महाकुंभ के लिए भारतीय रेलवे विशेष ट्रेन चला रही हैं। विभिन्न एयरलाइंस कंपनियां भी अतिरिक्त विमान सेवाएं दे रही हैं लेकिन ट्रेन में न तो कन्फर्म सीट मिल रही है और विमान का किराया आसमान छू रहा है। ऐसे में तीर्थ यात्रियों को प्रयागराज तक जाने में भारी परेशानी हो रही है। इस बात को ध्यान में रखते हुए बिहार राज्य परिवहन निगम (BSRTC) ने राजधानी पटना से प्रयागराज के लिए महाकुंभ स्पेशल बस सेवाओं की शुरुआत की है।
पटना से दिन में दो बसें प्रयागराज के लिए खुलेंगी। मीडिया रिपोर्ट से मिली जानकारी के अनुसार महाकुंभ स्पेशल ये बसें 28 फरवरी तक पटना से प्रयागराज के बीच चलेंगी।

चलिए महाकुंभ स्पेशल पटना-प्रयागराज बस सेवा के बारे में विस्तार से जान लें...
कितनी सीटें, रूट और बस स्टैंड
पटना से प्रयागराज के बीच शुरू हुई महाकुंभ स्पेशल बस में कुल 42 सीट हैं। यह बस पटना से आरा, मोहनिया और वाराणसी के रास्ते प्रयागराज तक चलेंगी। पटना के बांकीपुर बस स्टैंड और गांधी मैदान बस स्टैंड से ये दोनों बसें प्रत्येक दिन खुलेंगी।
किराया और Timing
पटना और प्रयागराज से इन बसों से रात भर की यात्रा के बाद तीर्थ यात्री अपने-अपने गंतव्यों तक पहुंच सकेंगे। ये बस पटना से रात को 8.30 बजे खुलेंगी जो प्रयागराज में अहले सुबह 4 बजे पहुंच जाएंगी। वहीं वापसी में, प्रयागराज से बस रात को 10 बजे खुलेगी जो पटना में अहले सुबह 5 बजे पहुंच जाएंगी। पटना-प्रयागराज महाकुंभ स्पेशल बस का किराया ₹550 प्रति व्यक्ति है।
कैसे करेंगे बुक?
पटना-प्रयागराज महाकुंभ स्पेशल बस की बुकिंग ऑनलाइन माध्यम से उपलब्ध नहीं है। इन बसों का टिकट यात्रियों को ऑफलाइन माध्यम से ही बुक करना पड़ेगा। यात्री बांकीपुर बस स्टैंड के टिकट काउंटर से इस बस का टिकट बुक कर सकते हैं। यात्रियों की सुविधा के लिए पटना बस स्टैंड से ही पटना से प्रयागराज और प्रयागराज से पटना के बस की बुकिंग की जा सकेगी।
बता दें, प्रयागराज में संगम तट पर 144 सालों के बाद महाकुंभ मेले की शुरुआत 13 जनवरी से हो चुकी है जो 26 जनवरी तक चलेगा। मेला को लेकर राज्य प्रशासन की तरफ से तीर्थ यात्रियों की सुविधा के तैयारियां की गयी हैं। लगभग 4000 हेक्टेयर में महाकुंभ मेला परिसर फैला हुआ है, जिसका आकार 7500 फुटबॉल मैदानों के बराबर है।
यात्रियों के ठहरने के लिए संगम तट पर टेंट सिटी बनायी गयी है जिसमें निःशुल्क से लेकर 10-15 हजार रुपए तक में टेंट उपलब्ध हैं। संगम तट पर विभिन्न आकार और बजट वाले करीब 1,50,000 टेंट बनाएं गये हैं। इसके साथ ही दिन-रात यहां भंडारे का आयोजन किया जा रहा है ताकि तीर्थ यात्रियों को खाने-पीने की कोई असुविधा न हो।



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