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कुतुबुद्दीन-ऐबक ने नहीं बनवाया था कुतुब-मीनार!

दिल्ली की पहचान, भारत की ऐतिहासिक धरोहर और विश्व धरोहर सूची में शामिल कुतुब मीनार...। बचपन से ही हम सभी ने पढ़ा है कि कुतुब मीनार का निर्माण कुतुबुद्दीन-ऐबक ने किया था। लेकिन अगर हम आपसे यह कहे कि कुतुब-मीनार का निर्माण कुतुबुद्दीन-ऐबक ने नहीं किया था, तो...!

old pic of qutub minar

कुतुब-मीनार का निर्माण अकेले कुतुबुद्दीन-ऐबक ने नहीं किया था, बल्कि इसके निर्माण और मरम्मत में कई और लोगों का नाम जुड़ा हुआ है। पर क्यों किया गया था करीब 6 मंजीला ऊंची इस मीनार का निर्माण? किन लोगों की वजह से कुतुब-मीनार को वह स्वरूप और आकार मिला, जिससे विश्व धरोहर सूची में इसने अपना नाम पक्का कर लिया। दिल्ली के इतिहास से कैसे जुड़ा हुआ है कुतुब-मीनार का इतिहास और क्या है कुतुब-मीनार की कहानी?

आइए इन्हीं सवालों का जवाब ढूंढने की कोशिश करते हैं :

क्यों हुआ था कुतुब-मीनार का निर्माण

aircraft over qutub minar

कुतुब-मीनार की नींव वर्ष 1199 में रखी गयी थी। कुछ शोधकर्ताओं का मानना है कि कुतुब-मीनार का निर्माण इस परिसर में ही स्थित कुव्वत-उल-इस्लाम मस्जिद में अजान सुनकर नमाज पढ़ने आने वाले लोगों के लिए किया गया था। लेकिन वास्तव में कुतुब-मीनार का निर्माण धार्मिक वफादारों की जीत के प्रतिक के रूप में किया गया था। मस्जिद का नाम भी इसी बात को साबित करता है जिसका हिंदी में अर्थ 'इस्लाम की ताकत' है।

कुतुब-मीनार की खासियत

कुतुब-मीनार की हर मंजील पर गोलाकार में बराम्दा बनाया हुआ है। पूरे मीनार को अगर गौर से देखा जाए तो इसके चारों तरफ अरबी और नागरी भाषाओं में कई स्थानों पर काफी कुछ लिखा हुआ दिखेगा जो कुतुब-मीनार के इतिहास को बयां करता है।

  • कुल सीढियां : 379
  • कुल ऊंचाई : करीब 72.5 मीटर
  • नीचे की गोलाई : करीब 14.32 मीटर
  • शिखर की गोलाई : करीब 2.75 मीटर

किसने किया था कुतुब-मीनार का निर्माण

कुतुब-मीनार का निर्माण गुलाम वंश के शासक कुतुबुद्दीन-ऐबक ने शुरू जरूर किया था लेकिन आज हम इसे जिस स्वरूप में देखते हैं, वहां तक पहुंचने के लिए इसे कई अन्य शासकों व व्यक्तियों के समर्थन की जरूरत पड़ी। वर्ष 1199 में कुतुबुद्दीन-ऐबक ने कुतुब-मीनार की नींव रखी और पहली मंजील का निर्माण करवाया। इसके बाद वर्ष 1211-36 के बीच कुतुबुद्दीन-ऐबक के दामाद शम्सुद्दीन-इलतुत्मिश ने मीनार में 3 और मंजीले जोड़े।

