बचपन से हम सबने जनरल नॉलेज में यहीं पढ़ा है कि दुनिया में चेरापूंजी ही है, जहां सबसे ज्यादा बारिश होती है। आज भी जब कहीं बहुत ज्यादा बारिश होती है तो लोगों यहीं बोलते हैं कि यह शहर तो चेरापूंजी बन गया है। लेकिन क्या आप जानते हैं, दुनिया में सबसे ज्यादा बारिश अब चेरापूंजी में नहीं होती है। तो फिर कहां होती है सबसे ज्यादा बारिश?

दुनिया के जिस जगह सबसे ज्यादा बारिश होती है, वह जगह भी हमारे भारत में ही है। मेघालय के एक गांव में अब सबसे ज्यादा बारिश होती है। यहां हालत तो ऐसी रहती है कि कभी-कभी लगातार 6 महीनों तक बारिश होती रहती है। इस गांव का नाम है मौसिनराम वीलेज।
आइए आपको मौसिनराम गांव के बारे में बताते हैं :
चेरापूंजी से कितनी कम बारिश होती है?
चेरापूंजी जिसे अब तक दुनिया का सबसे ज्यादा गीली जगह कहा जाता था, वहां की तुलना में मेघालय के मौसिनराम गांव में करीब 100 मिलीमीटर कम बारिश होती है। मौसिनराम गांव चेरापूंजी से महज 15 किमी दूर ही बसा हुआ है। इस जगह इतनी ज्यादा बारिश होती है कि इस गांव का नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में भी दर्ज किया जा चुका है।

किसी एक दिन में होने वाली बारिश की अगर तुलना की जाए तो संभव है चेरापूंजी में ज्यादा बारिश होती हो लेकिन अगर सालभर होने वाली बारिश का औसत निकाला गया तो मौसिनराम गांव में चेरापूंजी की तुलना में कहीं ज्यादा बारिश होती है। 1985 में मौसिनराम गांव में 26,000 मिलीमीटर बारिश हुई थी, जो अपने आप में रिकॉर्ड है। मौसिनराम गांव में साल भर में औसतन जितनी बारिश होती है, उतनी बारिश में रियो डी जेनेरियो का 30 मीटर ऊंचा क्राइस्ट स्टेच्यू के घुटने तक पानी भर जाएगा।
कैसा होता है मौसम?
मौसिनराम गांव का मौसम हमेशा नमी से भरा होता है। इसकी वजह से यहां सामान भी बहुत जल्दी ही खराब हो जाते हैं। अगर कोई व्यक्ति बिना छाता लिये घर से बाहर निकलता है तो उसका भींगना तय माना जाता है। इसलिए मौसिनराम गांव के लोग बिना छाता लिये घर से कभी भी बाहर नहीं निकलते हैं। लेकिन मौसिनराम गांव के लोग मार्केट में मिलने वाला कोई भी आम छाता इस्तेमाल नहीं करते हैं। इस गांव के लोग बांस से बना छाता, जिसे कनूप कहा जाता है, का इस्तेमाल करते हैं।

इसे वे अपने सिर पर टोपी की तरह पहनते हैं। यह छाता किसी गांव में अनाज को फटकने वाले सूप की तरह दिखता है जो उनके घुटनों तक लंबा होता है। इस वजह से गांव के लोग जब घरों से बाहर काम करते हैं तो कम से कम भींगते हैं। इस गांव में इतनी ज्यादा बारिश होती है कि यहां खेती की कोई संभावना ही नहीं होती है। लोग दूसरे शहरों से सामान लाकर बाजारों में बेचते हैं। बाजार में सभी सामानों को प्लास्टिक में मोड़ कर रखा जाता है ताकि नमी से खराब ना हो जाए। बड़े-बड़े दुकानों में तो सामानों को बेचने से पहले उन्हें ड्रायर से सुखाया भी जाता है।
आखिर क्यों होती है यहां इतनी बारिश?
जब दुनिया के सबसे ज्यादा बारिश होने वाली जगह के बारे में बात होती है, तो नाम चेरापूंजी या मौसिनराम गांव की होती है। लेकिन इसके साथ ही यह सवाल भी उठता है कि आखिर इस गांव में इतनी ज्यादा बारिश क्यों होती है? यहां साल के 6 महीने तो लगातार बारिश ही होती रहती है। कभी-कभी तो यहां 467" तक बारिश हो जाती है। यहां इतनी ज्यादा बारिश होने की वजह यहां की नदियां हैं। इस जगह के आसपास इतनी ज्यादा नदियां हैं कि हवा में हमेशा नमी बनी रहती है। ज्यादा बारिश होने की वजह से यहां के लोगों का रहन-सहन, खान-पान और परिधान सब कुछ काफी अलग होता है।
पेड़ों से बनता है नदियों पर पुल

मौसिनराम गांव व इसके आसपास के क्षेत्रों में इतनी ज्यादा बारिश होती है कि सड़कें काफी जल्दी टूटने लगती हैं। नदियों पर पुल का निर्माण भी किया जाता है लेकिन इतनी ज्यादा बारिश होने की वजह से तैयार होने के बाद कुछ दिनों के अंदर ही पुलों की स्थिति जर्जर हो जाती है। इस वजह से स्थानीय लोगों ने यहां पेड़ों और बांस से पुलों का निर्माण करना शुरू कर दिया है। बांस व पेड़ों से बने पुल सीमेंट से बने पुलों की तुलना में कहीं ज्यादा मजबूत और भार उठाने में सक्षम होते हैं और ये पानी में जल्दी खराब भी नहीं होते हैं। यहां बांस से बने पुल कई दशकों तक टिक जाते हैं।
गजब की है प्राकृतिक सुन्दरता

भारत में मानसून के आते ही चारों तरफ हरियाली की एक चादर सी बिछ जाती है। तो जरा सोचिए उस जगह के बारे में जहां साल भर बारिश होती रहती है और चारों तरफ से वह जगह नदियों से घिरा हो...तो। कुछ ऐसा ही शानदार नजारा मौसिनराम गांव की होती है। पहाड़ियों से नीचे गिरता पानी और कुहासे जैसा घना बादल...। इस गांव के पास ही मावजिम्बुइन की प्राकृतिक गुफाएं हैं, जो सेटैलैग्माइट की वजह से वजह से प्रसिद्ध हैं। यहां छत से टपकते स्लैग्माइट की वजह से गुफा की छत तक चूने का स्तंभ बन गया है। इसके अलावा प्राकृतिक सुन्दरता तो अलग ही लेवल की होती है।



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