अयोध्या में राम जन्म भूमि पर 2.7 एकड़ के क्षेत्र में 360 फीट ऊंचा और 235 फीट चौड़े राम मंदिर का भव्य निर्माण किया जा रहा है। अगले साल 22 जनवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में मंदिर का उद्घाटन और भूतल में रामलला की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा की जाएगी। लेकिन क्या आप जानते हैं, इस भव्य मंदिर का नक्शा 34 साल पहले ही तैयार किया जा चुका था। उस समय जब विवादित जमीन पर मंदिर निर्माण कब होगा, इसके बारे में किसी ने सोचा तक नहीं था। न की साल 2020 में, जब भूमि पूजन के साथ मंदिर का निर्माण कार्य शुरू हुआ।

इस भव्य मंदिर का नक्शा किसने तैयार किया था? किस वास्तुकार के नक्शे के आधार पर तीन मंजीला राम मंदिर का निर्माण अयोध्या में हो रहा है? पिछले कई सालों में अयोध्या राम जन्म भूमि पर दोनों पक्षों की दावेदारी के कारण हिंसक झड़प से लेकर कानूनी लड़ाईयों तक का साक्षी रह चुका था। तो 35 साल पहले राम मंदिर का नक्शा बनाने के बारे में सोचा किसने था?
इन सारे सवालों का जवाब है, चंद्रकांत सोमपूरा। यह वो नाम है, जो राम मंदिर के लिए भूमि पूजन, शिलान्यास या मंदिर का निर्माण शुरू होने से कई सालों पहले से ही अयोध्या के राम मंदिर से जुड़े हुए हैं। जी नहीं, इन्होंने राम मंदिर के निर्माण के लिए कोई संघर्ष नहीं किया था।

चंद्रकांत सोमपूरा एक वास्तुकार (Architect) हैं, जिन्होंने लगभग 34 साल पहले ही राम मंदिर का नक्शा तैयार कर लिया था। इनके नक्शे के आधार पर ही आज राम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर का निर्माण किया जा रहा है। हाल ही में राम मंदिर के निर्माण कार्य का जायजा लेने चंद्रकांत सोमपूरा अपनी टीम के साथ अयोध्या पहुंचे थे।
3 दशक पहले तैयार हुआ था नक्शा
राम मंदिर का नक्शा लगभग 3 दशक पहले यानी 1989 को चंद्रकांत सोमपूरा ने तैयार किया था। उस समय इस जमीन पर राम मंदिर निर्माण की एक ईंट तो दूर जमीन को पाने के लिए दोनों पक्षों के बीच हिंसक लड़ाई और कानूनी दांवपेंच चल रहे थे। इसलिए उस समय तो यह नक्शा किसी काम नहीं आया था लेकिन उसे तब संभाल कर रख दिया गया था। मिली जानकारी के अनुसार राम मंदिर का नक्शा तैयार करने के लिए विश्व हिंदू परिषद के तत्कालिन अध्यक्ष अशोक सिंघल उन्हें सबसे पहले अयोध्या लेकर गये थे।

पैरों से नापी थी जमीन
1989 को चंद्रकांत सोमपूरा द्वारा तैयार राम मंदिर के नक्शे पर, इलाहबाद (वर्तमान प्रयागराज) में आयोजित हुए कुंभ के मेले में आए साधुओं ने भी अपनी मुहर लगायी थी। मीडिया रिपोर्ट्स से मिली जानकारी के अनुसार राम मंदिर की जमीन देखने के लिए जब अशोक सिंघल के साथ चंद्रकांत सोमपूरा पहुंचे तो उन्हें जमीन नापने का फीता लेकर उक्त परिसर में प्रवेश करने नहीं दिया गया था।
फीता नहीं होने के कारण उन्होंने पैरों से ही पूरी जमीन को नाप कर अपने अनुमान के आधार पर ही नक्शा तैयार किया था। हालांकि उस समय उन्होंने एक नहीं बल्कि कई नक्शे तैयार किये थे। सभी नक्शों को लेकर वह विश्व हिंदू परिषद के पास गये थे। इसके बाद चुनिंदा नक्शे को लकड़ी के मॉडल पर उकेरकर कुंभ मेले में आए साधुओं को दिखाया गया था।

