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क्या है अयोध्‍या की सरयू नदी का इतिहास और उसके 19 घाटों के नाम?

सरयू नदी के किनारे स्थित अयोध्या नगरी जिसे भगवान श्रीराम की जन्मभूमि कहा जाता है, में नवनिर्मित भव्य मंदिर में रामलला की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा का समारोह बस कुछ ही दिनों में शुरू होने को है। इसे लेकर सभी तैयारियां अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंचने वाली है। जिस नदी के किनारे बसे अयोध्या नगरी को लेकर उत्सव का माहौल बना हुआ है, आइए आपको उसी सरयू नदी के इतिहास और उसके किनारे स्थित सभी 19 घाटों से परिचित करवाते हैं।

history of sarayu river

सरयू नदी का भूगोल

यह नदी उत्तराखंड में शारदा नदी से समुद्र तल से 3000 फीट की ऊंचाई से निकलती है। इसकी कुल लंबाई 130 किलोमीटर है। सरयू की दो उपननिदयां हैं- गोमती और रामगंगा। करीब 50 किलोमीटर तक यह उत्तराखंड के पहाड़ों के बीच बहती है। यह नदी अलमोड़ा, पिथौरागढ़ से होते हुए उत्तर प्रदेश (UP) में आती है और आगे अयोध्‍या को छूते हुए नेपाल बॉर्डर तक जाती है।

सरयू नदी का इतिहास

डॉ. राम मनोहर लोहिया विश्‍वविद्यालय, फैजाबाद के इतिहास विभाग के डॉ. प्रेमनाथ पांडेय ने सरयू नदी पर शोध किया है, जिसके बारे में हम आगे बता है।

उनके के रिसर्च के अनुसार प्राचीन काल में अयोध्या कोसल जनपद की राजधानी थी। वाल्मीकि के अनुसार कोसल सरयू के दोनो किनारों पर बसा हुआ एक धनधान्य सम्पन्न शहर था। उसकी राजधानी अयोध्या बारह योजन लम्बी और तीन योजन चौड़ी थी। इस लम्बाई चौडाई को थोड़े से हेर-फेर के साथ वर्तमान फैजाबाद जिले की सीमा के साथ मिलाया जा सकता है। पूरब में आजमगढ़ से लेकर पश्चिम में बाराबंकी तक फैजाबाद जिले की लम्बाई वही है जो रामायण में अयोध्या की बतायी गयी है ।

उत्तर में सरयू से लेकर दक्षिण में बिसुई नदी तक की चौड़ाई वही है जो अयोध्या की चौड़ाई बताई गयी है। आजकल बिसुई नदी सुल्तानपुर जिले से निकल कर फैजाबाद जिले की सीमा बनाती हुई फैजाबाद- इलाहाबाद (प्रयागराज) रेलवे लाइन को खजुरहट स्टेशन से दो मील की दूरी पर काटती हुई अकबरपुर के पास मड़हा मे मिल जाती है और वहाँ उसे टोंस या तमसा कहते है।

sarayu river and its ghats

पुराणों में वर्तमान मानव सभ्यता का आरम्भ महाराज मनु से स्वीकार किया गया है। वाल्मीकि के समय से अब तक विश्वास चला आ रहा है सर्वप्रथम उन्होंने अपने पुत्र इक्ष्वाकु के लिए अयोध्या का निर्माण किया था उनकी चौसठवीं पीढ़ी में मर्यादा पुरूषोत्तम श्रीराम का जन्म हुआ। उनकी जन्मभूमि होने का गौरव पाकर अयोध्या धन्य हो गई। हिन्दुओं ने उसे अपना प्रसिद्ध तीर्थ माना।

सात मोक्षदायिनी पुरियों में सबसे पहले अयोध्या की गणना गयी है। उसे सर्वतीर्थ रूपी भगवान विष्णु का मस्तक कहा गया। उसके असाधारण महत्व की ओर आकृष्ट होकर पहले जैन और बौद्ध धर्मावलम्बियों ने तत्पश्चात् मुसलमानों ने अपने-अपने धर्मो का प्रचार करने के लिए उसे अपना केन्द्र बनाया। सम्प्रति वह हिन्दुओं का प्रसिद्व तीर्थ है। चैत्र सावन एवं कार्तिक मास में भारतवर्ष के कोने-कोने से हजारो-लाखो तीर्थयात्री यहाँ आकर सरयू के पवित्र जल में स्नान करके मन्दिरों के दर्शन करके अपने को कृतकृत्य समझते हैं।

सरयू और मिस्र की नील नदी में समानता

नदियों के तट पर घाट बनाने की परम्परा प्राचीन काल केवल भारत प्रत्युत् विश्व के परिप्रेक्ष्य में दिखाई देता है। कहना गलत नहीं होगा कि नील नदी के तट पर, मिस्त्र के तट पर, मिस्त्र की संस्कृति दजला एवं फरात के मध्य भू-भाग में मेसोपोटामिया एवं वेलीलोनिया की संस्कृति परिलक्षित होती है।

भारतवर्ष में सिन्धु नदी के तट पर सैन्धव संस्कृति। अधिकांश नगरों की स्थापना नदी तट पर हुई। गंगा नदी तट पर जहाँ एक तरफ प्रयाग एवं हरिद्वार, वही दूसरी तरफ गोमती नदी के तट पर लखनऊ, सुल्तानपुर आदि नगरों की स्थापना अत्यन्त महत्वपूर्ण है।

list of 19 ghats of saryu river

महाकाव्य रामायण में सरयू नदी का कई बार उल्लेख किया गया है। सरयू निचली घाघरा को संदर्भित करती है, जो भगवान राम की जन्मस्थली अयोध्या शहर से होकर बहती है। भगवान राम अयोध्या के निवासियों के साथ इस नदी से होकर वैकुंठ लोक गए और बाद में स्वर्ग में पहुंच गए। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, लक्ष्मण की पत्नी उर्मिला ने सरयू नदी में डूबकर जलसमाधि ले ली थी और ऐसा माना जाता है कि उनकी आत्मा को भगवान राम के चरणों में मोक्ष प्राप्त हुआ था।

सरयू नदी के घाटों की सूची

1. गोप्रतारघाट
2. यमस्थला घाट ( जमथरा )
3. चक्रतीर्थ घाट
4. प्रह्लाद घाट
5. सुमित्रा घाट
6. कौशिल्या घाट
7. कैकेयी घाट
8. राजघाट
9. ऋणमोचन घाट
10. पापमोचन घाट
11. गोला घाट
12. लक्ष्मण घाट
13. विल्वहरि घाट
14. चन्द्रहरि घाट
15. नागेश्वरनाथ घाट
16. वासुदेव घाट
17. जानकी घाट
18. राम घाट
19. स्वर्गद्वार घाट

सरयू नदी से जुड़ी यह जानकारी आपको कैसी लगी, हमें कमेंट करके जरूर बतायें। वैसे इसमें कोई दो राय नहीं है कि एक वृहद इतिहास को संजोय हुई यह नदी भविष्‍य में भारत को बड़ी आर्थिक शक्ति बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली है, क्योंकि राज जन्म भूमि मंदिर के निर्माण के बाद दुनिया भर से लोग यहां आयेंगे और इस पवित्र नदी में स्नान करेंगे।

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