प्रयागराज में महाकुंभ मेला 2025 के मुख्य स्नान वाले दिन यानी मौनी अमावस्या के दिन जनसैलाब उमड़ पड़ा है। इसी वजह से देर रात को अचानक महाकुंभ मेला परिसर में भगदड़ मच गयी जिसमें काफी लोगों की जान चली गयी। हालांकि इस हादसे के तुरंत बाद प्रशासन हरकत में आ गया और अब मोर्चा नेशनल सिक्योरिटी गार्ड के जवानों ने संभाल लिया है।
इसके अलावा सुरक्षाबलों की अतिरिक्त कंपनियां भी तैनात कर दी गयी है। मीडिया रिपोर्ट से मिली जानकारी के अनुसार महाकुंभ मेले में बुधवार के तड़के भीड़ के दबाव की वजह से अचानक संगम के पास एक बैरिकेड टूट गया, जिसकी वजह से भगदड़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो गयी।

भगदड़ के बाद तगड़ी हुई व्यवस्थाएं
महाकुंभ में मची भगदड़ के बाद तुरंत बाद स्थिति को संभालने व सामान्य बनाने के लिए प्रशासन हरकत में आ गयी। व्यवस्थाओं को पहले अधिक सख्त किया गया है और अतिरिक्त सुरक्षाबलों के साथ-साथ अश्वारोही बलों को भी तैनात किया गया है।
बताया जाता है कि मौनी अमावस्या के मौके पर उमड़े श्रद्धालुओं के सैलाब को अब रोक-रोक कर स्नान के लिए घाटों की तरफ भेजा जा रहा है। इसके साथ ही न तो महाकुंभ मेला परिसर में या फिर घाटों के पास लोगों को बैठने दिया जा रहा है और न ही वहां उन्हें रुकने दिया जा रहा है। 8 नए एग्जिट प्वाएंट बनाए गये हैं, जिनसे लोगों को लगातार बाहर निकाला जा रहा है।
ट्रेनों को किया गया डायवर्ट
महाकुंभ में भगदड़ के इस हादसे के बाद प्रयागराज आ रही कई ट्रेनों को डायवर्ट कर दिया गया है। इसके साथ कई महाकुंभ स्पेशल ट्रेनों को अगले आदेश तक रद्द करने की घोषणा भी कर दी गयी है। बताया जाता है कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन से प्रयागराज आने वाली सभी विशेष ट्रेनों को अगले आदेश तक रोक दिया गया है, लेकिन दूसरी ट्रेनें सामान्य रूप से ही चल रही हैं।
हालांकि दूसरे रुट्स पर चलने वाली मेला स्पेशल ट्रेनें पहले जैसी ही चल रही हैं। इसके साथ ही प्रयागराज जंक्शन की सुरक्षा बढ़ा दी गयी है। यात्रियों की सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए रैपिड एक्शन फोर्स को तैनात किया गया है।

सीएम योगी की खास अपील
महाकुंभ मेले में मची भगदड़ के बाद परिस्थिति को सामान्य बनाने के लिए युद्धस्तर पर काम किया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी लगातार सीएम योगी के साथ संपर्क में बने हुए हैं। बताया जाता है कि हादसे की जानकारी मिलते ही पीएम मोदी ने 2 घंटे के अंदर लगभग 3 बार सीएम योगी से बात की और राहत व बचाव कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिये।
इस बीच सीएम योगी ने अपने आधिकारिक X हैंडल पर पोस्ट कर महाकुंभ आने वाले श्रद्धालुओं से विशेष अपील की है। अपने पोस्ट में उन्होंने लिखा है कि महाकुंभ मेला 2025 में श्रद्धालु जिस घाट के करीब हैं, वहीं स्नान करें। संगम नोज की तरफ बढ़ने का प्रयास न करें। कृपया प्रशासन के निर्देशों का पालन करें और व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करें।
अखाड़ों ने स्थगित किया स्नान
महाकुंभ में मौनी अमावस्या का स्नान ही मुख्य स्नान माना जाता है। लेकिन आज (29 जनवरी) को हुए हादसे की वजह से किसी अखाड़े ने शाही स्नान तो किसी ने शोभा यात्रा को स्थगित करने का फैसला लिया है। मीडिया रिपोर्ट से मिली जानकारी के अनुसार जूना अखाड़ा (जो सबसे बड़ा अखाड़ा है) के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि महाराज ने घोषणा की है कि आज (मौनी अमावस्या) का स्नान विश्व कल्याण के लिए था।
लेकिन जो हादसा हुआ, वह बेहद दुखद है। इसलिए हमने अपनी 'शोभा यात्रा' को स्थगित कर दिया है। वहीं निरंजनी अखाड़ा के प्रमुख कैलाशानंद गिरि महाराज ने अखाड़े के फैसले के बारे में बताया है कि आज हम स्नान नहीं करेंगे। अब हम वसंत पंचमी पर पवित्र स्नान करेंगे।

पहले भी 2 बार कुंभ में हो चुके हैं हादसे
कुंभ मेले के इतिहास पर अगर गौर किया जाए तो दो हादसे ऐसे रहे जिन्हें भुलाया नहीं जा सकता है। दोनों बार ही मौनी अमावस्या के दिन ही भगदड़ मची थी। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार इसमें से पहला हादसा साल 1954 को हुआ था, जब स्वतंत्र भारत का पहला कुंभ मेला आयोजित किया गया था। उस साल भी मौनी अमावस्या के दिन ही भगदड़ मच गयी थी।
बताया जाता है कि 3 फरवरी को मौनी अमावस्या के दिन त्रिवेणी बांध पर मची भगदड़ में लगभग 800 लोगों की जान चली गयी थी और 2000 से अधिक लोग घायल हो गये थे। उस समय मेला परिसर में तत्कालिन प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरु भी मौजूद थे। यह हादसा एक हाथी के बेकाबू हो जाने की वजह से हुआ था। दूसरा हादसा साल 2013 में हुए कुंभ मेले के दौरान प्रयागराज जंक्शन पर हुआ था।
10 फरवरी को मौनी अमावस्या के स्नान के बाद श्रद्धालु अपने घर वापस लौट रहे थे। शाम को अचानक अनाउंस किया गया कि ट्रेन दूसरी प्लेटफार्म पर आएगी। लोग ओवरब्रिज की तरफ भागे और अत्यधिक भार पड़ने की वजह से ब्रिज टूटकर गिर गया। इसमें कई लोग भीड़ में दब गये थे। बताया जाता है कि इस हादसे में लगभग 36 श्रद्धालुओं की मौत हो गयी थी और 50 से ज्यादा गंभीर रूप से घायल हो गये थे।



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