सोशल मीडिया पर Reels बनाने का शौक है लेकिन सारे बैकग्राउंड्स पुराने हो चुके हैं। किसी नये बैंकग्राउंड में Reels बनाकर वायरल होना चाहते हैं? या फिर स्ट्रीट फोटोग्राफी का शौक है...अगर ऐसा कोई शौक आपको भी है तो अपने सारे साजो-सामान के साथ Ready हो जाएं। राजस्थान की धार्मिक नगरी पुष्कर में इसी महीने दुनिया का सबसे बड़ा पशु मेला 'पुष्कर ऊंट मेला' शुरू होने वाला है। पुष्कर नगर जो पुष्कर झील के चारों तरफ बने 51 घाटों के इर्द-गिर्द ही फैला हुआ है।

कहा जाता है कि कार्तिक पुर्णिमा की रात को पुष्कर झील में डूबकी लगाने से सारे पाप धुल जाते हैं। कार्तिक पुर्णिमा को केंद्र में रखते हुए ही हर साल पुष्कर मेला या पुष्कर ऊंट मेला का आयोजन किया जाता है।
100 सालों से भी पुराना है इतिहास
स्थानीय लोगों के अनुसार पुष्कर ऊंट मेला जिसे पुष्कर मेला भी कहा जाता है, का इतिहास 100 सालों से भी अधिक पुराना है। यह मेला साल में एक बार लगता है जिसमें देशभर से लोग तो आते ही हैं लेकिन बड़ी संख्या में विदेशों से भी पर्यटक पुष्कर मेले का हिस्सा बनने के लिए यहां पहुंचते हैं। इस साल यह मेला 20 से 28 नवंबर 2023 को आयोजित होने वाला है।

पुराने दिनों में इस मेले को आयोजित करने का मुख्य उद्देश्य थार क्षेत्र से आने वाले व्यापारियों द्वारा पालतु पशुओं का व्यापार होता था। लेकिन आज यह मेला पर्यटन और मनोरंजन के प्रमुख साधन के तौर पर दुनियाभर में प्रसिद्धि पा रहा है। इस मेले का मुख्य आकर्षण झुला या खाने-पीने की दुकानें नहीं बल्कि मेला परिसर में ग्रामीणों द्वारा प्रस्तुत किया जाने वाला सांस्कृतिक कार्यक्रम, धार्मिक अनुष्ठान, रेगिस्तान में होने वाला नृत्य-संगीत के कार्यक्रम होते हैं।
पुष्कर मेले की खासियत
पुष्कर मेला या पुष्कर का ऊंट मेला, ऐसा मेला होता है जहां बड़ी संख्या में पालतु पशुओं की खरीदारी होती है। पर्यटकों के लिए इतनी बड़ी संख्या में पालतु पशुओं का व्यापार देखना एक बेहद रोमांचक अनुभव होता है। इसके साथ ही यह मेला लोगों को धार्मिक अनुष्ठानों, पारंपरिक राजस्थानी व्यंजनों को चखने और राजस्थानी संस्कृति को करीब देखने और अनुभव करने का मौका भी देती है।

अगर आपको अपने घरों को लोकल और हैंडीक्राफ्ट के सामानों से सजाने का शौक है तो यह मेला आपके काम की जगह है। पुष्कर से आप ताजे गुलाब के फूलों से बना गुलकंद खरीदना बिल्कुल मिस मत करिए। मेले में व्यापारी अपनी ऊंटों को चटख रंगों में बहुत आकर्षक तरीके से सजाकर लाते हैं, जो दूर से देखने में ही इतने सुन्दर लगते हैं कि आपका थोड़ी देर रुककर इन्हें देखने का मन जरूर होगा। पुष्कर मेला में एंट्री फीस नहीं लगती है। यहां पर्यटक निःशुल्क प्रवेश कर मेले का लुत्फ उठा सकते हैं।
मेले में होने वाली Special Activities

- ऊंटों की रेस
- ऊंटों का डांस परफॉर्मेंस
- फोक म्यूजिक
- फोक डांस परफॉर्मेंस
- मुंछों की प्रतियोगिता
- कैंपिंग
- हॉट एयर बलून की सवारी
- डेजर्ट सफारी
फोटोग्राफी और Reels बनाने का बैकग्राउंड
सोशल मीडिया की बढ़ती लोकप्रियता के साथ ही पुष्कर मेला की खासियतों में शानदार फोटोग्राफी और Reels बनाने का बहुत सुन्दर बैकग्राउंड भी जुड़ गया है। दरअसल, राजस्थानी संस्कृति ही काफी रंग-बिरंगी होती है। इसलिए राजस्थान के हर कोने में आपको ढेर सारे रंग बिखरे नजर आएंगे।

पुष्कर मेले में हजारों की संख्या में ऊंटों को चटख और चमकिले रंगों वाली झालर और चादर से सजाया जाता है, जो दूर से बहुत सुन्दर बैंकग्राउंड जैसे दिखते हैं। मेला के आसापास घरों की दीवारों पर भी ढेर सारे रंगों से बहुत सुन्दर कलाकारी भी की जाती है। इसलिए अगर आप मॉडलिंग, स्ट्रीट फोटोग्राफी या फिर Reels बनाने के प्रति Passionate हैं और भारतीय संस्कृति के बैंकग्राउंड में फोटोग्राफी या Reels बनाना चाहते हैं तो आपको पुष्कर मेला में जरूर आना चाहिए।
पुष्कर में जरूर Try करें ये व्यंजन

- रबड़ी वाले मालपुए
- प्याज की कचौरी
- राजस्थानी थाली
- ताजे गुलाब के फूलों से बने गुलकंद की लस्सी
कैसे पहुंचे पुष्कर
पुष्कर सड़क और रेलमार्ग से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। अगर आप विमान से जाना चाहते हैं तो नजदीकी एयरपोर्ट जयपुर एयरपोर्ट है। जयपुर एयरपोर्ट से पुष्कर के लिए प्राइवेट गाड़ी या फिर टैक्सी आसानी से मिल जाएगी। पुष्कर से जयपुर एयरपोर्ट की दूरी करीब 150 किमी है, जिसे तय में लगभग 3.30 घंटों का समय लगता है। पुष्कर का नजदीकी रेलवे स्टेशन पुष्कर टर्मिनस और अजमेर जंक्शन है।

अजमेर से पुष्कर की दूरी 14 किमी और मेला परिसर से पुष्कर टर्मिनस की दूरी 2.5 किमी है। पुष्कर सड़क मार्ग से अजमेर, भीलवाड़ा, जयपुर, पाली, जोधपुर, कोटा और बीकानेर शहरों से सड़क मार्ग से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है।



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