प्रयागराज के संगमतट पर अगले साल आयोजित होने वाला है महाकुंभ मेला 2025। उत्तर प्रदेश सरकार इस मेले के आयोजन से जुड़ी सारी तैयारियों को युद्ध स्तर पर पूरा कर रही है। सिर्फ देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी महाकुंभ 2025 की चर्चाएं हो रही हैं और बड़ी संख्या में लोग इसमें शामिल होने के लिए प्रयागराज पहुंचने वाले हैं।
उत्तर प्रदेश की योगी सरकार इस भव्य आयोजन में किसी भी तरह की कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती है। बता दें, महाकुंभ मेला का आयोजन 13 जनवरी से होगा जो अगले 45 दिनों तक चलने वाला है।

चंद्रशेखर आजाद की 'बमतुल बुखारा' होगी मुख्य आकर्षण
जी हां, सही समझे। स्वतंत्रता सेनानी चंद्रशेखर आजाद, जिन्होंने यह प्रण लिया था कि चाहे जो हो जाए अंग्रेज उन्हें कभी भी जीवित नहीं पकड़ सकेंगे और हुआ भी ऐसा ही था। अब महाकुंभ मेले का मुख्य आकर्षण बनने वाली है उनकी 'बमतुल बुखारा'। पर क्या है यह 'बमतुल बुखारा'? चंद्रशेखर आजाद से कैसे जुड़ी है 'बमतुल बुखारा'? महाकुंभ मेला से कैसे जुड़ी है 'बमतुल बुखारा'?
क्या है 'बमतुल बुखारा'?
चंद्रशेखर आजाद की वो पिस्तौल, जिससे उन्होंने अंग्रेजों के छक्के छुड़ा दिए थे, उस पिस्तौल का नाम है 'बमतुल बुखारा'। यह नाम किसी और ने नहीं बल्कि चंद्रशेखर आजाद ने खुद अपनी पिस्तौल को दिया था। दरअसल, इस पिस्तौल से फायर होने पर धुआं नहीं निकलता था। इसलिए अंग्रेजों को यह समझ में नहीं आता था कि गोली आखिर किस तरफ से चली है। यह पिस्तौल इलाहबाद संग्रहालय में धरोहर के रूप में संरक्षित है। मीडिया रिपोर्ट्स से मिली जानकारी के अनुसार अब इसे महाकुंभ मेले में प्रदर्शित किया जाएगा, जहां पूरी दुनिया से आने वाले श्रद्धालु इस पिस्तौल की प्रतिकृति को देख सकेंगे।
महाकुंभ मेले में लगेगी प्रदर्शनी
इलाहबाद संग्रहालय के डेप्यूटि क्यूरेटर डॉ. राजेश मिश्रा ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि महाकुंभ मेले में हमारे देश के महान क्रांतिकारियों के जीवन से जुड़ी प्रदर्शनी आयोजित करने की योजना बनायी गयी है। राज्य सरकार महाकुंभ मेला परिसर में संग्रहालय को जगह मुहैया करवा रही है, जहां धरोहरों की प्रदर्शनी लगायी जाएगी। बताया जाता है कि इस प्रदर्शनी में चंद्रशेखर आजाद की पिस्तौल 'बमतुल बुखारा' के अलावा प्राचीन हथियार आदि की प्रतिकृति भी प्रदर्शित की जाएगी।

डॉ. मिश्रा ने बताया कि 'बमतुल बुखारा' (चंद्रशेखर आजाद की पिस्तौल) कोल्ट कंपनी की .32 बोर की हैमरलेस सेमी ऑटोमेटिक पिस्तौल थी। इसमें एक बार में 8 गोलियों की मैगजीन लगती थी। इस पिस्तौल को देखने के लिए बड़ी संख्या में इतिहासप्रेमी और पर्यटक प्रयागराज (इलाहबाद) संग्रहालय में आते रहते हैं।
बता दें, महाकुंभ मेले का आयोजन प्रयागराज के संगमतट पर 13 जनवरी से 26 फरवरी 2025 तक किया जाएगा। यानी यह मेला लगभग 45 दिनों तक चलने वाला है। हिंदु धर्म के मुताबिक इस मेले का काफी महत्व है। कहा जाता है कि महाकुंभ मेले में स्नान करने वाले व्यक्ति के सभी पाप धुल जाते हैं और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है।



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