देशभर में नवरात्रि का त्योहार बड़े ही उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। नवरात्रि के 9 दिनों में मां दुर्गा के 9 अलग-अलग रूपों की पूजा की जाती है। इस साल नवरात्रि की शुरुआत 3 अक्तूबर को हुई है और 12 अक्तूबर को नवरात्रि का समापन होगा। इस दौरान अधिकांश घरों में महिलाएं व्रत रखती हैं और उनका भोजन भी विशेष व्रत वाला ही होता है।
कोई साबुदाना की खिचड़ी खाती हैं तो कोई कुट्टू के आटे से बनी पुरियां और हलवा खाता है। नवरात्रि के दिनों में अपने भोजन में महिलाएं सामान्य नमक का इस्तेमाल भी नहीं करती हैं। ये तो हो गयी व्रत में आम इंसानों के खाने की बातें। लेकिन क्या आप जानते हैं नवरात्रि के दौरान मंदिरों में देवी मां को क्या भोग चढ़ाया जाता है?

चलिए आपको बताते हैं नवरात्रि के 9 दिन दिल्ली के प्रसिद्ध मंदिरों में देवी माता को प्रसाद में क्या भोग लगाया जाता है :-
1. कालका जी मंदिर
दिल्ली के सबसे प्रसिद्ध मंदिरों में से एक कालका जी मंदिर, देवी काली को समर्पित है। यह मंदिर दिल्ली के नेहरु पार्क के पास मौजूद है। कहा जाता है कि इस मंदिर का उल्लेख महाभारत में भी किया गया था। यानी यह मंदिर पांडवों के समय से मौजूद है। हर दिन इस मंदिर में देवी काली के दर्शन करने हजारों की संख्या में भक्त आते रहते हैं। नवरात्रि के दौरान यहां आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में भी काफी वृद्धि होती है।
नवरात्रि के दिनों में मंदिर में सुबह की आरती के समय देवी मां को दही, बर्फी और कई तरह की मिठाईयों का भोग लगाया जाता है। शाम की आरती में देवी मां को फलों, सुखे मेवों और व्रत वाले पकवान जैसे कुट्टी और सिंघारे के आटे से बनी पुरियां और पकौड़े आदि परोसे जाते हैं। इन भोग-प्रसादों के अलावा इस मंदिर में देवी काली को एक विशेष शाही भोग भी लगाया जाता है, जिसे सुखे नारियल (गरी), कालावा, दालचीनी, लौंग, काजू, किशमिश, बादाम और चीनी का बुरादा मिलाकर बनाया जाता है।

2. छत्तरपुर मंदिर
दिल्ली का छत्तरपुर मंदिर देवी कात्यायनी को समर्पित एक मंदिर है, जो नवदुर्गा में से एक है। इस मंदिर को श्री आद्या कात्यायनी शक्ति पीठ मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। वर्ष 1974 में इस मंदिर का निर्माण बाबा संत नागपाल जी द्वारा करवाया गया था। यह मंदिर उत्तर और दक्षिण भारतीय शैली के आधार पर बनाया गया है। यूं तो इस मंदिर में अक्सर देवी के दर्शन करने के लिए भक्त आते रहते हैं लेकिन नवरात्रि के समय इस मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में बड़ा इजाफा होता है।
छत्तरपुर मंदिर में नवरात्रि के दिनों में भव्य लंगर का आयोजन किया जाता है, जिसमें श्रद्धालुओं को हलवा, पुरी, आलू की सब्जी और कद्दु की सब्जी परोसी जाती है। भोजन पकने के बाद इन सभी व्यंजनों को सबसे पहले देवी कात्यायनी और बाबा नागपाल को भोग स्वरूप चढ़ाया जाता है। उसके बाद इन्हें प्रसाद के रूप में भक्तों में वितरित किया जाता है। करीब 5000 सेवादार लंगर का वितरण अच्छी तरह से हो सके, इसे सुनिश्चित करते हैं।

3. झंडेवाला मंदिर
मध्य दिल्ली में मौजूद झंडेवाला मंदिर देवी आद्या शक्ति को समर्पित एक मंदिर है। इस मंदिर के प्रति श्रद्धालुओं में गहरी आस्था है। इस मंदिर का नाम मंदिर के शिखर पर लहराते केसरिया झंडों की वजह से रखा गया है। स्थानीय लोगों का मानना है कि इस मंदिर का निर्माण 18वीं सदी के दौरान बद्री दास नामक किसी व्यापारी ने करवाया था। नवरात्रि के दौरान दिल्ली में उत्सव का केंद्र बिन्दु झंडेवाला मंदिर बन जाता है। यहां नवरात्रि के दौरान दिन में कई तरह के भोग देवी को चढ़ाएं जाते हैं।
सुबह की आरती में सुखे मेवे, पीठा, नारियल और दूध चढ़ाया जाता है। वहीं दोपहर में भोग लगाया जाता है जिसमें साबुदाना खिचड़ी, पनीर, फल, आलू की सब्जी, कुट्टू पकौड़ी और खीर शामिल होता है। शाम की आरती में सुखे मेवे, पीठा और नारियल चढ़ाया जाता है। नवरात्रि के 9वें दिन यानी नवमी को भोग में देवी आद्या शक्ति को विशेष भोग अर्पित किया जाता है, जिसमें हलवा, चना, नारियल और पुरी परोसा जाता है।



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