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जोधपुर की परित्यक्त विरासत: मंडोर बाग़!

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पौराणिक कथाओ के अनुसार कहा जाता है कि मंडोर मंदोदरी(रावण की पत्नी) का जन्म स्थान हुआ करता था। इतिहास में यह राठौर वंश की राजधानी हुआ करती थी। पर अब शायद इस विरासत स्थल की चमक खोती हुई प्रतीत होती है, जबसे राव जोधा ने जोधपुर शहर की खोज कर अपनी राजधानी मेहरानगढ़ किले में स्थानांतरित कर ली। तब ही से मंडोर बाग़ की महत्ता भी कुछ कम हो गई है।

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एक सच्चे वास्तुकला के प्रेमी के लिए ये जगह किसी जन्नत से कम नहीं होगी। वैसे यहाँ की सुन्दर वास्तुकला हर किसी को अपनी ओर खींची ले जाती है। हमारे ख्याल से शायद ही मंडोर बाग़ जोधपुर के पर्यटन स्थलों की सूचि में शामिल है। भले ही यह शहर के बीचो बीच स्थित है पर ऐसा लगता है कि इस ऐतिहासिक धरोहर का त्याग कर दिया गया है। एक अफवाह के अनुसार यहाँ के आसपास के निवासी इसे उल्टा किला भी कहते हैं, पर यहाँ के किले के उल्टे होने का ऐसा कोई सुबूत अब तक मिला नहीं है।

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तो चलिए आज हम मंडोर के ऐसे इतिहास की सैर पर चलते हैं जिसे सरकार द्वारा त्याग दिया गया है पर इसका आकर्षण और इसके अवशेष आज भी कई कहानियां बयां करते हैं।

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मंडोर का इतिहास

मंडोर का इतिहास

मंडोर का प्राचीन नाम 'मांडवपुर' हुआ करता था। राव जोधा ने मंडोर को असुरक्षित मानकर सुरक्षा के लिहाज से मेहरानगढ़ किले का निर्माण कर जोधपुर को बसाया था और अपनी राजधानी वहीं परिवर्तित कर दी थी।

Image Courtesy:Bahuln89

मंडोर का इतिहास

मंडोर का इतिहास

मंडोर मारवाड़ की पुरानी राजधानी रही है। ऐसा भी कहा जाता है कि मंडोर, लंकापति रावण का ससुराल होने की वजह से भी प्रसिद्द है।

Image Courtesy:Sandeep Kaul

मंडोर का इतिहास

मंडोर का इतिहास

यह सांप्रदायिक सद्भाव और एकता का प्रतीक भी है क्यूंकि यहाँ तनापीर की दरगाह, मकबरे, जैन मंदिर तथा वैष्णव मंदिर सभी एक ही क्षेत्र में देखने को मिलते हैं।

Image Courtesy:Nagarjun Kandukuru

मंडोर का इतिहास

मंडोर का इतिहास

यहाँ कई सदियों से होली के दूसरे दिन राव के मेले का आयोजन भी किया जाता है। मेले में निभाई जाने वाली कई परंपराएं और रीतियाँ सदियों से चली आ रही हैं।

Image Courtesy:Muthadarshan

मंडोर बाग़ के आकर्षण

मंडोर बाग़ के आकर्षण

आप मंडोर बाग़ के अंदर वास्तुकला के अद्भुत चमत्कार को देख कर आश्चर्यचकित रह जायेंगे।

Image Courtesy:G41rn8

मंडोर बाग़ के आकर्षण

मंडोर बाग़ के आकर्षण

यहाँ अजीत पोल, देवताओं की साल व वीरों का दालान, मंदिर, बावड़ी, जनाना महल, एक थम्बा महल, नहर, झील व जोधपुर के विभिन्न महाराजाओं के स्मारक बने हैं, जो स्थापत्य कला के बेजोड़ नमूने हैं।

Image Courtesy:G41rn8

मंडोर बाग़ के आकर्षण

मंडोर बाग़ के आकर्षण

राठौड़ वंश के राजाओं के स्मारक, मंडोर के किले और राजकीय संग्रहालय मंडोर बाग़ के प्रमुख आकर्षण हैं।

Image Courtesy:Nagarjun Kandukuru

मंडोर बाग़ के आकर्षण

मंडोर बाग़ के आकर्षण

यहाँ की सबसे दिलचस्प चीज़ें हैं यहाँ के दुर्ग में बने बड़े-बड़े प्रस्तर जिन्हें बिना किसी मसाले की सहायता से जोड़ा गया था।

Image Courtesy:Sankara Subramanian

मंडोर बाग़ के आकर्षण

मंडोर बाग़ के आकर्षण

यहाँ बने स्मारक ऐसे स्मृति चिन्ह हैं जो यहाँ के प्रमुख सदस्यों के लिए बनवाये गए थे। इन्हें खाली गुम्बद के नाम से भी जाना जाता है जिन्हें राजाओं और राज्य के कुछ महत्वपूर्ण शख़्सियतों की याद में बनवाये गये थे।

