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देव दीवाली : काशी विश्वनाथ मंदिर में पितरों के नाम पर जलाएं दीया, कैसे कर सकेंगे ऑनलाइन बुकिंग?

काशी की देव दीवाली हर साल भव्य होती है और उसे इस साल और भी अधिक भव्य बनाने की कवायद में राज्य सरकार जूट गयी है। इस साल 15 नवंबर को देव दीवाली मनायी जाएगी, जिस दिन वाराणसी के सभी अर्द्धचंद्रकार घाटों को दीयों से रोशन किया जाएगा। इसके साथ ही वाराणसी के हर कुएं, तालाब या कुंड के किनारों को भी दीयों से जगमगाया जाता है।

इस बार पूरी वाराणसी को 12 लाख दीयों से रोशन करने का लक्ष्य बनाया गया है, जिसमें से करीब 3 लाख दीये गाय के गोबर से बने होंगे। अगर आप वाराणसी में नहीं रहते हैं लेकिन हर साल यहीं सोचते हैं कि काश, आप भी अपने पितरों के नाम पर काशी में एक दीया जला सकते तो बड़ा अच्छा होता! अब आपकी यह दिली ख्वाहिश पूरी हो सकेगी।

kashi viswanath temple

इस साल श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर परिसर में पहली बार पितरों के नाम पर 25 हजार दीये जलाए जाएंगे। इन दीयों को जलाने के लिए आपको वाराणसी जाने की जरूरत भी नहीं होगी। आप घर बैठे ऑनलाइन माध्यम से ही दीया डोनेशन की बुकिंग कर सकते हैं। सिर्फ इतना ही नहीं, इस बुकिंग के साथ ही प्रसाद भी आपको घर बैठे ही मिल जाएगा, क्योंकि मंदिर प्रशासन प्रसाद की होम डेलीवरी भी करने वाली है।

कैसी चल रही है देव दीवाली की तैयारी?

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार दिवाली से ठीक 15 दिन बाद कार्तिक पूर्णिमा को देव दीवाली मनायी जाती है, जिस दिन भगवान स्वर्ग से धरती पर उतरते और गंगा स्नान करते हैं। इसलिए वाराणसी में गंगा के सभी 84 घाटों समेत तालाब, कुंड आदि के किनारों को भी दीयों से भव्य तरीके से सजाया जाता है। इस साल देव दीवाली के मौके पर लगभग 12 लाख दीयों से वाराणसी के घाटों, कुंडों और तालाबों के किनारों को सजाने का लक्ष्य रखा गया है।

इसमें से लगभग 3 लाख दीये गाय के गोबर से बने होंगे। इसके साथ ही देव दीवाली के मौके पर वाराणसी आने वाले लाखों देशी-विदेशी श्रद्धालुओं को ध्यान में रखते हुए घाटों पर कई तरह के कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जाएगा, जिसमें लेजर शो से लेकर ग्रीन आतिशबाजी भी शामिल है। लेजर शो के माध्यम से गंगा अवतरण और शिव महिमा की गाथाएं दिखाई जाएंगी।

dev diwali deepdan at varanasi

कर सकेंगे दीपदान

इस साल काशी विश्वनाथ मंदिर में एक नयी परंपरा की शुरुआत की जा रही है। इस साल पहली बार 25000 पितरों के नाम पर काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर में दीये जलाएं जाएंगे। अगर आप भी अपने पितरों के नाम पर काशी विश्वनाथ मंदिर में दीए जलाना चाहते हैं तो उसकी ऑनलाइन बुकिंग कर सकते हैं। विश्वनाथ मंदिर परिसर में पितरों के लिए दीये जलाने का आयोजन गेट नंबर 4 से लेकर गंगा द्वार और ललिता घाट तक किया जाएगा। श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग श्रेणियों में दीपदान करने की व्यवस्था काशी विश्वनाथ मंदिर प्रबंधन द्वारा की गयी है।

जिसकी बुकिंग आप घर बैठे ऑनलाइन ही कर सकेंगे। मीडिया से बात करते हुए इस बात की जानकारी काशी विश्वनाथ मंदिर के एसडीएम शंभू शरण ने दी। उन्होंने बताया कि कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर पितरों के नाम मंदिर में दीपक जलाने की सुविधा की मांग पिछले लंबे समय से श्रद्धालु कर रहे थे। काफी चर्चा और सोच-विचार करने के बाद हमने एक योजना बनायी है और अब उसे लागू किया जा रहा है।

कौन-कौन श्रेणियों में होगी बुकिंग

श्रद्धालु अपने पितरों को समर्पित दीया जलाने के लिए डोनेशन 4 श्रेणियों में दे सकेंगे -

दीपदान की श्रेणी शूल्क विशेषता
गंगा ज्योति ₹1100 5 दीपक जलाए जाएंगे, गेट नंबर 4 के मंदिर परिसर की ओर जलाए जाएंगे।
काशी प्रकाश ₹2100 11 दीपक जलाए जाएंगे, गंगा की दिशा में रखा जाएगा।
देव दीपक ₹5100 21 दीपक जलाए जाएंगे, गंगा के सामने, मंदिर और घाट की सीढ़ियों की तरफ जलाए जाएंगे।
दिव्य गंगा ज्योत ₹11000 51 दीपक जलाए जाएंगे। यह सुपर एक्सक्लूसिव श्रेणी है।
dev diwali varanasi ganga ghat

कैसे करेंगे बुकिंग

देव दीवाली के दिन दीपक डोनेशन के लिए आप ऑनलाइन अथवा ऑफलाइन माध्यम से बुकिंग कर सकते हैं। अगर आप वाराणसी या उसके आसपास में रहते हैं तो देव दीवाली पर पितरों को समर्पित दीपदान के लिए आप काशी विश्वनाथ मंदिर प्रबंधन के हेल्पडेस्क की मदद से ऑफलाइन इसकी बुकिंग कर सकेंगे। यदि आप वाराणसी से बाहर रहते हैं तो दीयों की बुकिंग आप ऑनलाइन माध्यम से भी कर सकेंगे।

इसके लिए आपको काशी विश्वनाथ मंदिर प्रबंधन के आधिकारिक वेबसाइट श्री काशी विश्वनाथ.org पर जाना होगा। यहां देव दीवाली ऑनलाइन डोनेशन टैब पर क्लिक करते ही आप इसकी बुकिंग कर सकेंगे। डोनेशन की बुकिंग करवाने वाले हर श्रद्धालु को घर बैठे ही बाबा विश्वनाथ का ₹350 का प्रसाद भी मिलेगा, जिसमें मिश्री, रुद्राक्ष, सुखे मेवे और बाबा की भस्म होगी।

ध्यान दें, देव दीवाली पर दीपदान करते समय पितरों के नाम का उल्लेख करना अनिवार्य है।

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