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जयपुर से जोधपुर तक का सुहावना सफर

गुलाबी शहर जयपुर से जोधपुर की यात्रा के बारे में पढ़ें।

By Goldi

ये शहर वेडिंग डेस्टिनेशन के लिए भी काफी मशहूर है। सेलेब्रिटीज़ और अमीर लोगों की बिग फैट इंडियन वेडिंग को यहां पर आयोजित किया जाता है। इसके अलावा यहां कल्‍चरल फैस्‍ट जैसे मारवाड़ महोत्‍सव, राजस्‍थान इंटरनेशन लोक उत्‍सव और वर्ल्‍ड सैक्रेड स्प्रिट फेस्टिवल का भी आयोजन किया जाता है।

शहर की भागदौड़ भरी जिंदगी से दूर जोधपुर जैसे ऐतिहासिक शहर में छुट्टियां बिताने का अलग ही मज़ा है। इस ऐतिहासिक शहर में आपको बहुत कुछ देखने और जानने का मौका मिलेगा।

जोधपुर आने का सही समय

जोधपुर आने का सही समय

जोधपुर में घूमने के लिए अक्‍टूबर से मार्च तक का समय सबसे बे‍हतर माना जाता है। इन महीनों में जोधुपर का मौसम बेहद सुहावना रहता है। इस दौरान तापमान 5 डिग्री सेल्सियस तक रहता है और 25 डिग्री सेल्सियस से ऊपर नहीं जाता है। इस शहर को करीब से जानने के लिए पर्यटकों के लिए ये समय सबसे बेहतर है। वहीं गर्मियों में मौसम में जोधपुर का तापमान काफी ऊंचा रहता है।

जुलाई से अगस्‍त के महीने में जोधपुर में हल्‍की बारिश होती है और अगर आप अपने बजट में ही घूमना चाहते हैं तो इस मौसम में आप जोधपुर आ सकते हैं। गर्मियों के मुकाबले इस दौरान जोधपुर का मौसम थोड़ा ठीक रहता है।

जोधपुर को सन सिटी भी कहा जाता है क्‍योंकि यहां पर पूरे साल सूर्य की रोशनी की चमक रहती है। यहां तक कि सर्दियों में भी यहां सूरज साफ दिखाई देता है।

कैसे पहुंचे जोधपुर

कैसे पहुंचे जोधपुर

सड़क मार्ग : रूट 1 से जयपुर से जोधपुर की दूरी 337 किमी है और रूट 2 से 1380 किमी और रूट 3 से 332 किमी की दूरी है।

रूट 1
जयपुर - गोविंद नगर - एनएच 48 से अजमेर रोड़ - एनएच 448 - एनएच 58 - एनएच 25 - भगत की कोठी - जोधपुर

रूट 2
जयपुर - गोविंद नगर - एनएच 48 से अजमेर रोड़ - एनएच 448 - एनएच 58 - एनएच 162 - एनएच 62 - न्‍यू कैंपस रोड़ - भगत की कोठी - जोधपुर

रूट 3
जयपुर - गोविंद नगर - एनएच 48 से अजमेर रोड़ - एनएच 448 - पुष्‍कर बाईपास - एनएच 58 - आरजे एसएच 21 से मेरता - एनएच 25 - आरजे एसएच 61 - भगत की कोठी - जोधपुर

रूट 1 बेहतर है क्‍योंकि इसमें आपको 6 घंटे का समय लगेगा जबकि अन्‍य रूट पर अधिक समय लग सकता है।

कैसे पहुंचे जोधपुर

कैसे पहुंचे जोधपुर

रेल द्वारा : जयपुर से जोधपुर तक कई ट्रेनें चलती हैं। इस सफर में आपको 4 से 11 घंटे का समय लग सकता है।

बस द्वारा : बस से भी आपको समान की समय लगेगा। सड़क मार्ग की तरह बस से जाने पर भी 6 घंटे का समय लगेगा। जयपुर से जोधपुर तक पूरा दिन कई बसें चलती हैं। जोधपुर जाने का ये रास्‍ता भी काफी सस्‍ता है।

वायु मार्ग द्वारा : वार्यु मार्ग द्वारा जोधपुर शहर अच्‍छी तरह से सभी शहरों से जुड़ा हुआ है। इस शहर का केंइ्र 5 किमी दूर है और एयरपोर्ट से आपको टैक्‍सी और ऑटोरिक्‍शा की सुविधा भी मिल जाएगी।

अजमेर

अजमेर

जयपुर से सुबह जल्‍दी निकलने पर आप रावत मिष्‍ठान भंडार की लोकप्रिय प्‍याज की कचौड़ी खाने का मौका मिलेगा। इसके अलावा यहां और भी स्‍वादिष्‍ट व्‍यंजन समोसा, मिर्ची वड़ा, दाल कचौड़ी और कई तरह की मिठाईयां भी खा सकते हैं। लस्‍सीवाला पर लस्‍सी भी पी जरूर पीएं। जयपुर शहर से अजमेर शहर 135 किमी की दूरी पर स्थित है।

मोईनुद्दीन चिश्‍ती की दरगाह को दरगाह शरीफ के नाम से भी जाना जाता है। इस धार्मिक स्‍थल के दर्शन करना भी ना भूलें। जैन धर्म के लोग नसियान जैन मंदिर के दर्शन भी कर सकते हैं। यह भारत के सबसे अमीर मंदिरों में से एक है। इसके अलावा आप लेक फॉए सागर और अना सागर भी देख सकते हैं।

अजमेर से 13 किमी की दूरी पर स्थित है धार्मिक शहर पुष्‍कर। इस स्‍थान पर ब्रह्मा जी का दुनिया का एकमात्र मंदिर स्‍थापित है। इस शहर में एक दिन और रूक कर आप इस शहर के बारे में बहुत कुछ जान सकते हैं।PC:Billyakhtar

