Search
  • Follow NativePlanet
Share
» »Then And Now : दिल्ली की ऐतिहासिक धरोहरें, जिनका हुआ था आजादी से पहले निर्माण

Then And Now : दिल्ली की ऐतिहासिक धरोहरें, जिनका हुआ था आजादी से पहले निर्माण

बस 1 दिन का इंतजार और, फिर देश आजादी के 77 साल पुराने होने के जश्न में डूब जाएगा। दिल्ली देश की राजधानी होने के साथ-साथ ऐतिहासिक रूप से भी काफी महत्वपूर्ण शहर रहा है। दिल्ली में ऐसी कई इमारतें और स्मारकें हैं जो आजादी की लड़ाई का केंद्र रही हैं। वहीं कुछ ऐसी ऐतिहासिक धरोहरें भी हैं, जिनका निर्माण आजादी से पहले किसी और उद्देश्य से ही किया गया था। लेकिन आज उनका इस्तेमाल किसी और काम के लिए किया जाता है।

delhi

चलिए दिल्ली की ऐसी कुछ ऐतिहासिक धरोहरों व इमारतों के बारे में जानते हैं -

1. लाल किला

Then - मुगल बादशाह शाहजहां ने लाल किला का निर्माण अपनी राजधानी शाहजहांपुर में रहने के लिए एक किला के तौर पर किया था। इस किले को बनने में करीब 10 सालों का समय लग गया था। जिस वक्त इस किले का निर्माण हुआ था, उस समय भारत की शक्ति के तौर पर इस किले को पहचान मिली थी। बाद में जब दिल्ली समेत पूरे भारत पर अंग्रेजों का अधिकार हुआ तो दिल्ली का लाल किला भी अंग्रेजों के लिए काफी महत्वपूर्ण सिद्ध हुआ। लाल किला पर अपना अधिकार जमाने के बाद अंग्रेज अधिकारियों ने इसे सैनिकों के रहने की छावनी के तौर पर इस्तेमाल करना शुरू कर दिया।
Now - आज लाल किला सिर्फ राजधानी दिल्ली ही नहीं बल्कि पूरे भारत की एक पहचान है। भले ही अंग्रेजों ने इसे बर्बाद करने की लाख कोशिशें की हो लेकिन भारत को आजादी मिलने के बाद सबसे पहला झंडा इसी किले की चहारदीवारी पर फहराया गया था जो परंपरा आज भी कायम है। लाल किला दिल्ली का एक प्रमुख पर्यटन स्थल भी है, जहां दिल्ली घूमने आने वाला हर पर्यटक जरूर जाता है।

red fort delhi

2. कुतुब मीनार

Then - वर्ष 1192 में कुतुब मीनार का निर्माण कुतुबुद्दीन-ऐबक ने शुरू करवाया था, जिन्होंने दिल्ली सल्तनत की स्थापना की थी। हालांकि वह इसका निर्माण पूरा नहीं करवा सकें थे। इसका निर्माण बाद में उनके बाद आने वाले शासकों ने करवाया था। मान्यताएं हैं कि इस मीनार का नाम कुतुबुद्दीन ऐबक के नाम पर रखा गया है लेकिन एक संभावना यह भी कहती है कि इस मीनार का नाम ख्वाजा कुतुबुद्दीन बख्तियार काकी नाम एक सुफी संत के नाम पर भी रखा जा सकता है, जिसका शमशुद्दीन इल्तुतमिश भक्त था।
Now - आज कुतुब मीनार दिल्ली का मुख्य पर्यटन स्थलों में से एक बन चुका है। कुतुब मीनार UNESCO की विश्व धरोहर लिस्ट में भी शामिल है। यह दिल्ली के महरौली इलाके में मौजूद है। कुतुब मीनार के अलावा यहां मौजूद मस्जिद, कब्र आदि भी घूमने की जगहें हैं, जहां पर्यटक जरूर घूमने जाते हैं।

