आपने आगरा में ताजमहल देखा होगा, जो विश्व के 7 अजूबों में से एक है। ताजमहल किसने बनवाया था या ताजमहल से जुड़े रोचक तथ्यों के बारे में भी सुना होगा। लेकिन क्या आपने कभी आगरा के किले के बारे में या उसके इतिहास के बारे में सुना है? आमतौर पर राजस्थान के किले ही सबसे ज्यादा मशहूर हैं लेकिन आगरा का किला जिसका नाम शहंशाह अकबर से जुड़ा हुआ है।

यह इंडो-इस्लामिक संरचना का शानदार नमूना पेश करता है। आगरा किले में भी कई ऐतिहासिक और साहसिक कहानियां दफ्न हैं। अगर आप आगरा में ताजमहल घूमने जाने का प्लान बना रहे हैं तो आगरा के किले में भी जरूर घूम कर आइए। उससे पहले जान लीजिए किसने बनवाया था आगरा का किला? कहां गया इस किले की शान मयूर सिंहासन और किसने चुराया उसमें जड़ा कोहीनूर का हीरा?
आगरा किले का इतिहास
इतिहासकारों का मानना है कि आज जिस स्थान पर आगरा का किला है, उसी स्थान पर 11वीं सदी में सिरकवार वंश के राजपूत राजाओं का बनवाया हुआ बादलगढ़ का किला हुआ करता था। यह किला मिट्टी और ईंटों से बनवाया गया था। 1080 में महमूद गजनवी ने बादलगढ़ के किले पर अपना कब्जा जमा लिया। 1487 में दिल्ली के सुल्तान सिकंदर लोदी ने बादलगढ़ के किले पर अपना अधिकार जमा लिया।

लेकिन इस समय तक यह किला एक खंडहर में तब्दिल हो चुका था। कहा तो यहां तक जाता है कि सिकंदर लोदी की मृत्यु भी इसी किले में ही हुई थी। अगले 9 सालों तक उनके बेटे इब्राहिम लोदी ने इस किले पर शासन किया लेकिन 1526 में पानीपत की पहली लड़ाई में मुगल शासक बाबर से लड़ते हुए वह मारा गया। इसके बाद लोदी वंश का शासन खत्म और मुगल शासन स्थापित हुआ।
अकबर ने करवाया जीर्णोद्धार
बादलगढ़ का किला अकबर तक पहुंचने से पहले कई बार हस्तांतरण के दौर से गुजरा। लेकिन इस किले पर सबसे पहला जिस मुगल बादशाह ने अपना अधिकार जमाया था, वह बाबर थे। दिल्ली के सिंहासन पर जब अकबर बैठे तो उन्होंने अपनी राजधानी आगरा में स्थानांतरित किया और बादलगढ़ किले का जीर्णोद्धार करवाया।

उस समय अकबर ने लाल बलुआ पत्थरों का खूब इस्तेमाल करवाया था। कहा जाता है कि उत्तर भारत के खदानों से उन्होंने करीब 4 हजार प्रीमियम क्वालिटी के बलुआ पत्थर मंगवाए थे। चूंकि अकबर की पत्नी जोधाबाई राजपूती हिंदू थी, इसलिए अकबर ने इस किले में कई हिंदू देवी-देवताओं के मंदिर भी बनवाए थे।
शाहजहां ने बनवाए संगमरमर के महल

अकबर के बाद जब आगरा का किले पर उनके पोते शाहजहां का शासन स्थापित हुआ तो उन्होंने किले की कुछ संरचनाओं को तुड़वाकर वहां फिर से निर्माण करवाया और इसके लिए उन्होंने संगमरमर का इस्तेमाल करवाया। कहा जाता है कि जिस तरह अकबर को लाल बलुआ पत्थर पसंद था उसी प्रकार शाहजहां को संगमरमर बेहद पसंद था। इस किले में आज भी संगमरमर का काफी काम देखने को मिलता है।
इसी किले में था मयूर सिंघासन और कोहिनूर
शाहजहां लग्जरी के काफी शौकिन माने जाते थे। इसलिए उन्होंने अपने लिए खास मयूर सिंघासन बनवाया था, जिसकी सुन्दरता और भव्यता देखते ही बनती थी। इसी सिंघासन में भारत का सबसे कीमती हीरा कोहिनूर भी जड़ा हुआ था। इस सिंघासन को बाद में लाल किले में स्थानांतरित कर दिया गया। फारसी शासक नादिर शाह ने जब भारत पर आक्रमण किया तो मयूर सिंघासन के साथ-साथ कोहिनूर का हीरा भी लूट लिया था।

कहा जाता है कि मयूर सिंघासन के एक हिस्से को तोड़कर नादिर शाह ने अपने 'नादेरी पिकॉक सिंघासन' में जोड़ा था, जो आज भी सेंट्रल बैंक ऑफ ईरान के राष्ट्रीय खजाने में रखा हुआ है। वहीं कोहिनूर फारस से होते हुए अंग्रेजों के पास पहुंचा जो अभी भी ब्रिटेन की पूर्व महारानी एलिजाबेथ द्वितीय के मुकूट में जड़ा हुआ है।
आगरा किले की खासियत
आगरा के किले की कई खासियतें हैं जो इसे दूसरे किलों से अलग बनाती है। आगरा किले के दक्षिण द्वार से प्रवेश करने पर मुख्य परिसर में प्रवेश करने वाला दरवाजा करीब 60° तक झुका हुआ है। इसे दुश्मनों और उनके भारी हाथियों व घोड़ों को रोकने के लिए ही झुकाया गया था।

इस द्वार पर दुश्मनों को रोकने के लिए गर्म तेल डालने की व्यवस्था भी की जाती थी। आगरा के किले में महिलाओं के रहने वाले महलों में कई तरह के कक्ष हैं, लेकिन उनमें सबसे खास उनका 'ड्रेसिंग रुम' है। इस कमरे को शीश महल भी कहा जाता है, क्योंकि इस महल की दीवारों पर हर तरफ बस शीशें ही लगे हुए हैं।



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