History of qutub minar

अलाउद्दीन-खिलजी ने इस मीनार में बलुआ पत्थरों का इस्तेमाल कर इसे चारों तरफ से ढंका। साल 1351-88 के बीच फिरोज-शाह तुगलक ने कुतुब-मीनार के ऊपरी दो मंजीलों का पूनर्निर्माण करवाया जो बिजली गिरने के कारण क्षतिग्रस्त हो गयी थी। वर्ष 1368 में उसने कुतुब-मीनार की ऊपरी दोनों मंजीलों पर संगमरमर के पत्थर लगवाएं। सिकंदर लोदी के शासनकाल के दौरान यानी वर्ष 1489 से 1517 के बीच कुतुब-मीनार पर फिर से बिजली गिरी। सिकंदर लोदी ने 1503 में कुतुब-मीनार की मरम्मत करवायी।

भूकम्प में पहुंचा कुतुब-मीनार को नुकसान

qutub minar mehrauli

1782 और 1803 में आए भूकम्प के कारण दिल्ली के मेहरौली क्षेत्र में स्थित कुतुब-मीनार को काफी नुकसान पहुंचा था। बंगाल इंजीनियर्स के मेजर रॉबर्ट स्मिथ ने 1828-29 में कुतुब-मीनार की मरम्मत की थी जिसका खर्च उस समय करीब 17,000 रुपये आया था। मेजर स्मिथ ने कुतुब-मीनार को और भी आकर्षक बनाने के लिए इसमें एक गुंबद लगाया था लेकिन वर्ष 1848 में लॉर्ड हार्डिंग के आदेश पर गुंबद को हटा दिया गया। 1905 में आए तेज भूकम्प के झटकों ने दिल्ली को भी हिलाया था लेकिन उस भूकम्प में कुतुब-मीनार को कोई नुकसान नहीं पहुंचा।

बंद कर दिया गया कुतुब-मीनार का दरवाजा

कुतुब-मीनार में एक दरवाजा भी है जिससे लोग ना सिर्फ मीनार के अंदर प्रवेश कर सकते हैं बल्कि मीनार के शिखर तक भी पहुंच सकते हैं। कहा जाता है कि कुतुब-मीनार के इस प्रवेश द्वार, जिसका नाम अलाई दरवाजा है, का निर्माण दिल्ली के सुल्तान अलाउद्दीन-खिलजी ने करवाया था।

qutub minar image

लेकिन 1981 को हुए भयावह हादसे के बाद से कुतुब-मीनार के इस दरवाजे को बंद कर दिया गया जो आज भी बंद ही है। दरअसल, 4 दिसंबर 1981 को कुतुब-मीनार के अंदर किसी कारणवश भगदड़ मच गयी और इस घटना में 45 लोगों की मौत हो गयी। इसके बाद ही इस दरवाजे को हमेशा के लिए बंद कर दिया गया।

FAQs
कुतुब-मीनार के पास और क्या-क्या है?

कुतुब-मीनार परिसर में कुव्वत-उल इस्लाम मस्जिद, अलाई दरवाजा, इल्तुतमिश की कब्र, अलाउद्दीन का मदरसा व कब्र, सेंडरसन का सन डायल आदि मौजूद है।

कुतुब-मीनार के नीचे क्या है?

कुतुब-मीनार एक खोखली मीनार है। 350 से ज्यादा सीढ़ियों की मदद से कुतुब-मीनार के शिखर पर पहुंचा जा सकता है लेकिन कुतुब-मीनार के अंदर प्रवेश करने का दरवाजा हमेशा बंद ही रखा जाता है।

कुतुब-मीनार का निर्माण किसने करवाया था?

कुतुब-मीनार का निर्माण गुलाम वंश के शासक कुतुबुद्दीन-ऐबक ने शुरू करवाया था लेकिन वह इसका निर्माण पूरा नहीं कर सका था। उसके बाद उसके दामाद इल्तुतमिश ने कुतुब-मीनार का निर्माण पूरा किया था। कहा जाता है कि कुतुबुद्दीन ऐबक ने अफगानिस्तान के जाम की मीनार से प्रेरित होकर उससे आगे निकलने की होड़ में ही इसका निर्माण शुरू करवाया था।

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