बेवर

बेवर

अरावली की पहाड़ियों में स्थित इस शहर में प्रचुर मात्रा में मिनरल मिलता है। अजमेर के एनएच 58 से ये शहर 57 किमी की दूरी पर स्थित है। इस शहर की सड़क व्‍यवस्‍था भी दुरुस्‍त है। बियावाड़ में सीमेंट का सबसे ज्‍यादा उत्‍पादन किया जाता है। यहां पर आप वार्षिक तेजाजी मेले में राजस्‍थानी परंपरा का लुत्‍फ उठा सकते हैं।

बिलारा

बिलारा

इससे और आगे 73 किमी की दूरी पर स्थित है छोटा सा शहर बिलारा जोकि जोधपुर शहर के आगमन का प्रतीक है। यहां पर आप जसवंत सरार बााध पर कुछ समय बिता सकते हैं। नौ सती के मेले के दौरान गांव वासी बाणगंगा नदी में डुबकी लगाते हैं और इस मेले के दौरान कई तरह की क्रियाओं का आयोजन किया जाता है। यहां से जोधपुर 80 किमी की दूरी पर स्थित है।PC:Seervims

 जोधपुर में और इसके आसपास के प्रमुख दर्शनीय स्‍थल

जोधपुर में और इसके आसपास के प्रमुख दर्शनीय स्‍थल

ऊमैद भवन महल : ऊमैद भवन पैलेस को छित्तर पैलेस भी कहा जाता है क्‍योंकि इस महल के निर्माण के लिए छित्तर पहाड़ी से पत्‍थरों को लाया गया है। भारत द्वारा हाल ही में बनाए गए स्‍थानों में से एक है ये महल जिसे ऊमैद सिंह ने 1943 में अकाल से पीडित लोगों को रोज़गार दिलवाने के लिए बनवाया था।

वर्तमान समय में इस प्रतिष्ठित इमारत के तीन क्षेत्र हैं :

- शाही परिवार का निवास स्‍थल
- ह‍ेरिटेज होटल में परिवर्तित किया गया क्षेत्र
- एक संग्रहालय जहां महाराजा और उनकी जीवनशैली के विशाल धन का चित्रण करते हुए सभी कलाकृतियों को प्रदर्शित किया गया है।

PC:Ajajr101

मेहरानगढ़ किला

मेहरानगढ़ किला

मेहरानगढ़ किले को देखे बिना आपकी यात्रा अधूरी रहेगी। भारत के सबसे बड़े किलों में से एक है। यह शहर की सीमा से 400 फीट ऊपर बना है है और इसके भीतर कई महल हैं।

बॉलीवुड और हॉलीवुड फिल्‍म मेकर्स को ये किला काफी आकर्षित करता है। राठौड़ वंश की शाही जीवनशैली को आप यहां के संग्रहालय में देख सकते हैं। बुजुर्ग और विक्‍लांग लोगों के लिए भी इस किले को देखने के लिए अलग से व्‍यवस्‍था की गई है। इस शानदार महल में आपको कीमती कलाकृतियां, जटिल नक्काशियां और विलक्षण ऐतिहासिक मूल्यवान वस्‍तुएं देखने को मिलेंगीं।

चोकेलाओ महल टैरेस रेस्‍टोरेंट में कपल्‍स कैंडल लाइट डिनर का मज़ा ले सकते हैं। यहां से पूरे शहर का खूबसूरत दृश्‍य दिखाई देता है। यहां पर लो‍कप्रिय राजस्‍थान इंटरनेशनल लोक उत्‍सव और वर्ल्‍ड सूफी स्प्रिट फेस्टिवल देखना ना भूलें।

जसवंत ठाड़ा

जसवंत ठाड़ा

मेहरानगढ़ किले के पास ही स्थित है जसवंत ठाड़ा जहां से शहर का खूबसूरत नज़ारा दिखाई देता है। महाराजा जसवंत सिंह की याद में बनाया गया यह किला स्‍थापत्‍य कला का बेजोड़ नमूना है। यहां पर जेल, झरोखे, खंभों और मेहराबों पर सुंदर नक्‍काशी की गई है।PC:Sanyamgoyal007

थार रेगिस्‍तान में कैंपिंग और ऊंट की सफारी

थार रेगिस्‍तान में कैंपिंग और ऊंट की सफारी

अगर आपको रेगिस्‍तान में कैंपिंग के साथ-साथ बारबेक्‍यू और पारंपरिक संगीत और नृत्‍य का मज़ा लेना है तो आप थार रेगिस्‍तान में आ सकते हैं। थार की भूरी रेत में ऊंट पर सवारी करना बेहद अद्भुत अनुभव देता है। इस सन‍ सिटी में सूर्योदय और सूर्यास्‍त का भी बेहद मनोरम नज़ारा दिखाई देता है।PC:Ankur2436

क्‍लॉक टॉवर और पुरानी सिटी मार्केट

क्‍लॉक टॉवर और पुरानी सिटी मार्केट

जोधपुर के दिल में बसा है प्राचीन क्‍लॉक टॉवर। शॉपिंग के शौकीन लोगों के लिए यहां पर हाथ से बनी ज्‍वेलरी, बैग, पारंपरिक साडियां और अलग-अलग रंगों के कपड़े और मसाले आदि मिल जाएंगें।

राजस्‍थानी खाने का मज़ा लेना भी ना भूलें। मिश्रीलाल की लस्‍सी और मिठाई जरूर खाएं। शाम को यहां पर मसालेदार वाट का स्‍वाद कुछ अलग ही होता है। रहने के लिए यहां कई किफायती जगहें भी उपलब्‍ध हैं।

PC:Pradeep717

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