त्योहारों के सीजन में सबसे ज्यादा इंतजार जिस त्योहार का होता है, वह है दिवाली। धार्मिक मान्यताओं के साथ ही दिवाली ऐसा त्योहार होता है, जिसको लेकर बच्चों से लेकर बुढ़ों तक में एक समान उत्साह होता है। रात के अंधेरे में जब घर का हर कोना और शहर का हर इलाका टिमटिमाते दीयों और रंग-बिरंगी बल्ब की रोशनी से नहाता है, तब वह नजारा देखने लायक होता है।

यूं तो देशभर में अलग-अलग तरीके से दिवाली मनायी जाती है लेकिन कुछ शहरों की दिवाली बहुत रोमांचक और यादगार होती है।
अमृतसर

सबसे पहले आपको पंजाब के अमृतसर की दिवाली के बारे में बताते हैं। गोल्डन टेम्पल को दिवाली के दिन इतने सुन्दर तरीके लाइट्स से सजाया जाता है कि देखने वाला बस अपनी सुधबुध ही खो बैठता है। इसके अलावा यहां की आतिशबाजी भी देखने लायक होती है। दिवाली की रात को अमृतसर की खूबसूरती निहारने लायक होती है। अगर कभी मौका मिले तो एक बार अमृतसर की दिवाली जरूर देखें।
अयोध्या

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार दिवाली की शुरुआत रामजन्म भूमि अयोध्या से ही हुई थी। जब 14 वर्षों का वनवास समाप्त कर भगवान राम पत्नी सीता और भाई लक्ष्मण समेत अयोध्या वापस लौटे थे, तब पूरी अयोध्या नगरी को हजारों दीयों से रोशन किया गया था। फिर भला प्रभु श्रीराम की जन्मभूमि का दिवाली सेलिब्रेशन फीका कैसे पड़ सकता है। सरयू नदी के किनारे बसे इस शहर की दिवाली को देखने के लिए दूसरे देशों से भी पर्यटक पहुंचते हैं।
वाराणसी

वाराणसी के दशहरे से लेकर दिवाली तक, हर त्योहार की छटा निराली होती है। इस दिन गंगा के घाटों पर सैंकड़ों की संख्या में मोमबत्तियां जलायी जाती हैं, जिन्हें देर रात को गंगा में बहा दिया जाता है। गंगा में बहते इन दीयों को देखकर कुछ देर के लिए ऐसा लगता है मानों नदी में पिघला सोना बह रहा हो। इसके अलावा वाराणसी में पूरी रात होने वाली आतिशबाजी भी देखने लायक होती है ।
कोलकाता

दिवाली की रात कोलकाता में लोग दोहरा जश्न मनाते हैं। दरअसल, दिवाली की रात को कोलकाता में काली पूजा का आयोजन भी किया जाता है। एक तरफ लोग दिवाली पर अपने घरों को सजाते हैं, माता लक्ष्मी और गणपति की आराधना करते हैं तो दूसरी तरफ काली पूजा के लिए पूरी कोलकाता को लाइट्स से सजायी जाती है।
इस दिन कोलकाता पूरी रात जागती है, क्योंकि मां काली की पूजा रात को करीब 10 बजे के बाद ही शुरू होती है और यह पूजा पूरी रात चलने के बाद अहले सुबह 3-4 बजे पूजा संपन्न होती है। इसके साथ ही कोलकाता में होने वाली आतिशबाजी की प्रतियोगिता भी देखने लायक होती है।
उदयपुर और पुष्कर

उदयपुर शहर मुख्य रूप से लेक पिछोला के इर्द-गिर्द ही बसा हुआ है। इसके साथ ही यहां कई पैलेस हैं, जिन्हें दिवाली के दिन बड़े ही आकर्षक रूप से सजाया जाता है। लेक पिछोला पर जब लाइट्स और पटाखों का प्रतिबिंब पड़ता है, तो उसकी सुन्दरता काफी ज्यादा बढ़ जाती है।
इसके अलावा उदयपुर का लाइट फेस्टिवल भी यहां त्योहारों का मुख्य आकर्षण होता है। कुछ इसी अंदाज में पुष्कर में भी दिवाली मनायी जाती है। यहां पुष्कर झील के आसपास दीयों से सजाया जाता है जो रात के अंधेरे में काफी आकर्षक लगता है। जैसलमेर में दिवाली की रात को होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रम काफी लोकप्रिय हैं।



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