विभाजन, एक ऐसा काली रात जिसकी कोई सुबह नहीं हुई थी। अंग्रेज तो भारत छोड़कर चले गये लेकिन लॉर्ड माउंटबेटन ने दोनों देशों के बीच विभाजन की वो आग लगायी जिसमें ना जाने कितने लोग जल गये और ना जाने कितने लोग आजादी के 75 साल बाद आज भी जल रहे हैं।

लाखों लोगों ने 15 अगस्त 1947 को हुए विभाजन का वह दर्द झेला था, जिसकी टिस आज भी लोगों के दिलों में कांटा बनकर चुभ रही है। इस विभाजन के कारण ना सिर्फ भारत कई टुकड़ों में बंट गया बल्कि पाकिस्तान जैसा एक पड़ोसी मुल्क भी मिला जो उसे चैन की सांस लेता हुआ नहीं देख पाता है। दिल्ली का पार्टिशन म्यूजियम विभाजन के उसी दर्द को बयां करता है।

क्यों हुआ था भारत-पाकिस्तान का विभाजन
विभाजन जब इतना दर्दनाक था, तो आखिर भारत और पाकिस्तान का विभाजन क्यों किया गया था? भारत की आजादी की पटकथा 1929 को ही लिखी जानी शुरू हो गयी थी। भारत को आजादी 15 अगस्त 1947 को मिली, लेकिन विभाजन की पटकथा भारत के गवर्नर जनरल रहे वायसराय लॉर्ड माउंटबेटन ने लिखी थी। दरअसल, 2 जून 1947 को लॉर्ड माउंटबेटन ने भारत विभाजन की घोषणा कर दी थी।

इतना ही नहीं उन्होंने सभी रियासतों को स्वतंत्र रहने का विकल्प भी दिया था। मुस्लिम अपने लिए अलग देश की मांग कर रहे थे और लॉर्ड माउंटबेटन ने उनका समर्थन भी किया। अंग्रेजी सरकार ने भारत छोड़कर जाने का फैसला तो ले लिया था लेकिन वह कभी नहीं चाहते थे कि भारत कभी भी चैन की सांस ले सके। इस वजह से ही लॉर्ड माउंटबेटन ने भारत-पाकिस्तान के विभाजन की घोषणा कर दी थी।
क्यों बना पार्टिशन म्यूजियम

सभी जानते हैं कि भारत की आजादी के साथ ही भारत और पाकिस्तान का बंटवारा हो गया था। लेकिन बंटवारे की विभिषिका जिन लोगों ने झेली थी, उन लोगों पर क्या बिती थी, इस बारे में काफी कम लोगों को ही पता है। खास तौर पर नयी पीढ़ी को इस बारे में बहुत कम जानकारी है। उन्हें विभाजन के उस दर्द के विषय में बताने व समझाने के लिए ही दिल्ली में पार्टिशन म्यूजियम बनाया गया। यह म्यूजियम उन लाखों महिलाओं, पुरुषों व बच्चों को समर्पित है जिन्होंने एक रात में ही अपना घर खो दिया, अपनो को खो दिया।
क्या-क्या है पार्टिशन म्यूजियम में
पार्टिशन म्यूजियम में 6 गैलरी हैं। इन गैलरियों में चरणबद्ध तरीके से बंटवारे के दर्द को समझाने की कोशिश की गयी है। म्यूजियम में बंटवारा झेलने वाले लोगों के सामान जैसे बर्तन, बैलगाड़ी, हथियार, कपड़े, अनाज ढोने वाले ऊंटों की मूर्तियां, लेटर बॉक्स और केतली जैसे सामानों को सुरक्षित रखा गया है और इन्हें प्रदर्शित भी किया गया है।

यहां ऑडियो-विजुअल के माध्यम से भी आजादी की लड़ाई और उसके बाद विभाजन की उस दर्दनाक प्रक्रिया के बारे में भी बताया जाता है। क्या आपको पता है कि विभाजन के समय भारत और पाकिस्तान दोनों तरफ से लोग ट्रेनों में भर-भरकर सरहद पार किया करते थे। लोग इतनी ज्यादा संख्या में ट्रेनों से आवाजाही करते थे कि ट्रेनों में पैर रखने रखने की जगह भी नहीं होती थी।
भारत-पाकिस्तान के बंटवारे में सिर्फ जमीन ही नहीं बल्कि रेलवे का भी बंटवारा हुआ था। इस बारे में ज्यादा जानने के लिए नेटिवप्लैनेट का यह आर्टिकल जरूर पढ़ें :
कहां है पार्टिशन म्यूजियम और एंट्री फीस?

भारत-पाक के बंटवारे को समर्पित यह म्यूजियम दिल्ली के कश्मीरी गेट के पास मौजूद है। यह म्यूजियम कश्मीर गेट में दारा शिकोह लाइब्रेरी में यह म्यूजियम मौजूद है। इस म्यूजियम को द आर्ट्स एंड कल्चरल हेरिटेज ट्रस्ट द्वारा सजाया गया है। यह म्यूजियम सुबह 10 बजे से शाम को 6 बजे तक खुला रहता है। म्यूजियम में भारतीय पर्यटकों के लिए एंट्री शुल्क 10 रुपये है।
बता दें, पार्टिशन से जुड़े लोग और उनके परिवार के सदस्य इस म्यूजियम में मुफ्त में घूम सकते हैं।



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