अपनी बेगम मुमताज महल की याद में बादशाह शाहजहां ने उत्तर प्रदेश के आगरा में ताजमहल का निर्माण करवाया था। इस शाही मकबरे को प्रेम की निशानी के तौर आज पूरी दुनिया में पहचान मिली हुई है। इसे दुनिया का 7वां अजूबा माना गया है लेकिन क्या आप राजस्थान में ताजमहल का दीदार करना चाहते है?

ताजमहल अगर मुगल शैली ना बनकर राजस्थानी शैली में बना होता तो कैसा दिखता, यह जानना चाहते हैं? इसके लिए आपको AI (Artificial Intelligence) का सहारा लेने की जरूरत नहीं है। बस आपको राजस्थान के जोधपुर में पहुंचना होगा।
मेवाड़ का ताजमहल
ब्लू सिटी जोधपुर, जो झील और हरे-भरे पेड़ों से घिरा है, यहां आने वाले सैलानियों को काफी आकर्षित करता है। इसी शहर में मौजूद है राजस्थानी शैली में बनी स्मारक जिसे मेवाड़ का ताजमहल भी कहा जाता है। इस स्मारक का नाम 'जसवंत थड़ा' है। आगरा के ताजमहल से अगर जसवंत थड़ा की तुलना की जाए तो दोनों में जो सबसे बड़ी समानता है, कि दोनों ही स्मारकों का निर्माण शुद्ध संगमरमर से किया गया है।

लेकिन ताजमहल की तरह यहां सिर्फ सफेद संगमरमर का इस्तेमाल नहीं किया गया है बल्कि यहां लाल रंग के संगमरमर भी लगाए गये हैं जो इसकी सुन्दरता में चार चांद लगा देते हैं। जसवंत थड़ा का निर्माण 1899 में करवाया गया था।
क्या है इसका इतिहास
जसवंत थड़ा का निर्माण जशवंत सिंह द्वितीय के पुत्र महाराजा सदर सिंह ने करवाया था। इस स्मारक का नाम जशवंत सिंह द्वितीय की याद में किया गया था, जो जोधपुर के 33वें राठौड़ शासक थे। जानकारी के मुताबिक उस समय इसे बनाने में कुल खर्च करीब 2 लाख 84 हजार रुपये आया था।

जसवंत थड़ा में छोटे-छोटे गुंबद बने हुए हैं, जो इसकी शान बढ़ाते हैं। इस स्मारक के अंदर मेवाड़ के राजाओं की तस्वीरें काफी सुन्दर तरीके से सजायी हुई है। इन तस्वीरों को देखकर आप उस समय शाही परिवारों के रहन-सहन और श्रृंगार के तरीकों को आसानी से समझ सकते हैं।
क्या खास है यहां
जसवंत थड़ा पहुंचते ही आपका स्वागत स्थानीय लोक कलाकार करते हैं। जो इस जगह की ऐतिहासिकता को बताते हैं। स्मारक के अंदर काफी सुन्दर नक्काशी और कलाकृतियां दिखेंगी। इसके अलावा ताजमहल की तरह ही जसवंत थड़ा के आसपास में भी आपको स्तंभ और महराब दिखेंगे। जसवंत थड़ा के अंदर आपको कुछ ऐसी पेंटिंग्स भी देखने को मिलेगी जिसे मेवाड़ के शुरुआती शासकों ने बनाया था।

शानदार वास्तुकला के साथ-साथ इस स्मारक से थोड़ी दूर पर ही आपको एक झील दिखेगी। ठीक उसी तरह जैसी ताजमहल के बगल से होकर यमुना बहती है। जसवंत थड़ा में एक बड़ा सा लॉन है, जहां बैठने की जगहें भी हैं। स्मारक के अंदर एक हिस्से में श्मशान है, जहां किसी समय शाही परिवार के लोगों का अंतिम संस्कार किया जाता था। यहां अंतिम संस्कार में इस्तेमाल हुई जली लकड़ियां भी रखी हुई हैं। इस जगह का इस्तेमाल आज भी मारवाड़ के शाही परिवार के श्मशान घाट के तौर पर किया जाता है।
जसवंत थड़ा की यात्रा के टिप्स

- जसवंत थड़ा जोधपुर के मेहरानगढ़ किले के पास ही मौजूद है।
- यहां तक पहुंचने के लिए पहाड़ी पर थोड़ी सी चढ़ाई करनी पड़ती है।
- जसवंत थड़ा हर रोज सुबह 9 बजे से शाम को 6 बजे तक खुला रहता है।
- यहां आने वाले पर्यटकों को ₹30 प्रति व्यक्ति टिकट खरीदना पड़ता है। कैमरा के लिए ₹25 और वीडियो कैमरा के लिए ₹50 की टिकट अलग से लेनी पड़ती है।
- जसवंत थड़ा में घूमने में आपको 1-2 घंटों का समय लग सकता है।
- यहां आते समय अपने साथ सनग्लास, पानी की एक बोतल और धुप से बचने के लिए छाता या टोपी जरूर रखें।
कैसे पहुंचे जसवंत थड़ा

जसवंत थड़ा राजस्थान के जोधपुर में है, जो एक बड़ा शहर है। विमान से आने पर जोधपुर एयरपोर्ट से आपको जसवंत थड़ा के लिए किराए पर गाड़ियां व ऑटो या प्री-पेड टैक्सी भी मिल जाएंगी। जोधपुर एयरपोर्ट से जसवंत थड़ा की दूरी लगभग 8 किमी की है। ट्रेन से आने पर नजदीकी रेलवे स्टेशन जोधपुर ही है। इसके अलावा सड़क मार्ग से भी जोधपुर देश के विभिन्न शहरों, खास तौर पर दिल्ली से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। जोधपुर में ठहरने के लिए कई होटल और घूमने के लिए आपको कई और जगहें भी मिल जाएंगी।



Click it and Unblock the Notifications