Image Courtesy:Nagarjun Kandukuru

मंडोर बाग़ के आकर्षण

मंडोर बाग़ के आकर्षण

महाराजा अजीत सिंह और महाराजा जसवंत सिंह के प्रमुख स्मारक या छतरी यहाँ की दो प्रमुख रचनाएँ हैं। आप महाराजा जसवंत सिंह के स्मारक से बाग़ के आसपास और यहाँ के वातावरण का शानदार दृश्य देख सकते हैं।

Image Courtesy:Sankara Subramanian

मंडोर बाग़ के आकर्षण

मंडोर बाग़ के आकर्षण

मंडोर किला मंडोर बाग़ के परिसर में ही स्थित है। किले की खूबसूरत और आलीशान रचना आपको विस्मित कर देगी।

Image Courtesy:Bahuln89

मंडोर बाग़ के आकर्षण

मंडोर बाग़ के आकर्षण

यहाँ एक संग्रहालय जिसे 'हॉल ऑफ़ हीरोज़(नायकों का कक्ष) कहा जाता है और एक मंदिर जो 33 करोड़ देवताओं को समर्पित है भी स्थापित हैं।

Image Courtesy:Vu2sga

मंडोर बाग़ के आकर्षण

मंडोर बाग़ के आकर्षण

'हॉल ऑफ हीरोज़' में चट्टान से दीवार में तराशी हुई पन्द्रह आकृतियां हैं जो हिन्दु देवी-देवतीओं का प्रतिनिधित्व करती हैं।

Image Courtesy:Nagarjun Kandukuru

परित्यक्त विरासत

परित्यक्त विरासत

दुर्भाग्य की बात है कि यह एक सुनसान विरासत है। सरकार ने इस ऐतिहासिक स्थल के संरक्षण के लिए कोई भी योजना नहीं बनाई है और किसी भी तरीके से इस पर ध्यान नहीं दिया है।

Image Courtesy:Nagarjun Kandukuru

परित्यक्त विरासत

परित्यक्त विरासत

अब तो मंडोर बाग़ बस बंदरों का घर बनकर रह गया है। आज यह जगह पूरी तरह से ध्वस्त अवस्था में पड़ी है और कोई भी किसी भी तरह की जानकारी के निशान यहाँ पर उपलब्ध नहीं हैं।

Image Courtesy:Nagarjun Kandukuru

परित्यक्त विरासत

परित्यक्त विरासत

पर यहाँ का इतिहास से जुड़ा एक खास आकर्षण आपको हर समय यहाँ की सुंदरता के दर्शन करने को पुकारेगा।

Image Courtesy:TL Thompson

महत्वपूर्ण दिशानिर्देश

महत्वपूर्ण दिशानिर्देश

कृपया अपने साथ किसी भी तरह के खाने की वस्तु ना लेकर जाएँ, जैसा कि यहां पर बंदरों का वास है इसलिए। अपने सामानों के साथ सुरक्षा बरतें।

Image Courtesy:TL Thompson

महत्वपूर्ण दिशानिर्देश

महत्वपूर्ण दिशानिर्देश

बाग़ का अंदरुनी भाग या परिवेश उतनी अच्छी तरह से संरक्षित नहीं रखा गया है।

Image Courtesy:TL Thompson

महत्वपूर्ण दिशानिर्देश

महत्वपूर्ण दिशानिर्देश

बाग़ के आसपास ही सड़कों पर कुछ छोटे-छोटे दुकान लगे हुए हैं जहाँ से आप कोई भी छोटी-मोटी चीज़ें निशानी के तौर पर खरीद सकते हैं।

Image Courtesy:Tak.aditya

महत्वपूर्ण दिशानिर्देश

महत्वपूर्ण दिशानिर्देश

जैसा कि हमने आपको बताया यहाँ जानकारी के लिए कोई भी सुचना बोर्ड यह जानकारी सम्बंधित चीजें नहीं हैं तो बेहतर होगा कि आप खुद ही पूरे जगह की सैर कर इसे बारीकी से जानें।

Image Courtesy:Nkansara

मंडोर बाग़ पहुँचें कैसे?

मंडोर बाग़ पहुँचें कैसे?

आप मंडोर सड़क यात्रा द्वारा आराम से पहुँच सकते हैं क्यूंकि यह जोधपुर शहर के बिलकुल केंद्र में स्थित है। आप कोई भी टैक्सी या ऑटोरिकशा बुक कर यहाँ तक पहुँच सकते हैं।

Image Courtesy:Kavita Morty

मंडोर बाग़ पहुँचें कैसे?

मंडोर बाग़ पहुँचें कैसे?

कहा जाता है कि मंडोर मांडवा का ही एक प्राचीन नगर है। जोधपुर के गठित होने तक यह ऐतिहासिक स्थल एक प्रमुख केंद्र हुआ करता था। बाद में जोधपुर के गठित हो जाने के बाद इसकी प्रमुखता खो गई और यह एक त्याग दिए गए नगर की तरह बन गया।

Image Courtesy:Vu2sga

मंडोर बाग़ पहुँचें कैसे?

मंडोर बाग़ पहुँचें कैसे?

मंडोर का मंडोर बाग़ आपको अद्भुत संरचनाओं के माध्यम से एक प्रमुदित इतिहास की सैर पर ले जायेगा।

Image Courtesy:TL Thompson

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