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भारत के वे प्रसिद्ध स्मारक जिनका निर्माण वीर महिलाओं ने करवाया!

एक कलाकार भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है जितना कि उसके द्वारा बनाई गई कला। भारत में ऐसे ही कला के कई नमूने, कई स्मारक हैं जो अपने बारीक नक्काशी,वास्तुकला की प्रासंगिकता और उस समय के ऐतिहासिक महत्व के लिए जाने जाते हैं। इन सब स्मारकों को किसी ना किसी शासक ने अपनी पत्नी अपने पिता या अपने पुत्र की याद में बनवाया। पर क्या आपको पता है, भारत के कुछ चुनिंदा स्मारकों का निर्माण महिलाओं ने भी करवाया था?

बहुत कम ही लोगों को यह पता होगा कि भारत में कई ऐसी रचनाएँ भी हैं जिन्हें उस समय की महिलाओं ने बनवाया था क्यूंकि हमेशा से ही हमारे सामाजिक, राजनितिक और वास्तु इतिहास में पुरुषों का वर्चस्व रहा है। इन सबके बीच आपको यह जानकर अच्छा लगेगा कि भारत में स्मारकें सिर्फ महिलाओं को समर्पित ही नहीं, पर ऐसे कुछ खूबसूरत स्मारक भी हैं, जिन्हें खुद महिलाओं द्वारा बनवाया गया है।

जी हाँ, कुछ चौंका देने वाले भारतीय स्मारक ऐसे आज भी मौजुद हैं। चलिए आज हम ऐसे ही प्रसिद्ध स्थापत्य कला के नूमनों की सैर पर चलते हैं, जिनका निर्माण महिलाओं ने करवाया था!

 हुमायूँ का मकबरा, नई दिल्ली

हुमायूँ का मकबरा, नई दिल्ली

दिल्ली में स्थित हुमायूँ का मकबरा भारत के प्रसिद्ध मकबरों में से एक है, जिसे महिला द्वारा बनवाया गया। हुमायूँ की इस भव्य समाधी का निर्माण हुमायूँ की बेग़म, हामिद बानु बेग़म ने करवाया था। यह स्मारक फ़ारसी और भारतीय शैली को मिलाकर बनाई गई सबसे पुरानी रचनाओं में से एक है। हामिदा बेग़म को भी मृत्यु के बाद यहीं दफ़नाया गया।

Image Courtesy:Dennis Jarvis

खैर-अल-मन्ज़िल, नई दिल्ली

खैर-अल-मन्ज़िल, नई दिल्ली

खैर-अल-मन्ज़िल मस्जिद का निर्माण सन् 1561 में अकबर की दाई माँ महम अंगा द्वारा करवाया गया। उस समय महम अंगा मुग़ल दरबार की सबसे प्रभावशाली महिला थीं जिन्होंने अकबर के बचपन के समय मुग़ल साम्राज्य पर शासन किया। विद्वानों के अनुसार इस मस्जिद का इस्तेमाल मदरसे के रूप में भी किया जाता था और इसके दालानों को कक्षाओं के रूप में।

Image Courtesy:Varun Shiv Kapur

मोहिनीश्वरा शिवालय मंदिर, गुलमर्ग

मोहिनीश्वरा शिवालय मंदिर, गुलमर्ग

गुलमर्ग के मध्य में छोटी सी पहाड़ी पर स्थापित मोहिनीश्वरा शिवालय मंदिर का नाम महारानी मोहिनी बाई सिसोदिया के नाम पर पड़ा जो उस समय कश्मीर के महाराजा, राजा हरी सिंह की पत्नी थी। इस मंदिर का निर्माण उन्होंने सन् 1915 में करवाया और इस मंदिर को महारानी मंदिर भी कहा जाता है।

मंदिर की लाल चमकदार ढालू छत और उसके परिदृश्य में बर्फ से ढकी ऊँची-ऊँची चोटियां एक मनोरम दृश्य का निर्माण करती हैं। इस मंदिर को गुलमर्ग के लगभग हर कोने से देखा जा सकता है।

Image Courtesy:Divya Gupta

इतिमाद-उद-दौला, आगरा

इतिमाद-उद-दौला, आगरा

आगरा में ताज महल से पहले, बड़ी नेहनत से बनाई गई यह खूबसूरत समाधी एक बेटी द्वारा अपने पिताजी को श्रद्धांजलि है जो अपनी तरह की इकलौती रचना है। महारानी नूर जहाँ ने भारत में संगमरमर का सबसे पहला मकबरा अपने पिताजी मीर घयास बेग की याद में सन् 1622 से 1628 के बीच बनवाया।