qutub minar

3. जंतर-मंतर

Then - वर्ष 1724 में जयपुर के महाराजा जयसिंह द्वितीय ने जंतर-मंतर का निर्माण करवाया था। यह एक खगोलीय वेधशाला है, जो प्राचीन भारत की वैज्ञानिक उन्नति की मिसाल है। बताया जाता है कि मोहम्मद शाह के शासनकाल में हिंदु और मुस्लिम खगोलशास्त्रियों में ग्रहों की स्थिति को लेकर बहस छिड़ गयी थी, तब उसे खत्म करवाने के उद्देश्य से सवाई जय सिंह ने जंतर-मंतर का निर्माम करवाया था।
Now - कनॉट प्लेस में मौजूद जंतर-मंतर शानदार स्थापत्य कला का बेहतरीन नमूना है। बताया जाता है कि दिल्ली समेत देशभर में कुल 5 वेधशालाएं (बनारस, मथुरा, जयपुर और उज्जैन) बनायी गयी थी जिसमें से सिर्फ दिल्ली के जंतर-मंतर के यंत्र ही पूरी तरह से सही स्थिति में है। जंतर-मंतर कई तरह के राजनीतिक सभाओं व विरोध-प्रदर्शन का भी मुख्य स्थान बन चुका है।

purana qila

4. पुराना किला

Then - पुराना किला दो मुख्य कारणों से विख्यात है। यह दिल्ली में बने सबसे पुराने किलों में से एक है। इस किले का निर्माण करीब 5000 साल से भी ज्यादा समय पहले किया गया था। इसके साथ ही दिल्ली के इस पुराने किले में पुस्तकालय की सीढ़ियों से फिसलकर चोट लगने की वजह से मुगल सम्राट हुमायूं की मौत हुई थी। बताया जाता है कि इस किले का निर्माण 16वीं सदी में किया गया था। कहा जाता है कि यह उसी स्थान पर बना हुआ है, जिसे महाभारत काल में इंद्रप्रस्थ के रूप में जाना जाता था।
Now - लगभग 2 किमी की परिधि में फैला हुआ दिल्ली का पुराना किला पर्यटकों के लिए प्रमुख आकर्षण का केंद्र है। इसे दिल्ली का सबसे पुराना किला माना जाता है। लोग सुबह या फिर शाम के वक्त अक्सर इस किले पर घूमने के लिए आते हैं। यह किला दिल्ली चिड़ियाघर के पास मौजूद है।

india gate delhi

5. इंडिया गेट

Then - दिल्ली के कर्तव्यपथ पर मौजूद इंडिया गेट का निर्माण वर्ष 1931 में किया गया था। इसका निर्माण शाही नेपाल सरकार द्वारा उन 10,000 भारतीय सैनिकों की याद में किया गया था जिनकी मौत प्रथम विश्वयुद्ध के दौरान अफगान युद्ध में हो गयी थी। ये सभी भारतीय सैनिक ब्रिटिश सेना का हिस्सा थे। किसी समय यहां ब्रिटेश के राजा जॉर्ज पंचम की मूर्ति भी लगायी गयी थी। इसके अलावा भारतीय सैनिकों की याद में यहां अमर जवान ज्योति जलायी गयी थी, जो 1971 में भारत-पाकिस्तान युद्ध में शहीद हुए थे।
Now - वर्ष 2022 में इंडिया गेट पर जलने वाले अमर जवान ज्योति को पास में ही नवनिर्मित वार मेमोरियल में स्थानांतरित कर दिया गया है। अब इंडिया गेट पर नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 3D प्रतिमा लगायी गयी है। इंडिया गेट भी दिल्ली का एक प्रमुख पर्यटन स्थल है जहां सिर्फ घूमने के लिए आने वाले लोग ही नहीं बल्कि दिल्ली में रहने वाले लोग भी अक्सर घूमने जाया करते हैं।

More News

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+