यमुना अथॉरिटी एरिया के ज़ेवर में बन रहे नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को बनाने का काम काफी से पूरा किया जा रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स से मिली जानकारी के अनुसार एयरपोर्ट पर नेविगेशन और सर्विलांस उपकरणों को लगाने का काम शुरू हो चुका है।
टाटा प्रोजेक्ट एयरपोर्ट की टर्मिनल बिल्डिंग, एटीसी और रनवे का निर्माण कर रही है। दावा किया जा रहा है कि यह एयरपोर्ट एशिया का सबसे बड़ा और दुनिया का चौथा सबसे बड़ा एयरपोर्ट होगा। कब से शुरू हो सकता है इस एयरपोर्ट से विमानों का संचालन?

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक जेवर एयरपोर्ट अप्रैल माह तक यमुना एक्सप्रेसवे से जुड़ जाएगा। बताया जाता है कि इस एयरपोर्ट को तैयार करने के लिए दिन 24 घंटे लगातार 7 हजार से अधिक मजदूर व कर्मचारी काम कर रहे हैं। जेवर एयरपोर्ट को हाईस्पीड कनेक्टिविटी में भले ही थोड़ा समय लगे लेकिन इसे देश में सबसे बेहतर मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी बनाने की योजना बनायी गयी है।
मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो इस साल जून तक जेवर एयरपोर्ट का ट्रायल रन शुरू हो सकता है। उस समय तक एयरपोर्ट का लगभग 80% हिस्से का निर्माण कार्य पूरा हो जाएगा। इस साल सितंबर तक जेवर एयरपोर्ट के पहले चरण का काम पूरा हो जाएगा और सितंबर से ही विमान संचालन भी शुरू किया जा सकता है। हालांकि इस साल के अंत तक एयरपोर्ट को फुल ऑपरेशनल बनाने की योजना है।
क्या होंगी जेवर एयरपोर्ट की खासियतें
- 51 वर्ग किमी के क्षेत्र में फैला होगा एयरपोर्ट।
- पूरी तरह से बनने के बाद 6 रनवे होंगे, जिनका ऑपरेशन एक साथ होगा।
- हर साल 7 करोड़ यात्रियों तक को अपनी सेवा प्रदान करेगा।
- कार्गो टर्मिनल की क्षमता 20 लाख मीट्रिक टन होगी, जिसे बढ़ाकर 80 लाख मीट्रिक टन किया जाएगा।
- हर तरह की सुविधाओं से लैस हाईटेक एयरपोर्ट होगा।
- जेवर एयरपोर्ट पर एक साथ 178 विमान खड़े हो सकेंगे।
- इसमें करीब 186 एयरपोर्ट स्टैंड होंगे।

भारत नहीं एशिया का सबसे बड़ा एयरपोर्ट
वर्तमान समय में दिल्ली का इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट भारत का सबसे विशाल एयरपोर्ट है। लेकिन एक बार पूरी तरह से तैयार हो जाने के बाद नोएडा-जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट भारत ही नहीं, एशिया का सबसे विशाल एयरपोर्ट बन जाएगा। यह एयरपोर्ट 1300 हेक्टेयर के क्षेत्र में फैला होगा।
यह देश का पहला एयरपोर्ट होगा जिसे मल्टीमॉडल कार्गो हब की तरह बनाया जाएगा। एक बार तैयार होने के बाद एयरपोर्ट का संचालन शुरू कर दिया जाएगा और बाद में धीरे-धीरे इसका विस्तार जारी रहेगा।
दिल्ली एयरपोर्ट से भी अधिक रनवे
मिली जानकारी के अनुसार जेवर एयरपोर्ट पर शुरुआत में 2 रनवे बनाएं जाएंगे, लेकिन बाद में इसे बढ़ाकर 6 रनवे कर दिया जाएगा। इन सभी 6 रनवे को एक साथ ऑपरेट किया जाएगा। जब सभी 6 रनवे तैयार हो जाएंगे, तब जेवर का नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट भारत ही नहीं एशिया का सबसे बड़ा एयरपोर्ट बन जाएगा। बता दें, दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर 3 रनवे हैं।
कितनी होगी लागत
जेवर में बन रहे नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के निर्माण में करीब 10,500 करोड़ रुपए की लागत आयी है। बताया जाता है कि इस एयरपोर्ट के पहले चरण में वार्षिक 1.2 करोड़ यात्री इस एयरपोर्ट से होकर आवाजाही कर सकेंगे। लेकिन वर्ष 2040-50 तक जेवर एयरपोर्ट प्रति वर्ष लगभग 7 करोड़ यात्रियों को अपनी सेवाएं प्रदान करेगा।
जेवर एयरपोर्ट 51 वर्ग किमी के क्षेत्र में फैला होगा। अनुमान लगाया जा रहा है कि जेवर एयरपोर्ट के बन जाने के बाद लगभग 1 लाख से अधिक रोजगार के नये अवसर उत्पन्न होंगे। इस एयरपोर्ट के शुरू होने के बाद दिल्ली एयरपोर्ट पर भी दबाव कम होने लगेगा।



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