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खेल सामग्री और संगीत के उपकरण के अलावा और भी बहुत कुछ है उत्तर प्रदेश के मेरठ में

By Syedbelal

आज उत्तर प्रदेश का शुमार भारत के उन राज्यों में है जो अपनी अनोखी संस्कृति से देश दुनिया के पर्यटकों को अपनी तरफ आकर्षित कर रहा है। आज अपने इस आर्टिकल में हम आपको अवगत कराने जा रहे हैं उत्तर प्रदेश के एक बेहद प्रमुख डेस्टिनेशन मेरठ से जिसका शुमार भारत के प्राचीनतम शहरों में है और जिसका इतिहास सिंधु घाटी सभ्यता से जुड़ा हुआ है। उत्तरप्रदेश का मेरठ शहर विश्व का 63वां सबसे तेजी से बढ़ता शहरी क्षेत्र और भारत का 14वां सबसे तेजी से विकसित होता शहर है।

इस शहर में उत्तर भारत का एक प्रमुख सैनिक छावनी भी है। साथ ही यह कई औद्योगिक गतिविधियों का भी गढ़ है। देश में खेल सामग्री और संगीत के उपकरण का सर्वाधिक उत्पादन मेरठ में ही होता है। इसके अलावा विश्व में रिक्शा के सर्वाधिक उत्पादन का श्रेय भी मेरठ को ही जाता है। बात यदि मेरठ के आसपास के पर्यटन स्थल की हो तो आपको बताते चलें कि भारत के अन्य शहरों की तरह ही मेरठ में भी ढेर सारे मंदिर और धार्मिक स्थल हैं।

चंडी देवी मंदिर और मनसा देवी मंदिर में नवरात्रि के मौके पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। जामा मस्जिद में जहां मुस्लिम समुदाय के लोग पहुंचते हैं, वहीं जैन समुदाय श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में पूजा-अर्चना के लिए आते हैं। सेंट जॉन चर्च और सरधाना चर्च ईसाई समुदाय के आस्था का केन्द्र हैं। आइये इस आर्टिकल के जरिये मेरठ का विश्लेषण करें और जानें कि यहां आने वाला पर्यटक इस प्राचीन शहर में ऐसा क्या देख सकता है जिसका अनुभव उसे जीवन भर याद रहेगा।

बेसीलिका ऑफ आवर लेडी ग्रेसेस

मेरठ शहर से 19 किलोमीटर दूर स्थित बेसीलिका ऑफ आवर लेडी ग्रेसेस शहर का एक प्रमुख आकर्षण है। इस खूबसूरत में वर्जिन मेरी की पूजा होती है। इस चर्च के विषय में एक किवदंती ये है कि इस चर्च का निर्माण एक मुस्लिम महिला द्वारा करवाया गया था जो एक यूरोपीय सैनिक से प्रेम करती थी। कहा जाता है कि इस चर्च का शुमार उत्तर भारत के सबसे बड़े चर्चों में है।

गांधी बाग

शहर के एक प्रमुख मुख्य मार्ग के किनारे गांधी बाग पार्क मेरठ के बीचों बीच स्थित है। इसे कंपनी गार्डन के नाम से भी जाना जाता है और यहां बड़ी संख्या में स्थानीय लोग व टूरिस्ट हर शाम होने वाले म्यूजिकल फाउंटेन शो देखने के लिए आते हैं।इस पार्क का नामकरण महात्मा गांधी के नाम पर किया गया है और इसके विशाल क्षेत्र में पर्यटक घूमने का आनंद उठा सकते हैं। यह शहर की एक प्रमुख मिलने की जगह है, जहां शहर की भीड़-भाड़ से इतर शांति और सुकून मिलता है।

शहीद स्मारक

मेरठ में बना शहीद स्मारक सबसे पुराने युद्ध स्मारकों में से एक है। सफेद मार्बल से बना यह स्मारक 30 मीटर ऊंचा है और इसका निर्माण युद्ध में शहीद हुए भारतीय सिपाहियों को श्रद्धांजलि देने के लिए किया गया था। विशेषकर इसका संबंध 1857 में हुई आजादी की पहली लड़ाई से है। स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस के मौके पर काफी लोग इस स्मारक पर पहुंचते हैं और देश के लिए अपनी जान की कुर्बानी देने वाले स्वतंत्रता सैनानियों को श्रद्धांजलि देते हैं।

सूरज कुंड

1714 के आरंभ में एक स्थानीय व्यवसायी द्वारा बनवाया गया सूरज कुंड हिंदू समुदाय का एक प्रसिद्ध स्थान है। इसके बीच में स्थित तालाब को पहले अबू नाला द्वारा भरा जाता था, पर बाद में इसे गंगा नहर के पानी से भरा जाने लगा। हिन्दुओं के लिए यह स्थान इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां कई प्रचीन मंदिर पाए गए हैं।

हस्तिनापुर का जैन मंदिर

आपको बता दें कि हस्तिनापुर, कुरू राजवंश कि राजधानी था। इसी स्थान पर महाभारत का युद्ध लड़ा गया था। ज्ञात हो कि मौर्या राजा सम्राट सम्प्रति द्वारा यहां कई मंदिरों का निर्माण किया गया था जिसमें से आज कुछ ही यहां बचे हैं। यदि आप मेरठ में हों तो यहाँ के पनेश्वर जैन मंदिर के दर्शन करना न भूलें।

सेंट जॉन चर्च

सेंट जॉन चर्च को उत्तर भारत का सबसे पुराना चर्च होने का गौरव प्राप्त है। 19वीं सदी के आरंभ में इस चर्च का निर्माण ब्रिटिश सेना द्वारा मेरठ में पदस्थ ब्रिटिश सिपाही और अधिकारी के अध्यात्मिक और धार्मिक जरूरतों को ध्यान में रख कर किया गया था। चर्च का निर्माण विशिष्ट अंग्रेजी शैली में किया गया है और यह आकर्षक लॉन से घिरा हुआ है। स्थानीय लोग यहां नियमित रूप से आते हैं और विशेषकर रविवार को यहां खूब भीड़ उमड़ती है।

पर्यटन की दृष्टी से क्या है मेरठ में

कैसे जाएं मेरठ

फ्लाइट द्वारा : मेरठ से सबसे नजदीकी एयरपोर्ट दिल्ली में है। हालांकि शहर में हवाई पट्टी भी है, जिसका प्रयोग सिर्फ सरकारी अधिकारियों द्वारा किया जाता है।

रेल द्वारा : मेरठ में चार रेलवे स्टेशन है और दिल्ली व भारत के अन्य शहरों से यहां के लिए नियमित ट्रेन मिलती है।

सड़क मार्ग द्वारा : दिल्ली से 60 किमी दूर मेरठ के लिए 24 घंटे बस चलती है। यह शहर नेशनल हाइवे 58 पर स्थित है, जो इसे दिल्ली से जोड़ता है। वहीं नेशनल हाइवे 119 इसे उत्तराखंड से जोड़ता है।

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