाई दूज के समय यमराज ने अपनी बहन यमुना का हाथ पकड़कर यमुना नदी में डूबकी लगायी थी। यमुना नदी के बीच में स्थित इस मंदिर तक लोग नाव से पहुंचते हैं।

कैसे पहुंचे भीटा

भीटा प्रयागराज से 20 किमी की दूरी पर है। प्रयागराज से आपको भीटा तक के लिए प्राईवेट गाड़ियां मिल जाएंगी। प्रयागराज में खुद का कोई एयरपोर्ट नहीं है। प्रयागराज का नजदीकी एयरपोर्ट वाराणसी (147 किमी) और लखनऊ (210 किमी) है। अगर आप ट्रेन से भीटा जाना चाहते हैं तो प्रयागराज स्टेशन उतरकर आपको प्राईवेट गाड़ी या टैक्सी लेनी होगी। सड़कमार्ग से भीटा प्रयागराज, दिल्ली और कोलकाता जैसे महानगरों से सीधा जुड़ा हुआ है।

FAQs
भीटा का संबंध किस काल से है?

भीटा का मौर्यकाल से लेकर गुप्तकाल तक संबंधित होने के निशान मिले हैं। कहा जाता है कि यह स्थान व्यापारिक दृष्टिकोण से काफी महत्वपूर्ण था।

भीटा का बौद्ध धर्म से क्या संबंध है?

भीटा को एक प्राचीन बौद्ध विहार माना जाता है। कहा जाता है कि यहां एक वर्षावास के दौरान भगवान बुद्ध ठहरे थे और उन्होंने अपने अनुयाईयों को उपदेश भी दिया था। हालांकि अब यह बौद्ध विहार उपेक्षित पड़ा हुआ है।

भीटा की खुदाई में दुष्यंत-शकुंतला से संबंधित क्या मिला?

भीटा की खुदाई में मिट्टी की पट्ट पर बनी कालिदास रचित अभिज्ञान शकुंतलम का एक दृश्य मिला। इसमें दुष्यंत अपने सारथी के साथ आश्रम में प्रवेश करते और आश्रमवासी उनसे हिरण को न मारने का अनुरोध करते दिखायी दे रहे हैं। मिट्टी की इस पट्ट में एक युवती आश्रम के पौधों को सींचती नजर आ रही है। हालांकि इसकी पुष्टि नहीं हुई है।

भीटा कहां है?

भीटा प्रयागराज जिले में स्थित एक हेरिटेज साइट है। यहां अंग्रेजों के समय में 2 बार खनन का कार्य हुआ था जिसमें गौतम बुद्ध और दुष्यंत-शकुंतला से जुड़े कई निशान मिले।

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