महाकुंभ की शुरुआत हो चुकी है। 13 जनवरी को पौष पूर्णिमा के दिन महाकुंभ मेले की शुरुआत हुई और मकर संक्रांति को पहला शाही स्नान व अमृत स्नान भी संपन्न हो चुका है। सोशल मीडिया पर महाकुंभ मेले से जुड़े कई वीडियो वायरल हो रहे हैं, जिसमें बताया जा रहा है कि शाही स्नान खत्म होने के बाद महाकुंभ मेला परिसर अब काफी खाली हो गया है।
बताया जा रहा है कि अगले शाही स्नान के समय फिर से महाकुंभ मेले में तीर्थ यात्रियों की भीड़ उमड़ेगी। तो अगर आप कम खर्च में और कम भीड़ का फायदा उठाते हुए महाकुंभ मेले में आस्था की पवित्र डुबकी लगाकर आना चाहते हैं, तो हम आपको यहां बजट फ्रेंडली ट्रैवल प्लान बता रहे हैं।

आप भले ही किसी भी शहर में हो, लेकिन अधिक से अधिक मात्र ₹800 में एक दिन के लिए प्रयागराज जाकर महाकुंभ मेले में आस्था की पवित्र डुबकी लगाकर अगले दिन वापस अपने घर जा सकते हैं। तो चलिए जान लेते हैं, कैसे कम से कम समय में महाकुंभ मेले में बजट फ्रेंडली तरीके से पवित्र डुबकी लगायी जा सकती है -
कैसे पहुंचे?
आप देश के किसी भी शहर में रहते हो, सीधे प्रयागराज चले आएं। उत्तर से लेकर दक्षिण तक और पूर्व से लेकर पश्चिम तक, वर्तमान में देश के सभी हिस्सों से भारतीय रेलवे महाकुंभ मेला स्पेशल ट्रेनों का संचालन कर रही है। ऐसे में आपको अपने शहर से प्रयागराज तक आने का खर्च ₹200 से ₹250 हो सकता है। प्रयागराज आने-जाने का कुल खर्च ₹400-₹500 हो सकता है। रास्ते में खाने-पीने में अगर फिजुलखर्जी नहीं करना चाहते हैं, तो घर का बना खाना लेकर चलें।
प्रयागराज जंक्शन पहुंचने के बाद 10 से 12 किमी का रास्ता पैदल चलकर आपको महाकुंभ मेला परिसर में पहुंचना होगा। स्टेशन से बाहर निकलने के बाद आपको मेला परिसर तक जाने के लिए किसी से दिशा-निर्देश पूछने की जरूरत नहीं होगी। भीड़ के साथ पैदल चलते हुए आप बड़ी आसानी से 10 किमी का रास्ता तय कर महाकुंभ मेला या त्रिवेणी संगम पर पहुंच सकते हैं।
रास्ते में हर जगह आपको साइन बोर्ड और विभिन्न घाटों के बारे में जानकारी देने वाले बोर्ड लगे दिखेंगे। इसलिए आपको न तो स्नान करने के लिए घाट ढूंढने में कोई परेशानी होगी और न ही स्टेशन से महाकुंभ मेला परिसर का रास्ता ढूंढना पड़ेगा। आप चाहे तो उसी दिन संगम में स्नान कर घर वापस जाने के लिए प्रयागराज स्टेशन का रुख कर सकते हैं।

कहां ठहरे?
अगर आप महाकुंभ मेले में एक रात रुकने का मन बनाकर आएं हैं तो पीपा पुल पार करें और किसी भी साधु अथवा बाबा के मुफ्त रैन बसेरा में रुक सकते हैं। मगर ध्यान रहें, किसी भी बाबा के मुफ्त रैन बसेरा में रात को सोने के लिए जगह ढूंढना घास के ढेर में सुईं ढूंढने जैसा हो सकता है।
अगर आपकी किस्मत अच्छी हुई तो आपको रैन बसेरा में रात गुजारने के लिए अच्छी जगह जरूर मिल जाएगी। लेकिन आप अगर अपनी पॉकेट ढीली कर कहीं रात गुजारने की जगह ढूंढना चाहते हैं तो विभिन्न अखाड़ों की शरण लें। बताया जाता है कि इन अखाड़ों में रात गुजारने की जगह आपको ₹1100 से लेकर ₹11000 तक में मिल जाएगी।
क्या खाएं?
महाकुंभ में खाने के लिए आपको कई होटल मिल जाएंगे, जहां आपको स्वादिष्ट और सात्विक भोजन मिल जाएगा। लेकिन खाने-पीने पर अगर आप खर्च नहीं करना चाहते हो तो आप विभिन्न साधु-सन्यासियों के मुफ्त लंगर में जाकर खा सकते हैं। महाकुंभ मेला परिसर में ऐसे कई लंगर रात-दिन चलते रहते हैं।
राज्य प्रशासन की तरफ से पीने के पानी के पाउच की व्यवस्था की गयी है, जो मेला परिसर में कई जगहों पर उपलब्ध है। इसके अलावा मेला परिसर में हर 100-200 मीटर की दूरी पर पेयजल का नल भी राज्य प्रशासन की तरफ से लगाया गया है।
अगले दिन अहले सुबह 3-4 बजे उठकर एक बार फिर त्रिवेणी संगम में डुबकी लगाएं और भीड़ के साथ चलते हुए वापस प्रयागराज जंक्शन से घर वापसी की ट्रेन पकड़ लें।
ध्यान दें
- अगर आप कम से 20 किमी पैदल चल सकते हैं, तभी महाकुंभ मेले में जाने के बारे में सोचे।
- प्रयागराज शहर में गाड़ियों की एंट्री पूरी तरह से बंद है। इसलिए समस्या होने के बावजूद आपको महाकुंभ मेला परिसर या मेला परिसर से स्टेशन तक पैदल ही आना पड़ेगा।
- अपने साथ कोई भी कीमती सामान लेकर न जाएं, क्योंकि यहां आपको खुले रैन बसेरा में ठहरना पड़ेगा न कि होटल के बंद और सुरक्षित कमरे में।
- जितना सामान आप खुद ढो सकें, सिर्फ उतना ही लेकर प्रयागराज का सफर शुरू करें।



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