यह मकबरा बाग़ में स्थित किसी ख़ज़ाने के बक्से की तरह प्रतीत होता है जिसमें कोरल के साथ लाल और पीले बलुई पत्थर से बारीक काम किया गया है। यमुना नदी के किनारे ही बसा यह मकबरा, ताजमहल को बनाने की सच्ची प्रेरणा थी जिसे नूर जहाँ के पुत्र शाहजहाँ द्वारा अपनी पत्नी के लिए बनवाया गया।

Image Courtesy:nomo

लाल दरवाज़ा मस्जिद, जौनपुर

लाल दरवाज़ा मस्जिद, जौनपुर

उत्तरप्रदेश के जौनपुर में स्थित, लाल दरवाज़ा का निर्माण सन् 1447 में रानी राज्ये बीबी द्वारा मौलाना सईद अली दाऊद कुतुबुद्दीन, जो उस समय के प्रख्यात संत हुआ करते थे को समर्पित कर बनवाया गया। मस्जिद का नाम रानी के महल के नाम पर पड़ा जो मस्जिद के साथ ही बना हुआ था।

लाल दरवाज़ा मस्जिद का निर्माण रानी के लिए एक निजी मस्जिद के तौर पर किया गया था। शाही पुल और शाही किला जौनपुर के अन्य आकर्षणों में से एक हैं।

Image Courtesy:Joseph David

 रानी की वाव, गुजरात

रानी की वाव, गुजरात

भारत की सबसे खूबसूरत बवालियों में से एक रानी की वाव दुनिया की सबसे पहली वाव है जिसे यूनेस्को द्वारा विश्व विरासत धरोहरों की सूचि में शामिल किया गया। गुजरात के पाटण में स्थापित इस वाव को रानी उदयमति द्वारा अपने पति राजा भीमदेव प्रथम की याद में सन् 1063 में बनवाया गया।

सरस्वती नदी के किनारे बसा यह वाव नदी के कीचड़ से भर गया था जिसे भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा फिर से खोद कर निकाला गया, जिसके बाद भी इसकी नक्काशियां और वास्तुशैली अच्छी स्थिति में पाए गए।

Image Courtesy:Bernard Gagnon

अहिल्या किला, महेश्वर

अहिल्या किला, महेश्वर

मध्यप्रदेश के महेश्वर में 18वीं सदी में निर्मित अहिल्या किला एक आश्चर्यजनक पर्यटक आकर्षण है। नर्मदा नदी के सुन्दर तट पर स्थित यह किला होलकर किला के रूप में भी प्रसिद्ध है। अहिल्या किला मालवा की तत्कालीन रानी अहिल्याबाई होल्कर का निवास था। कालांतर में जब महेश्वर में होलकर का निवास था तब अहिल्याबाई होलकर ने अपने इस निवास स्थल का निर्माण करवाया।

यह किला रानी अहिल्याबाई होल्कर के शक्तिशाली शासक होने और अपने साम्राज्य की सुरक्षा के प्रति किये गये उपायों का प्रत्यक्ष गवाह है। इस प्राचीन इमारत में भगवान शिव के विभिन्न अवतारों को समर्पित कई मन्दिर हैं।

Image Courtesy:Bernard Gagnon

विरुपक्ष मंदिर, पट्टादकाल

विरुपक्ष मंदिर, पट्टादकाल

कर्नाटक के पट्टादकाल में स्थित प्रसिद्ध विरुपक्ष मंदिर का निर्माण रानी लोकमहादेवी ने 740 ईसवीं में अपने पति राजा विक्रमादित्य द्वितीय के पल्लव शासकों पर जीत हासिल करने के उपलक्ष्य में करवाया।

इस स्मारक को लोकेश्वरा और लोकपालेश्वर भी कहा जाता है। यह पट्टादकाल में 8 वीं शताब्दी में बना सबसे बड़ा मंदिर भी है।

Image Courtesy:Dineshkannambadi

मिरजान किला, कर्नाटक

मिरजान किला, कर्नाटक

अपने वास्तु खूबसूरती के लिए जाना जाने वाला मिरजान किला कर्नाटक के पूर्वी कन्नड़ जिले के पश्चिमी तट पर बसा हुआ है। किला ऊँची दीवारों और ऊँचे गढ़ों की डबल परत से घिरा हुआ है, जिसे गरसोप्पा की रानी, चेन्नाभैरादेवी द्वारा बनवाया गया। उन्हें रैना दे पिमेंता भी कहा जाता था, जिसका मतलब है, काली मिर्च की रानी। उनका यह नाम इसलिए पड़ा क्यूंकि वे ऐसी भूमि पर शासन करती थीं जहाँ सबसे अच्छे काली मिर्च की पैदावार होती थी।

किले में कई गुप्त दरवाज़े, सुरंगें और वाच टावर हैं। मिरजान उस समय काली मिर्च, चावल, नारियल, इलायची, और अन्य मसालों का देश के अन्य हिस्सों में निर्यात करने के लिए सबसे मुख्य बंदरगाह था।

Image Courtesy:Ramnath Bhat

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