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ज़रा संभल कर जाइयेगा किराडू मंदिर के दर्शन करने, कहीं आप पत्थर के न बन जाएँ!

भारत में आप शायद ही कोई ऐसी ऐतिहासिक या धार्मिक प्राचीन रचना पाएंगे, जिसका किसी अभिशाप, डरावनी कहानी या किसी महिमा से सम्बन्ध नहीं होगा। चाहे वह भगवान शिव जी का वरदान हो, जो वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर को मिला हुआ है या फिर अभिशाप ही हो जो पुणे के शनिवारवाड़ा के किले को मिला हुआ है।

आपने भानगढ़ की रहस्यमयी कहानियां तो सुनी ही होंगी और वृंदावन के निधि वन का अनसुलझा रहस्य? चलिये, ऐसी ही कई सारी रहस्यमयी घटनाओं को अपने में समेटे हुए, आज हम बात करते हैं राजस्थान के किराडू मंदिर की।

Kiradu Temple

किराडू मंदिर
Image Courtesy: Hansmuller

कहते हैं कि राजस्थान के बाड़मेर के पास एक ऐसा गांव है, जहां के मंदिरों के खंडहरों में रात में कदम रखते ही लोग हमेशा-हमेशा के लिए पत्थर बन जाते हैं। यह कोई शाप है, जादू है, चमत्कार है या भूतों की हरकत- कोई नहीं जानता। हालांकि किसी ने यह जानने की हिम्मत भी नहीं की, कि क्या सच में यहां रात में रुकने पर वह पत्थर बन जाएगा?

कोई कहता है कि, इस शहर पर किसी भूत का साया है, तो कोई कहता है कि इस शहर पर एक साधु के शाप का असर है, यहां के सभी लोग उसके शाप के चलते पत्थर बन गए थे और यही वजह है कि आज भी उस शाप के डर के चलते लोग वहां नहीं जाते हैं। लोगों में यहाँ का डर इस तरह कहर कर गया है कि, इसके रहस्य को उजागर करने के लिए कोई भी इस जगह पर जा रिस्क लेने को तैयार नहीं है।

Kiradu Temple

किराडू मंदिर

बाड़मेर (राजस्थान) का किराडु शहर, आज भी कई अनसुलझे रहस्यों को अपने में दफ़न किये हुए है। कहते हैं कि एक समय था, जब यह स्थान भी आम जगहों की तरह चहल-पहल से भरा था और लोग यहां खुशहाल जीवन जी रहे थे। यहां हर तरह की सुख-सुविधाएं मौजूद थीं, लेकिन एक दिन अचानक इस शहर की किस्मत बदल गई। या कहना चाहिए कि इस गाँव का काल उसके सामने आ गया और सभी अपना जीवन खो बैठे।

यह लगभग 900 साल पहले की बात है, जब यहां परमारों का शासन था, एक साधु ने पूरे गाँव को श्राप दे पत्थर में बदल दिया। कथानुसार, इस शहर में एक सिद्ध संत(साधु) ने डेरा डाला। कुछ दिन रहने के बाद जब वे संत तीर्थ भ्रमण पर निकले तो, उन्होंने अपने साथियों व शिष्यों को स्थानीय लोगों के सहारे छोड़ दिया कि, आप इनको भोजन-पानी देना और इनकी रक्षा करना।

Kiradu Temple

किराडू मंदिर

साधू के जाने के बाद उनके सारे साथी व शिष्य बीमार पड़ गए, जिनकी बस एक कुम्हारिन को छोड़कर अन्य किसी भी व्यक्ति ने सहायता नहीं की। बहुत दिनों के बाद जब संत पुन: उस शहर में लौटे तो उन्होंने देखा कि, मेरे सभी शिष्य व साथी भूख से तड़प रहे हैं और वे बहुत ही बीमार अवस्था में हैं। यह सब देखकर संत को बहुत क्रोध आया। उस सिद्ध संत ने कहा कि जिस स्थान पर साधुओं के प्रति दयाभाव ही नहीं है, तो अन्य के प्रति क्या दयाभाव होगा? ऐसे स्थान पर मानव जाति को नहीं रहना चाहिए। उन्होंने क्रोध में अपने कमंडल से जल निकाला और हाथ में लेकर कहा कि, जो जहां जैसा है, शाम होते ही पत्‍थर बन जाएगा। उन्होंने संपूर्ण नगरवासियों को पत्थर बन जाने का शाप दे दिया।

Kiradu Temple

क्षतिग्रस्त किराडू मंदिर

जिस कुम्हारिन ने उनके शिष्यों की सेवा की थी, साधु ने उसे शाम होने से पहले यहां से चले जाने को कहा और यह भी सचेत किया कि पीछे मुड़कर न देखे। कुम्हारिन शाम होते ही वह शहर छोड़कर कर जाने लगी, लेकिन जिज्ञासावश उसने पीछे मुड़कर देख ही लिया और कुछ दूर चलकर वह भी पत्थर बन गई। इस शाप के चलते पूरा गांव आज भी पत्थर का बना हुआ है। जो जैसा काम कर रहा था, वह तुरंत ही वैसा ही पत्थर का बन गया।

इस शाप के कारण, आस-पास के गांव के लोगों में भी दहशत फैल गई, जिसके चलते आज भी लोगों में यह मान्यता है कि, जो भी इस शहर में शाम को कदम रखेगा या रुकेगा, वह भी पत्थर का बन जाएगा।

Kiradu Temple

किराडू मंदिर की वास्तुशैली

किराडु के मंदिरों का निर्माण किसने कराया इस बारे में कोई तथ्य मौजूद नहीं है। यहां पर 12वीं विक्रम शताब्दी के तीन शिलालेख स्थित हैं। पहला शिलालेख विक्रम संवत 1209 माघ 14 अनुसार, 24 जनवरी 1153 का है जो कि गुजरात के चालुक्य कुमार पाल के समय का है। दूसरा विक्रम संवत 1218 ईस्वीं 1161 का है, जिसमें परमार सिंधुराज से लेकर सोमेश्वर तक की वंशावली दी गई है और तीसरा विक्रम संवत 1235 का है, जो गुजरात के चालुक्य राजा भीमदेव द्वितीय के सामन्त चौहान मदन ब्रह्मदेव का है। इतिहासकारों का कहना है कि, किराडु के मंदिरों का निर्माण 11वीं शताब्दी में हुआ था तथा इनका निर्माण परमार वंश के राजा दुलशालराज और उनके वंशजों ने किया था।

यहां मुख्यत: पांच मंदिर है, जिसमें से केवल विष्णु मंदिर व सोमेश्वर मंदिर ही ठीक हालत में है। बाकी तीन मंदिर खंडहरों में बदल चुके हैं।

Kiradu Temple

किराडू मंदिर

खजुराहो के मंदिरों की शैली में बने इन मंदिरों की भव्यता देखते ही बनती है। हालांकि आज यह पूरा क्षेत्र विराने में बदल गया है, लेकिन यह पर्यटकों के लिए एक आकर्षक केंद्र है। इन मंदिरों को क्यूं बनाया गया और इसके पीछे इनका इतिहास क्या रहा है, इस पर भी शोध होना बाकी है।

बाड़मेर कैसे पहुँचें?

अगर आप रोमांच के लिए कोई नयी और अलग जगह की तलाश में हैं और रिस्क लेना पसंद करते हैं तो ज़रूर ही इस मंदिर की यात्रा पर जाएँ। शायद इसके रहस्य का भेद आपके सामने ही खुल जाये!

अपने महत्वपूर्ण सुझाव व अनुभव नीचे व्यक्त करें।

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