पुराने नक्शे में किया गया बदलाव
आज चंद्रकांत सोमपूरा को राम मंदिर के मुख्य वास्तुकार के रूप में देश और दुनियाभर में पहचान मिल रही है। मीडिया से बात करते हुए उन्होंने बताया कि राम मंदिर का जो नक्शा उन्होंने तैयार किया गया है, उसमें कुछ बदलाव करने पड़े हैं। ये बदलाव सुप्रीम कोर्ट का आदेश आने के बाद किये गये हैं। 34 साल पहले उन्होंने जिस जमीन का अनुमान लगाकर राम मंदिर का नक्शा तैयार किया था, उससे लगभग दोगुना आकार के मंदिर का निर्माण किया जा रहा है। हालांकि राम मंदिर के निर्माण का आधार चंद्रकांत सोमपूरा के नक्शे को ही रखा गया है।
निर्माणाधिन राम मंदिर की खासियतें
- कुछ क्षेत्र : 2.7 एकड़
- मंदिर की कुल ऊंचाई : 360 फीट
- मंदिर की कुल चौड़ाई : 235 फीट
- मंदिर की कुल मंजील : 3
- हर मंजील की ऊंचाई : 20 फीट
- भूतल के खंभों की संख्या : 160
- पहले तल के खंभों की संख्या : 132
- दूसरे तल के खंभों की संख्या : 74
- मंदिर के कुल शिखरों की संख्या : 5
- मंदिर में कुल द्वारों की संख्या : 12
पिता ने तैयार किया था सोमनाथ मंदिर का नक्शा
चंद्रकांत सोमपूरा के पिता भी प्रसिद्ध वास्तुकार रह चुके थे। उनके पिता प्रभाकर सोमपूरा ने गुजरात के सोमनाथ मंदिर का नक्शा तैयार किया था। इसके अलावा प्रभाकर सोमपूरा ने कई अन्य प्रसिद्ध मंदिरों के निर्माण में नक्शा तैयार कर अपना योगदान दिया था। अपने पिता के पद्चिन्हों पर चलते हुए चंद्रकांत सोमपूरा ने अपने बेटे आशिष सोमपूरा के साथ मिलकर अब तक 131 से अधिक मंदिरों का नक्शा तैयार किया है, जिसमें गांधीनगर का स्वामी नारायण मंदिर, पालनपुर का अम्बाजी मंदिर आदि शामिल है। चंद्रकांत सोमपूरा ने बताया कि अयोध्या का राम मंदिर नगर शैली या उत्तर भारतीय मंदिर शैली के आधार पर तैयार किया जा रहा है।
बता दें, राम मंदिर के उद्घाटन को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार ने हाल ही में एक बड़ा फैसला लिया है। 22 जनवरी 2024 यानी जिस दिन रामलला के मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा होगी, उस दिन अयोध्या के सभी होटल, आश्रम और लॉज की प्री-बुकिंग को कैंसिल कर दिया गया है। उस दिन अयोध्या में बाहर से जाने वाले सिर्फ वहीं लोग रुकेंगे जिनके पास राम मंदिर के उद्घाटन का पास होगा या फिर जिन्हें मंदिर के उद्घाटन समारोह के लिए आमंत्रित किया गया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राम मंदिर उद्घाटन समारोह की सिर्फ अध्यक्षता ही नहीं करेंगे। बल्कि अगर वह राजी होते हैं तो आधा किमी दूर स्थित अस्थायी मंदिर में स्थापित रामलला की मूर्ति को पैदल चलकर वह नवनिर्मित राम मंदिर में लेकर भी आएंगे।



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