टूरिज्म या पर्यटन के आयाम बहुत ही विशाल हैं। जब भी कोई पर्यटक कहीं घूमने जा रहा होता है तो वो जाने से पहले इस बात का निर्धारण कर लेता है कि उसे अपने गंतव्य में क्या देखना है। हम इसे यूं भी समझ सकते हैं कि हर पर्यटक का अपना एक टेस्ट, एक स्वभाव होता है, जो उस व्यक्ति को ये बताता है कि उसे क्या पसंद है। कई पर्यटक ऐसे होते हैं जिन्हें प्रकृति और सुन्दर मनोरम दृश्यों से प्रेम है तो वहीँ दूसरी तरफ कई ऐसे होते हैं जो एडवेंचर के दीवाने हैं। इन सब से अलग कुछ पर्यटक ऐसे भी होते हैं जिन्हें आर्किटेक्चर, कला, नक्काशियों को देखने का शौक होता है।
अब अगर हम बात आर्किटेक्चर और कला कि करें और ऐसे में भारत के खूबसूरत महलों का वर्णन न हो तो बात अधूरी रह जाती है। जब भी आपने विशाल महलों कि कल्पना की होगी तो दुनिया के कुछ चुनिंदा महल ही आपके दिमाग में आये होंगे और उसमें भी विदेशों के महल जैसे लंदन का बकिंघम पैलेस, इटली का वैटिकन पैलेस, स्पेन का रॉयल पैलेस ऑफ मैड्रिड आदि। अब अगर हम आपसे ये कहें कि हमारे देश में एक महल ऐसा है जो अपनी खूबसूरती और बनावट के मामले में इन सभी महलों को मात देता है तो शायद आप हमारी बात पर यकीन न करें, लेकिन ये सच है।
जी हां, हम बात कर रहे हैं गुजरात के वडोदरा में स्थित लक्ष्मी विलास पैलेस की, बताया जाता है कि ये महल लंदन के बकिंघम पैलेस से आकार में चार गुना बड़ा और कहीं अधिक विशाल और विराट है। अपनी खूबसूरती और बेहतरीन वास्तुकला के चलते इस महल का शुमार दुनिया के सबसे खूबसूरत महलों में किया जाता है। इस महल का निर्माण 1890 में महाराजा सयाजीराव ने करवाया था। बताया जाता है कि इस महल के निर्माण के लिए राजा ने दो अंग्रेज़ अधिकारियों मेजर चार्ल्स मेंट, आरएफ चिसोल्म को नियुक्त किया था। इंडो-सारासेनिक परंपरा से बने इन महलों में आप भारतीय, इस्लामिक और यूरोपीय वास्तुशिल्प का मिला जुला रूप देख सकते हैं।
अगर इस राजमहल को आप ध्यान से देखें तो मिलेगा कि यहां पर पच्चीकारी टाइल्स, बहुरंगी संगमरमर, कई तरह की चित्रकलाएं, फव्वारों, और महल के प्रवेश द्वार पर ताड़ के पेड़ इस महल को एक अलग खूबसूरती देते हैं । शायद आपको जानकार आश्चर्य हो लेकिन उस समय भी इन महलों में एलिवेटर जैसे आधुनिक सुविधाएं थीं।
यहां के दरबार हॉल में फेलिसकी द्वारा संकलित किए गए कांसे, संगमरमर व टेरीकोटा की मूर्तियां और विलियम गोर्डलिंग द्वारा तैयार किए गए बागीचे को देखकर आप रोमांचित हो उठेंगे। राजमहल के अंदर स्थित मोती बाग महल और महाराजा फतेह सिंह म्यूजियम भी घूमने का एक अच्छा विकल्प मुहैया कराता है। मोती बाग महल के ठीक बगल में मोती बाग क्रिकेट मैदान है, जिसमें सौगान की सतह वाले टेनिस और बैडमिंटन कोर्ट है।
महाराजा फतेह सिंह म्यूजियम में राजा रवि वर्मा की पेंटिंग का विशाल संकलन है। ये सभी पेंटिंग महाराजा द्वारा मान्यताप्राप्त थे। इसके अलावा म्यूजियम में जापान, चीन और इटली के संगमरमर व कांसे से बनी मूर्तियां भी देखी जा सकती हैं। चीनी और जापानी मूर्तियों को महाराजा के द्वारा संकलित किया गया था, जबकि इटली की मूर्तियों को वहां के मूर्तिकार फेलिसकी के जरिए इकठ्ठा किया गया था। इस महल में घूमने के लिए महाराजा के सचिव से अनुमति लेनी पड़ती है।
तो अब जब भी आपका गुजरात जाने का प्लान बने तो वहां जाकर इस महल को देखना मत भूलियेगा। नीचे स्लाइड्स में देखिये लक्ष्मी विलास महल की कुछ चुनिंदा तस्वीरें।

लक्ष्मी विलास महल
ये महल लंदन के बकिंघम पैलेस से आकार में चार गुना बड़ा और कहीं अधिक विशाल और विराट है। अपनी खूबसूरती और बेहतरीन वास्तुकला के चलते इस महल का शुमार दुनिया के सबसे खूबसूरत महलों में किया जाता है।

लक्ष्मी विलास महल
इस महल का निर्माण 1890 में महाराजा सयाजीराव ने करवाया था।

लक्ष्मी विलास महल
इस महल के निर्माण के लिए राजा ने दो अंग्रेज़ अधिकारियों मेजर चार्ल्स मेंट, आरएफ चिसोल्म को नियुक्त किया था। इंडो-सारासेनिक परंपरा से बने इन महलों में आप भारतीय, इस्लामिक और यूरोपीय वास्तुशिल्प का मिला जुला रूप देख सकते हैं।

लक्ष्मी विलास महल का दरबार हॉल
यहां के दरबार हॉल में फेलिसकी द्वारा संकलित किए गए कांसे, संगमरमर व टेरीकोटा की मूर्तियां और विलियम गोर्डलिंग द्वारा तैयार किए गए बागीचे को देखकर आप रोमांचित हो उठेंगे।

लक्ष्मी विलास महल
राजमहल के अंदर स्थित मोती बाग महल और महाराजा फतेह सिंह म्यूजियम भी घूमने का एक अच्छा विकल्प मुहैया कराता है। मोती बाग महल के ठीक बगल में मोती बाग क्रिकेट मैदान है, जिसमें सौगान की सतह वाले टेनिस और बैडमिंटन कोर्ट है।



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